आदरणीय बाबा डिशूम गुरु श्री शिबू सोरेन जी के साथ आंदोलन के शुरुआती दिनों में साथी रहे धनबाद जिला के निरसा विधानसभा राजनीति क्षेत्र के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष स्वर्गीय शिवलाल सोरेन को भावभीनी श्रद्धांजलि
सुरक्षा और अपराध नियंत्रण का मतलब आम नागरिकों में भय पैदा करना नहीं, बल्कि उनके भीतर विश्वास जगाना है। रात्रि गश्ती के नाम पर सड़कों और दुकानों पर मौजूद आम जनता पर लाठियां बरसाना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है।पुलिस को अपनी मुस्तैदी और सख्ती अपराधियों, भ्रष्ट तत्वों और अवैध धंधेबाजों पर दिखानी चाहिए, न कि मेहनत-मजदूरी कर घर लौट रहे आम लोगों पर। जनता को सुरक्षा का अहसास चाहिए, लाठियों का खौफ नहीं।समस्या का समाधान लाठी चलाने से नहीं, बल्कि अपना सूचना तंत्र (Intelligence Network) मजबूत करने से होगा। जब तक पुलिस और जनता के बीच 'मित्र पुलिसिंग' का संबंध नहीं होगा, तब तक अपराध पर प्रभावी नियंत्रण मुश्किल है।
वरिष्ठ पुलिस पदाधिकारी इस मामले का तुरंत संज्ञान लें और सुनिश्चित करें कि सुरक्षा के नाम पर किसी भी निर्दोष नागरिक का उत्पीड़न न हो।"
@jharkhandcmo@jharkhandpolice@DCEastSinghbhum
लखीमपुर खीरी जिले के धौरहरा कोतवाली क्षेत्र के सिसैया खुर्द गांव में खराब रास्ते और कीचड़ की समस्या को लेकर धौरहरा से भाजपा विधायक विनोद शंकर अवस्थी तथा ग्राम प्रधान के खिलाफ धरना देने व नारेबाजी करने वाले लोधी समाज के ग्रामीणों के साथ पुलिस की बर्बरता बेहद पीड़ादायक, गंभीर और चिंताजनक है।
ग्रामीणों के अनुसार, सोमवार देर रात धौरहरा पुलिस फोर्स के साथ गांव पहुंची और कई घरों में घुसकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों समेत ग्रामीणों की बेरहमी से पिटाई की। आरोप है कि इस दौरान गांव की बिजली भी काट दी गई, ताकि घटना का कोई वीडियो न बन सके। पुलिस की पिटाई में महिलाओं और बच्चों समेत 16 ग्रामीण घायल हुए हैं। घटना के बाद से पूरे गांव में डर और दहशत का माहौल है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि 5-5 साल के मासूम बच्चों को भी नहीं बख्शा गया। परिजनों के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने बच्चों को इस बेरहमी से पीटा कि यह तक नहीं देखा कि चोट शरीर के किस हिस्से में लग रही है। आरोप है कि कुछ बच्चों के गुप्तांग में भी चोटें आई हैं।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, क्या बदहाल सड़क और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर आवाज उठाना इतना बड़ा अपराध है कि ग्रामीणों के घरों में घुसकर महिलाओं, बुजुर्गों और मासूम बच्चों तक को पीटा जाए?
@UPGovt से हमारी मांग है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लाई जाए, दोषी पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय हो, घायल ग्रामीणों और बच्चों को उचित उपचार एवं न्याय मिले तथा सिसैया खुर्द के खराब रास्ते की समस्या का तत्काल समाधान कराया जाए।
सोचिए कितना दुखद है कि आज भी मध्य प्रदेश में आदिवासी परिवारों को पानी के लिए इस तरीके से तरसना पड़ता है,
जबकि वहां पिछले लगभग 25 वर्षों से भाजपा की ही सरकार है,
और तीन इंजन से ज्यादा की सरकार है।
4400 करोड़ की लागत से बन रहा रामवनगमन मार्ग उद्घाटन से पहले ही धंस गया
प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर धाम के पास ये सड़क धंस गई है
सोचिए भ्रष्टाचार चरम पर है।
“तुम हमारे गिलास में पानी कैसे पी लिए?”
