गुजरात के मेहसाणा के खेरालु गाँव में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कक्षा 10 के टॉपर्स बच्चों को सम्मानित किया जाना था। जिसमें पहले नम्बर के छात्र की जगह पर सीधा दूसरे नम्बर के छात्र को बुला कर सम्मानित किया गया। पहले नम्बर वाले को बुलाया ही नहीं गया। जानते हैं क्यूँ ?
वजह सिर्फ इतनी है कि पहले नंबर वाली छात्रा मुस्लिम समुदाय से थी। उस बच्ची के पैरेंट्स ने जब स्कूल से इस का कारण जानना चाहा तो स्कूल ने कहा की हम आपकी बच्ची को बाद में उसका पुरुस्कार दे देंगे। ये सुनकर बच्ची रोने लगी। बच्ची के माता पिता ने कहा कि हमें पुरस्कार नहीं चाहिए था। हमारी बच्ची को पहचान चाहिए थी जो स्कूल ने स्वतंत्रता दिवस पर नहीं दिया। और हमारी बच्ची के साथ नाइंसाफ़ी हुई है।
ये घटना उस राज्य की है जहां से हमारे देश के प्रधानमंत्री @narendramodi जी आते हैं। और ये उस प्रधानमंत्री के राज्य की घटना है जहां के प्रधानमंत्री “सबका साथ, सबका विकास” की बात करते हैं। ये कैसा सबका साथ, सबका विकास है।
@KashifArsalaan सबसे पहले तो जहां भी हिन्दू दरगाहों पर आते हैं उन पर रोक लगाओ और उनसे कहो कि पहले हिन्दू संगठनों से पुछ कर आओ लिखवा कर लेकर आओ नहीं तो उन बजरंग दल के गुंडों को ही कहो कि आप जिस परेशानी के लिए दरगाहों पर आ रहें हों क्या बजरंग दल के गुंडे या हिन्दू संगठन उसको दुर कर सकते हैं
@KashifArsalaan सबसे पहले तो देश की मिडिया को समझना होगा मिडिया की वजह से ही आम आदमी एक दूसरे के प्रति नफ़रत भर रहा है मिडिया देश को बर्बादी की कगार पर ले जा रहा है जो बहुत ही नुकसानदेह है
@TrueStoryUP मिडिया पर कभी ऐसी खबरों को नहीं दिखाया जाता है जिसमें हिन्दू ब्लातकारी हों मामले तो रोज हो रहे हैं ब्लातकार के चोरी के लुट के मारकुट के खुनखराबा के अधीकतर मामलों में हिन्दू आरोपी होते हैं कुछ एक मुस्लिम होता है फिर भी दिन भर टिवी चेनलो पर हर बात पर मुस्लिम दोषी ही बताया जाता है
बिना सोचे समझे किसी समुदाय पर आरोप लगा कर देश को नफ़रत की आग में झोंकने वाले ऐसे न्यूज़ चैनल पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए और ऐसे चेनल को बेन करना चाहिए