शनि रेवती नक्षत्र में 9 अक्टूबर तक है.
गुरु 2 जून - 31 अक्टूबर : उच्च राशि कर्क में. गुरु की शनि पर पूर्णदृष्टि रहेगी.
आपकी राशि/लग्न जो भी हो अगले चार महीनों में बड़ा परिवर्तन संभव है. कोई अंत, कोई नई शुरुआत.
पिछली बार शनि रेवती नक्षत्र में अप्रैल 1997 से अप्रैल 1998 तक रहा था.
श्रद्धा-विश्वास!
रोजी-रोजगार, आर्थिक संकट, संतान बाधा, वैवाहिक जीवन की समस्याएं, स्वास्थ्य कष्ट, कोर्ट केस आदि कोई भी समस्या हो, उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल में अल्मोड़ा के निकट न्याय के देवता गोलू के मंदिर में घण्टियों के साथ कागज पर अपनी गुहार लिखिए. -- मनोकामना अवश्य पूरी होगी.
श्रद्धा-विश्वास!
यूपी के मुरादाबाद मंडल में बहजोई (संभल) के निकट स्वयम्भू शिवलिंग पातालेश्वर महादेव से जुड़ी रोचक मान्यता है कि मंदिर प्रांगण में झाड़ू लगाने से श्रद्धालुओं को कुष्ठ एवं चर्म रोगों से निज़ात मिलती है.
-- पौराणिक मान्यता है कि कलियुग में कल्कि अवतार संभल में होगा.
आज अधिमास ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी है. यह हर तीन साल में एक बार आती है, इसे पुरुषोत्तम या परमा एकादशी कहते हैं. इस दिन किए गए व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को कष्टों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. एकादशी को चावल खाना वर्जित है.
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
भाग्य...
तमाम मोटिवेशनल कोट्स से इतर कई लोगों को सफलता प्राप्त होती है जैसे अंधे के हांथ बटेर लगना या पकी-पकाई थाली मिलना.
जबकि कुछ लोगों के साथ ऐसा भी होता है कि मनोयोगपूर्वक चल कर भण्डारे में गए किंतु अंदर पहुंचे तो पूड़ी खत्म और बाहर आए तो चप्पलें गायब.
फ़िल्म आनंद में एक डायलॉग है, बाबू मोशाय, ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं. मुक्तिबोध ने कहा, अब तक क्या किया, जीवन क्या जिया! दुखों के दागों को तमगों-सा पहना, अपने ही ख्यालों में दिन रात रहना, बहुत-बहुत ज्यादा लिया, दिया बहुत-बहुत कम...
इत्ते साल उत्ते साल गिनने का क्या मतलब?!
चुनाव परिणामों के बाद कुछ नेताओं की स्थिति पर भूषण की ये पंक्तियां सटीक हैं. कविता में यमक अलंकार मौजूदा दौर में सियासी नैरेटिव बन गया है
कंद मूल भोग करैं, कंद मूल भोग करैं
तीन बेर खाती थीं, वे तीन बेर खाती हैं।
भूषन सिथिल अंग, भूषन सिथिल अंग
बिजन डुलाती थीं, वे बिजन डुलाती हैं।
आज चंद्रमा उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के अंतर्गत मीन राशि में है. गुरु की राशि में शनि चंद्र युति पर गुरु की पूर्णदृष्टि है.
इस अहम ग्रह स्थिति में सोचना चाहिए कि क्या हम वाकई कुछ नया कर रहे हैं या सिर्फ पैटर्न का हिस्सा हैं? आजकल के दौर में लोग भ्रम को भी सब्सक्राइब करने लगे हैं.
शुक्र कल से पुनर्वसु नक्षत्र कर्क राशि में गुरु के साथ आएगा. शुक 4 जुलाई तक कर्क में रहेगा.
आर्थिक मामलों के लिए यह गोचर अच्छा है. घर/ ऑफिस के इंटीरियर और विलासिता की बस्तुओं पर खर्चा होने का योग है. उम्र और तजुर्बे में अपने से बड़े व्यक्ति के सानिध्य में भावनात्मक सुकून मिलेगा.
