#BREAKING: India’s Women Hockey Team win Gold beating defending champions China 1-0 in the Asian Games Final. India qualify for the 2028 LA Olympics. India’s massive golden glory. Hockey Gold for Indian Women Team after 44 years. Congratulations to the stars! 🇮🇳
@MoHFW_INDIA I have applied for CGHS card for my parents before 2 month but not getting card as CGHS personnel are saying that it will take time, please look into it on priority
Thanks
तो इंदिरा साहनी वाले निर्णय में यह स्पष्ट किया गया था कि पायलट से ले कर कोई भी ऐसा क्षेत्र जहाँ प्रतिभा से समझौता मृत्यु को आमंत्रण है, या देश की बर्बादी का बिगुल, वहाँ आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। शोध, मेडिकल-इंजीनियरिंग या अन्य तकनीकी विषयों के सुपर स्पेशियालिटी, प्रोफ़ेसर्स के पद के लिए, रक्षा सामग्री बनाने के लिए दिए पदों में आरक्षण ना दिया जाए।
यानी, जजों ने स्वयं माना है कि आरक्षण पाने वाले गुणवत्ता को घटाते हैं।
Undeniable proof in the Sahil Wankode suicide case.
Another CCTV footage emerges where he seems to have been caught with a phone, cheating in exams. He then hands over the phone to the invigilator.
IIT Bombay suicide case is extremely unfortunate.
But if the professor is booked under SC/ST Act, then-
we are setting a very dangerous precedent in our schools and colleges.
हायकोर्ट को बंद करवाइए मोदी जी। ये कोई तरीका है कि कोई दलित वकील इसे अपना धंधा बना चुका है, उसकी अब जाँच होगी? वकील संतोष दोहरे ने कुछ केस कर के ₹23,36,250 पाए और उसके बाद 10-12 और लंबित हैं। यानी और पैसे बनेंगे।
मोदी एक्ट केवल दंड विधान नहीं है, बल्कि यह एक @MSDESkillIndia का स्टार्ट अप प्रोग्राम भी है।
जम्मू कश्मीर के पूर्व DGP शेष पाल वैध जी ने कहा,
"सरकार ने सीजेपी के सामने सुप्रीम कोर्ट में लिखकर दे दिया कि उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने भी दूसरे राज्यों में दर्ज ऐसे मामलों को वापस लेने की बात कही।
तो सवाल है कि आगे से कोई अराजकता फैलाए, पुलिसवालों को घायल करे, पब्लिक प्रॉपर्टी और गाड़ियाँ तोड़े, तो क्या पुलिस को कार्रवाई करने से पहले पूछना चाहिए कि FIR करनी है या नहीं?
दिल्ली पुलिस ने जिन लोगों को आइडेंटिफाई किया, उनमें कथित तौर पर कई लोगों का क्रिमिनल रिकॉर्ड था। अगर पहले की FIR ठीक थी तो नई FIR क्यों?
मुझे लगता है, यह बहुत खतरनाक ट्रेंड है। झारखंड में जेनुइन बच्चे अपने हक के लिए लड़ रहे थे, उन पर लाठीचार्ज हुआ, लेकिन उनके केस वापस लेने की कोई बात नहीं हुई। यहाँ मापदंड अलग क्यों है?
भारत सरकार ने जिस तरह सीजेपी के सामने सरेंडर किया, उससे गलत संदेश जाएगा कि कोई भी पुलिस के सिर फोड़ दे, पब्लिक प्रॉपर्टी तोड़ दे और पुलिस कार्रवाई भी न करे।
मेरी अपील भारत सरकार और माननीय सुप्रीम कोर्ट से है कि इस चीज से बचना चाहिए।"
देखिए कैसे ओबीसी की 75% जातियों को 3% हिस्सा भी नहीं मिला आरक्षण के फायदे का और 25% जातियां 97% फायदा ले गईं।
इसलिए जरूरी है आर्थिक आधार पर आरक्षण
#ReservationReformआंदोलन
यूपी प्रयागराज में सेप्टिक टैंक में काम करने के दौरान रजत शुक्ला और निहाल शुक्ला की मौत हो गई।
इनके घर की हालत देखिए ये करोड़पति ब्राह्मण थे?
ये हाल है ब्राह्मणों का, नाला-गटर साफ़ कर रहे है।
‼️ Update in MP 73% Reservation Case‼️
DMK lawyer P. Wilson appeared from OBC side & quoted Mahajan Commission report and it's data to backup his claim for increased OBC reservation.
The same Mahajan Commission report which called Shri Ram as "Casteist".
The same report which BJP denied making. But ended up using in court as primary evidence.
How GCs have been fooled over years!!!
आतंकी:- क्या नाम है तुम्हारा?
