'PM को करेंगी रिपोर्ट' ऐसे लिखा जा रहा है जैसे @narendramodi को शिक्षा मंत्रालय से कोई अंतर पड़ता है! IIT प्रोफेसर से सर्वर ठीक करवाएँगे, एयर फोर्स से प्रश्नपत्र पहुँचाएँगे, पूर्व ISRO चीफ से मिलेंगे, CBSE चेयरमैन का ट्रांसफर हो गया आदि जब नहीं चला, तो अब नया चूरन है PM मोदी को करेंगी रिपोर्ट।
रहन दे भाई! देख लिए कितना रिपोर्ट तुमलोग मँगवा रहे हो। केवल छवि प्रबंधन चल रहा है। ऐसे कमिटी बनायी जा रही है, जैसे इन्हें साक्ष्य ही ना मिले हों कि 'ब्लैकलिस्टिंग' को नियम से हटाया गया; 6 लाख कर्मचारी वाले TCS की जगह 'स्कैन करने के पूर्व अनुभव' के कारण 200 कर्मचारी वाले Coempt को दिया गया; साईट तुम्हारी चल नहीं रही, हर दिन हैक कर लेता है 19 साल का बच्चा, लॉगिन फेल हो रहा है; कॉलेज की कंसलिंग आरम्भ है, बच्चों के मार्क्स नहीं फाइनल हुए...
और तुम्हें लगता है ये संसदीय कमिटी की बैठक में सार्थक को बुला कर, ये राधा चौहान को हेड बना कर, दो ट्रांसफर करवा कर तुम ये जनता को मूर्ख बना दोगे?
कंपनी को बचाने के लिए ‘ब्लैकलिस्ट’ क्लॉज हटाया गया?
आज @cbseindia29 की यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि इसने एक ऐसी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया जिसने इस स्केल पर न तो काम किया था, न कोई पायलट प्रोजेक्ट। कंपनी तेलंगाना में जिस नाम से थी, और जो डायरेक्टर थे, उन्हें ही आगे कर के ये कॉन्ट्रैक्ट लिया गया।
टेंडर के नियम बदले गए, ढील दी गई, शिक्षकों ने मना किया फिर भी पैन इंडिया परीक्षा कराई गई। आज पता चला है कि @dpradhanbjp की प्रिय कंपनी को CBSE ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकती।
अगस्त 2025 में जो नियम थे, उसमें यह संभावना थी कि कंपनी का पेमेंट रोक सकते हैं, पैनल्टी लगा सकते हैं, ब्लैकलिस्ट कर सकते हैं। परंतु, अगले महीने में नियमों से ‘ब्लैकलिस्ट’ शब्द हटा दिया गया।
प्रश्न यह है कि किसके कहने से ब्लैकलिस्ट शब्द हटाया गया? क्या CBSE या शिक्षा मंत्रालय/मंत्री को यह बात पता थी कि OSM हैंडल नहीं हो पाएगा? और अगर ऐसा हुआ भी तो कंपनी बची रहेगी?
और फाइन कितना है? यदि आपने बेसिक समस्याओं का निदान नहीं किया तो ₹5,000/घंटा; समस्या पता होने पर निदान न आने पर लाख रुपये प्रति पंद्रह मिनट; रूटकॉज एनालिसिस और उसे सही करने की योजना न जमा करने पर लाख रुपये/घंटा की पैनल्टी है।
अधिकांश समस्याएँ ₹5000/घंटा वाले में ही हैं: लॉगिन, हैंडहोल्डिंग डॉक्स, यूजर मैनुअल्स, ऑन साइट
सपोर्ट, ऑनबोर्डिंग असिस्टेंस या और कुछ जो CBSE के साइट को ठीक से चलाने के लिए आवश्यक है।
यह सड़ाँध अत्यंत गहरी है, इसकी जाँच होनी चाहिए कि जिस परीक्षा में पूरे देश के 18 लाख बच्चे बैठ रहे हों, उसे सुचारू रूप से न करा पाने की स्थिति में CBSE ने ‘ब्लैकलिस्ट’ का विकल्प क्यों नहीं हटाया?
