दर्दे जुदाई को क्या कहे कोई ये हर सितम पे भारी
उस रात का क्या सिला जो तेरे बिन गुजारी है
उसे लफ्जों में बयान कैसे करे ये कहो
उधर जश्न ही जश्न है और इधर बरसात जारी है
बेरहम शासन और उसके आकाओ ने
आज एक गरीब की झोपड़ी तोड़कर जिंदा इंसान को जिंदा जला दिया....... बाबा जी का शव शासन है क्या यही रामराज है ऐसी घटनाएं अंदर तक झकझोर कर दिये है