बस यह एक सवाल सुनिए और फिर उन तमाम दावों को याद कीजिए कि अब जाति कहाँ बची है, भेदभाव तो कब का खत्म हो चुका है, अब तो सब बराबर हैं!
जिस पानी पर किसी जाति का अधिकार नहीं, जिस प्यास में कोई ऊँच-नीच नहीं, उसी पानी का एक गिलास आज भी किसी इंसान को उसकी जाति याद दिला देता है। सोचिए, उस व्यक्ति पर क्या गुजरती होगी जिसे केवल पानी पी लेने भर से उसकी सामाजिक हैसियत बताने की कोशिश की जाए।
जातिवाद केवल किताबों में दर्ज इतिहास नहीं है। वह आज भी भाषा, व्यवहार, अपमान और रोज़मर्रा की छोटी-छोटी घटनाओं में दिखाई देता है।
इसलिए सवाल आरक्षण कब खत्म होगा का नहीं, सवाल यह है - जाति के नाम पर यह अपमान कब खत्म होगा?
जिला बदायूं के दातागंज थाना क्षेत्र में दलित युवक राजेश कोरी की पुलिस कस्टडी में मौत बेहद दुखद,गंभीर और चिन्ताजनक है।
परिजनों के अनुसार, पुलिस की पिटाई के बाद राजेश की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। अब हवालात के अंदर का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें राजेश पानी पीने की हालत में तक नजर नहीं आ रहा है और पुलिसकर्मी के हाथ छोड़ते ही वह जमीन पर गिर जाता है। यह वीडियो पुलिस की भूमिका और पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिस कह रही है कि पहले राजेश की तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि अगर राजेश की हालत इतनी खराब थी तो उसे समय रहते इलाज क्यों नहीं दिया गया?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस के बचाव में परिजनों से तहरीर लेकर दूसरे पक्ष के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर दिया गया। अगर हत्या हुई थी, तो राजेश पुलिस की हवालात में क्यों था? और अगर वह पुलिस हिरासत में सुरक्षित था, तो हवालात के अंदर उसकी हालत इतनी गंभीर कैसे हुई?
दातागंज थाने के CCTV फुटेज को तत्काल सुरक्षित कर सार्वजनिक किया जाए। पुलिस हिरासत में हुई इस मौत की जांच उसी पुलिस तंत्र से नहीं, बल्कि स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय एजेंसी से कराई जाए।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी जवाब दें कि दलित युवक राजेश कोरी की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है?
@UPGovt से हमारी मांग है कि पुलिस हिरासत में हुई दलित युवक राजेश कोरी की मौत की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। दोषियों को बचाने के बजाय उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा मृतक के परिवार को न्याय, सुरक्षा और उचित मुआवजा दिया जाए।
हमारी संवेदनाएँ भाई राजेश कोरी के शोकाकुल परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
Shocking Condition of government schools in Hingoli.
Toilets stink so badly you can barely stand inside. Taps are broken. Washrooms are completely unusable.
This is a daily struggle for little kids.
#SchoolThikKaro
इस 15 साल की बच्ची का मोदी की ट्रोल आर्मी ने जीना हराम कर दिया है।
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री 15 साल की बच्ची से लड़ रहे हैं।
ग़ज़ब हाल है।
रांची। JPSC-JSSC अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से की भावुक अपील, कहा—‘एक बार छात्रों की बात मानिए’ अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से छात्र हित में निर्णायक पहल करने की अपील की। उन्होंने कहा,यकीन मानिए, यदि आज आप छात्र हित में फैसला लेंगे तो तमाम छात्र आपके साथ खड़े होंगे।
#Ranchi