आईआईटी बॉम्बे के पवई परिसर स्थित गेस्ट हाउस में पूर्व विद्यार्थी के पिता द्वारा रिसेप्शन पर भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार, महिलाओं के मुक्तिदाता, शोषितों-वंचितों के मसीहा ,महान अर्थशास्त्री, संवैधानिक विचारक, राष्ट्रवाद के चिंतक, ज्ञान और न्याय के प्रतीक, विश्वरत्न परम पूज्य बाबा साहेब के खिलाफ जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणी बेहद गंभीर ,शर्मनाक और दण्डनीय है।
आरोपी द्वारा पर कहा गया कि “देश का संविधान एक भंगी ने बनाया तो भंगी के हिसाब से बनेगा।”
परम पूज्य बाबा साहेब के लिए ऐसी जातिसूचक भाषा का इस्तेमाल केवल एक महापुरुष का अपमान नहीं, बल्कि भारतीय संविधान, सामाजिक न्याय और देश के मानवतावादी लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है।
परम पूज्य बाबा साहेब और संविधान का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले में निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।
जय भीम! जय भारत! जय संविधान!
@CMOMaharashtra@Dev_Fadnavis@iitbombay
कुछ दिन पूर्व, नगीना लोकसभा क्षेत्र के नगीना शहर स्थित मोहल्ला सराय मीर निवासी भाई तलत मंसूरी जी की धर्मपत्नी का असामयिक निधन हो गया।
दिनांक 03 अक्टूबर 2026 को शोक-संतप्त परिवार से मुलाक़ात कर अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं और उन्हें इस कठिन दुःख की घड़ी में ढांढस बंधाया।
गत दिनों नगीना लोकसभा क्षेत्र की नगीना विधानसभा के नगीना शहर स्थित मोहल्ला कस्बा मीर की सराय निवासी भाई दीनू कुरैशी जी की 10 वर्षीय बेटी रूही परवीन का सर्पदंश के कारण निधन हो गया।
कल शोक-संतप्त परिवार से मुलाक़ात कर अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं और उन्हें ढांढस बंधाया।
भाई चन्द्र शेखर आजाद जी - यह गुल्लक किसकी है,
बच्चा - थारी है..😀😆♥️
यह पश्चिम के लोग, पूर्वांचल चले जाए.. जिन शब्दों का यह प्रयोग करते उसको गूगल भी सर्च करके देखता है यह कहना क्या चाहे रहे है..😀😀😀
मैं अभी अपने नगीना लोकसभा क्षेत्र के धामपुर में हूँ। पिछले 20-25 मिनट से ज्यादा समय से यहाँ खड़ा हूँ, क्योंकि मेरे बार-बार कहने के बावजूद हमारे यहाँ ओवरब्रिज और अंडरपास नहीं बन पाए हैं।
दुनिया में समय बहुत कीमती है। अगर किसी व्यक्ति का सिर्फ कहीं जाने में ट्रैफिक की वजह से 25 मिनट का समय चला जाए, तो आप सोचिए—कैसे भारत विश्वगुरु बनेगा? कैसे हम दुनिया में आर्थिक शक्ति बनेंगे?
25 मिनट के बाद रास्ता खुला है। इस दौरान तीन ट्रेनें पास हुई हैं। इंतजार करके मैंने खुद यह देखा है।
मैंने सदन में भी सवाल उठाया और लेटर के जरिए भी बार-बार केंद्रीय रेल मंत्री जी से अपील की कि हमारे यहाँ ओवरब्रिज बन जाए, अंडरपास बन जाए। हर बार आश्वासन मिलता है—इस बार बनाएंगे, इस बार करेंगे।
एक तरफ सरकार चाँद पर ले जाने की बात करती है, मंगल पर ले जाने की बात करती है, विश्वगुरु बनाने की बात करती है—कम से कम बुनियादी सुविधाएं तो उपलब्ध करा दो।
मैं पुनः केंद्रीय रेल मंत्री जी से मांग करता हूँ कि बिजनौर-नगीना लोकसभा क्षेत्र में ओवरब्रिज और अंडरपास के लिए जो आवेदन मैंने दिए हैं, उन पर जल्द से जल्द काम कराया जाए और लोगों को इस समस्या से निजात दिलाई जाए।
मैंने नहटौर में भी कनेक्टिविटी और रेलवे कनेक्टिविटी से जुड़ी कई मांगें आपके सामने रखी हैं। लेकिन हमेशा यही आश्वासन मिलता है—इस बार करेंगे, इस बार करेंगे।
आज के इस तकनीकी युग में जनता पेट्रोल-डीजल पर टैक्स देती है, रोड टैक्स देती है, हाईवे और टोल टैक्स देती है। इसके बावजूद अगर लोगों को इस तरह की असुविधा का सामना करना पड़े, तो इसका जिम्मेदार कौन है? इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
आप सभी के लिए मंगलकामनाएं। साधुवाद 🙏
आज धामपुर स्थित अपने आवास पर नगीना लोकसभा क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों से आए क्षेत्रवासियों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की।
उनकी समस्याओं को ध्यान से सुना और उनके शीघ्र समाधान के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों से तुरंत बातचीत की।
छह साल पहले आज ही की सुबह जब देश-दुनिया सोकर उठ रही थी, तब हाथरस से आई उस खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया था। रात के अंधेरे में 2:45 बजे हाथरस की बेटी बहिन मनीषा वाल्मीकि के शव का भारी पुलिस बल द्वारा परिवार की इच्छा के विरुद्ध अमानवीय ढंग से जबरन अंतिम संस्कार करा दिया गया। जिस परिवार को अपनी बेटी को अंतिम विदाई देने का अधिकार था, उसे ही उससे वंचित कर दिया गया। यह उनके सम्मान और मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन था।
छह साल बाद भी मनीषा का परिवार न्याय, सुरक्षित आवास और रोजगार के लिए संघर्ष कर रहा है। 2022 के आदेश के बावजूद कार्रवाई न होने पर अगस्त 2026 में हाईकोर्ट को फिर हस्तक्षेप करते हुए सरकार को तीन महीने के भीतर परिवार को गाजियाबाद या नोएडा में पुनर्वासित करने और एक सदस्य को रोजगार देने का निर्देश देना पड़ा।
छह साल पहले मनीषा को न्याय नहीं मिला और माननीय उच्च न्यायालय के बार-बार आदेश के बावजूद छह साल बाद भी उनका परिवार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। जिस परिवार ने अपनी बेटी खोई, उसे न्याय और सम्मान के लिए भी वर्षों तक संघर्ष करना पड़े, इससे बड़ा सवाल सरकार की जवाबदेही पर और क्या हो सकता है?
बहिन मनीषा, तुम्हारे साथ हुआ अन्याय कभी नहीं भूलेंगे।