ईद का नमाज़ पढ़ने जा रहे मुसलमानो पे संभल के DM और SP फूल बरसा रहे।
सेकुलर भारत की यही तो खूबसूरती है ऐसे ही सर्व धर्म सम्मान होना चाहिए सलाम है इन दोनों अधिकारियों को।
लेकिन कुछ लोग कहेंगे कि ये दोनो मुसलमानो पे नही कांवड़ियो पे पुष्प वर्षा कर रहे।
बेचारे की मीट से भावना आहत हो रही थी बीच में ब्लैक टी-शर्ट ने बोल दिया कि जरा लगे हाथ शराब के ठेके भी बंद करवा दो तो बेचारा उखड़ गया!
अब वो भी सोच रहा होगा अपना सिस्टम बिना ठर्रे कैसे चलेगा🤣
ईद मुबारक! मेरी हार्दिक दुआ है कि यह ईद आपके और आपके परिवार के लिए ढेर सारी खुशियां, सुकून और तरक्की लेकर आए। खुदा आपकी इबादतों और नेक कामों को कुबूल फरमाए। आपकी हर जायज़ मुराद पूरी हो और आप हमेशा सलामत रहें। खुदा से प्रार्थना है कि वे हमारे देश में अमन और भाईचारा बनाए रखें और हम सबको सुख, समृद्धि और उन्नति के रास्ते पर ले जाएं। आमीन।
#Eid2026
#EidMubarak
अगर कोई मुसलमान सिर्फ 5 मिनट नमाज़ भी पढ़ लेता तो अब तक जेल भेज दिया जाता मगर ईनलोगों को सड़क पर कुछ भी करने की छूट है!
आज ईद के दिन दिल्ली के उत्तम नगर में खुलेआम सड़क घेरकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो रही है, और कानून चुप है।
कहाँ है दिल्ली पुलिस? क्या कानून सिर्फ एक ही समुदाय के लिए है?
कुछ लोग कैमरा लेकर मुसलमानों के खिलाफ ज़हर उगलते हैं, भीड़ को भड़काते हैं और जब उसी नफरत का असर जमीन पर दिखता है, तो सब गायब हो जाते हैं।
आज वही लोग नजर नहीं आ रहे, जिनकी जुबान हर वक्त जहर उगलती है।
अभिनव पांडे जैसे पत्रकार भी अब खामोश हैं , यही चाहते थे न आप ?
#UttamNagar #Eid #EidWishes
🚨⚡️ यह मक्का नहीं यह मॉस्को है
रूस की राजधानी मॉस्को के दिल में हजारों मुसलमान ईद-उल-फ़ित्र की नमाज़ के लिए एकत्र हुए।
यह दृश्य इस बात को दर्शाता है कि यहाँ मुसलमानों को धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त है और वे देश के सामाजिक एवं राष्ट्रीय जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
"जब इसी गंगा में मल मूत्र जाता हैं और 16 नालों का गंदा पानी जाता है इस पर तो नालायक हिंदुओं की भावनाएं आहत नहीं होती?" स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
वाराणसी में इफ़्तार पार्टी के दौरान गिरफ्तार किए गए 14 मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी का विरोध स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी कर दिया है और गंभीर सवाल भी उठा दिए हैं।
सूडान में इफ्तार-ए-जमाअती सिर्फ़ एक रिवायत नहीं, बल्कि सख़ावत और मुहब्बत की जीती-जागती मिसाल है।
अहले-सूडान की मेहमाँनवाज़ी और बुलंद अख़लाक़ ये सिखाते हैं कि असली ख़ूबसूरती बाँटने में है, ना कि अपने तक महदूद रखने में..!!