उस महिला का जन्म एक पारसी परिवार में हुआ था. उसने एक मुस्लिम प्रोफेसर से प्रेम विवाह किया, लेकिन धर्मांतरण नही किया था. पारसी धर्म की अनुयायी बनी रही. उसकी मृत्यु के बाद पारसी और मुस्लिम समुदाय के इंकार के कारण, अंततः हिंदू रीति रिवाजों से उसका अंतिम संस्कार हुआ है. - स्तब्ध हूँ!
षष्ठम भाव - रोग, अष्टम भाव- सर्जरी/ पीड़ा, द्वादश भाव - हॉस्पिटल में भर्ती/ उसका खर्चा
रोगादि विषय में विंशोत्तरी दशाओं और गोचर में चल रहे ग्रहों का उपरोक्त भावों से सम्बंध समझने से स्थिति स्पष्ट होती है. और तदनुसार ग्रह शांति के उपाय करने से राहत मिलती है.
शनि की दशा या साढ़े साती चल रही है तो धैर्य रखिए. स्थिति को स्वीकार कीजिए. भरोसा कीजिए. फीनिक्स पक्षी की तरह, कि इसे जब जब मरा हुआ समझा जाता है, तब तब ये फिर से ज़िंदा हो जाता है. कहते हैं कि आग लगाकर इसे मार दिया जाता है लेकिन उस आग से बनी राख से ये फिर से नया जन्म लेकर उठता है.
जब कोई महादशा समाप्त होने वाली हो और नई दशा शुरू होने वाली होती है तो उस संधि काल में मानसिक और शारीरिक स्थिति संवेदनशील होती है. यदि इस दौरान गोचर में सूर्य कुंडली के षष्ठम, अष्टम या द्वादश भाव में गोचर कर रहा हो तो वह महीना कष्टदायक हो सकता है. ऐसे समय मन:स्थिति पर काबू रखें.
राहु की दशा चल रही हो तो मुग़ालते (illusions) से बचिए. अप्रत्याशित खुशी और अचानक लाभ हो सकता है, परंतु राहु दशा के अंतिम चरण में बृहस्पति की दशा शुरू होने से पहले वह सब छिन सकता है. वास्तविकता का सामना करना पड़ता है. वैसे तीन, छह और ग्याहरवें भाव में राहु को अच्छा भी माना गया है.
मौसम संबंधित जानकारी है कि आज 4 जून को मानसून केरलम में पहुंचेगा. इस हिसाब से उत्तर की ओर लगभग 21/22 जून तक पहुंचने की संभावना है.
-- पञ्चाङ्ग के अनुसार सूर्य 22 जून को आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेगा. यह मानसून के आगमन का सूचक है. तब तक रेतीला बवंडर, आंधी, लू और प्री मानसून.
"ज़िंदगी तो अपनी रफ्तार से चलती रहती है..." ये अंतिम शब्द थे, 13 जून'97 को दिल्ली के उपहार सिनेमा अग्निकांड पर आजतक में अपने मार्मिक बुलेटिन के अंत में एस पी सिंह के. 27 जून को ब्रेन हेमरेज से उनकी मृत्यु हो गई थी. आज 3 जून को दिल्ली के मालवीय नगर में हुए हादसे की खबर से याद आया.
ज्योतिषी को पार्टी सापेक्ष नहीं होना चाहिए. प्रबुद्ध नागरिक के नाते किसी विचार या निर्णय पर अपनी निजी राय होना और उसे व्यक्त करना वाज़िब है. कोई टिप्पणी करते समय उनकी समझ सही या गलत हो सकती है. परंतु उनके निजी इमोशंस ज्योतिषीय विश्लेषण पर इतने हावी न हों कि वो वस्तुगत न रह पाए.
अधिकांशतः दैनिक राशिफल चंद्रमा के गोचर पर आधारित होता है. लोग इसे चाव से पढ़ते हैं. चंद्रमा एक राशि में सवा दो दिन रहता है. पाश्चात्य ज्योतिष में महीना भर एक राशि में रहने वाले सूर्य के आधार पर गणना होती है. चंद्रमा मन का कारक है. रोजमर्रा की ज़िंदगी में मनोदशा का महत्व होता है.