मजदूर:- दीपक रात्रे और बोपिंदर
आतंकी:- कौन सा धर्म है
मजदूर:- हिंदू साहेब
उसके बाद दोनों मजदूरों की गोली मारकर निर्मम बड़े। कश्मीर के कुलगाम में अन्य मजदूर भी थे लेकिन हिंदू धर्म का पूछा और मार डाला….. छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे मजदूर
General category in India is ~31%.
OBC-Creamy layer is also unreserved.
Total Unreserved population in India is ~35-40% !
So never underestimate your strength UR ppl!
With this much vote power, you can make or break a government.
It's time to ask for your rights!!
Wake-up!!
कैसे शुरू हुआ 'Reservation Hatao Andolan'? कौन हैं हर्ष दुबे जो शिक्षा में आरक्षण के ख़िलाफ़ उठा रहे हैं आवाज?
क्या जातिगत आरक्षण से समाप्त हो सकती है सामाजिक असमानताएं? कौन है Reservation का असली हकदार?
@RitikaChandola से बातचीत में @Harshdubey9956 ने ऐसे ही कुछ सवालों के बेबाकी से दिए जवाब?
आरक्षण पर चर्चा किसी भी पार्टी को असहज करेगी, और अब वही करना पड़ेगा। पटरी उखाड़ कर आरक्षित हो जाना, सामाजिक न्याय नहीं, राजनैतिक गिरोहबाज़ी है। अब जबकि प्रताड़ित वर्ग इस पर लामबंद हो रहा है, तो सत्ता के चाटुकारों को समस्या होने लगी है कि ये 'मूर्खता' है।
UGC, NEET, CBSE पर बोलना भी सबको मूर्खता और षड्यंत्र ही लग रहा था, फिर एक भीड़ आई, आप पर थूका और आपको चाटना पड़ा। अंततः, हुआ वही जो हम आपको बता रहे थे।
अब आरक्षण पर भी एक संगठित, सघन और गंभीर चर्चा होगी। इसके चक्कर में चुनावों पर असर पड़ना चाहिए कि कौन इन विषयों पर चर्चा से भाग रहे हैं, कौन इसे नकार रहे हैं, और कौन एक ही श्वास में 'विकसित भारत' और निजी क्षेत्र में आरक्षण ढूँढ रहे हैं।
अब मुझे यह मैटर नहीं करता कि कौन सत्ता में है और किसको होना चाहिए, मैंने पिछले 7 महीनों में जो देखा और फिर गत शनिवार को जो हुआ, उस से में आश्वस्त हूँ कि बिखरा हुआ, बिका हुआ नैरेटिव काम नहीं आता। सत्ता में रहने या निकाले जाने की चिंता राजनैतिक दलों को होनी चाहिए, आम नागरिक को नहीं।
आरक्षण की पूर्ण समाप्ति लक्ष्य है, जो की संविधान का भी लक्ष्य है, तो हम तो वही कर रहे हैं जो संविधान निर्माताओं ने सोचा था। ठीक है, समय सीमा नहीं थी, पर OBC आरक्षण भी तो नहीं था? उस समय के वंचित-पीड़ित-शोषित यदि आज भी वंचित-पीड़ित-शोषित ही हैं, तो इस पर सर्वेक्षण होना चाहिए कि तथाकथित सामाजिक न्याय तक पहुँचने के लिए कोई और मार्ग है क्या?
मेरा उद्देश्य प्रथम चरण में चर्चा का है, सरकार से इस पर संसद में आँकड़े रखवाने का है कि किस जाति समूह कि किन जातियों में कितनों को आरक्षण मिला, उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति क्या है, उन्हीं जाति समूहों में कौन ऐसे लोग हैं जो अभी तक घिसट कर जीने को विवश हैं?
सामान्य वर्ग के लोगों में कितने लोग आर्थिक रूप से विपन्न हैं, उनके लिए सरकार की क्या नीतियाँ हैं, उन्हें फॉर्म भरने से ले कर हॉस्टल और कोर्स की फीस में छूट क्यों नहीं है? यदि आरक्षण EWS से दिया है तो यह इतना घटिया रूप में क्यों है कि निर्धन सामान्य वर्ग का विद्यार्थी लोन चुकाने में ही जवानी खपा देता है?
इसके बाद, हर राजनैतिक व्यक्ति को, दल को हम चुनावों के समय पूछेंगे कि उन्हें सामान्य वर्ग वोट क्यों दे? उनका मेरिट को ले कर क्या स्टैंड है, विकसित भारत में मेरिट की कितनी जगह है और शिक्षा व्यवस्था में आरक्षण के कारण राष्ट्र को कब तक नकारात्मक दिशा में ले जाया जाता रहेगा?
यही आरम्भ है, और यदि आवश्यकता पड़ी तो हम और भी विकल्प देखेंगे। हमें इस से अब मतलब नहीं है कि कौन आ जाएगा तो क्या हो जाएगा, उसका लोड वो लें जिनकी विधायकी और सांसदी जाएगी। हमें अपने बच्चों और इस समाज की चिंता हैं। हम बस अपने हिस्से की चिंता कर रहे हैं।