PS: और हाँ मंत्री जी, ₹150/पोस्ट वाले ट्रोल को नियंत्रण में रखो, बेहतर रहेगा वरना डॉकूमेंट्स खोदना मुझे आता है। उसी AI से सब कुछ निकालने में बहुत कम समय लगेगा।
देखो भाई, तेल का दाम बढ़ना ही था। यदि तुम्हें लगता है कि चुनाव के बीच में चुनाव जीतने के लिए नहीं बढ़ाया, तो सही लगता है। कोई पार्टी नहीं बढ़ाती। तेल हमारे यहाँ है नहीं, और जहाँ है (बाड़मेर में), वहाँ पता करो केयर्न एनर्जी की क्या कुत्ते जैसी स्थिति बना रखी है राजस्थान सरकार ने।
दूसरी बात, रूस से सस्ता लिया तो कम क्यों नहीं किया? क्योंकि जनता को भिखारी बनाना अब स्टेट पॉलिसी है। अब बहन और भाई कमाने वाले नहीं, लाड़ली और लाड़ले हो गए हैं। मैया और बहिन अब घरेलू कार्य नहीं करेगी, काम पर नहीं जाएगी, उसका अब सम्मान किया जाएगा राज्य की ‘माई-बहिन योजना’ द्वारा।
इसके लिए पैसे लगते हैं ब्रो। और पैसे चाहे इलेक्टोरल बॉण्ड से आएँ या बिना रसीद वाले बीस हजार, जाते पार्टी फंड में हैं, देश का फंड टैक्सदाता देता है, जिसे मोदी जी ‘नमन है’ कह देते हैं।
तो ये जो लिस्ट दिखा रहे हो कि इतने देशों में कम हो गया, हमारा सबसे कम है, वो मत दिखाओ। हर लिस्ट के उत्तर में दूसरी लिस्ट होती है। विश्व में केवल बीस राष्ट्र नहीं हैं। AI में एक प्रश्न डालने पर हर उस राष्ट्र का नाम आ जाएगा जिन्होंने टैक्स कम किए या सब्सिडी दी।
मैं यह नहीं मानता कि यह सरकार ईरान युद्ध के समय कुछ अनुचित कर रही है, पर मुझे घुटन होती है नकली भगवानों की मूर्तियों से, उनके तीर्थों से, उनके नाम से चलने वाली रेवड़ी योजनाओं से और हर उस मूर्खतापूर्ण फ्रीबी से जो अब सामान्य बना दी गई है।
Yesterday was a long day.
I was called for questioning in connection with a case that I believed had no merit, and I attended the questioning to present my version. However, the police arrested me at 5.30 PM.
I was granted bail at 10 PM, and the Hon’ble Duty Judge clearly stated that he saw no offence in the case. He also said that he saw no mens rea and failed to understand why I had even been arrested.
Grateful to @RaviSharmaTalks and @sidcool2302, the wonderful lawyers who helped me through this.
Thankful to the many people, both online and offline, who supported me. I’m truly grateful. Of course, there are many who dislike you and use such opportunities to strike harder when you are down, but that’s fair game. It was your day, and you took it. I can take those blows and come back.
At times like these, one realises the importance of ideological support. The people who stood by me at the most crucial juncture were neither close friends nor relatives, but those with whom I am bound by ideology. And it delivered for me when it mattered most.
This incident has added many new layers of perspective, most importantly the ones we usually miss in the melee of day-to-day social media discourse.
I’ll write about the specifics of this case another day. For now, I just want to say thank you so much to everyone who has been a well-wisher. I’m grateful.
Thank you for monitoring the situation.
बंगाल में , पिछले चुनाव की तुलना में, इस दफा भाजपा को हिंदुओं का 8 प्रतिशत अधिक वोट मिला , हिंदू ध्रुवीकरण मज़बूत हुआ और राजनीति की समूची तस्वीर बदल गई ----बस सच यही है , शेष कहानियां हैं जो अपने -अपने स्वार्थों से उपजी हैं -----------
So, Mandal is not acting alone. It is whole party that is sending a signal to Savarnas that you don’t matter and @BJP4India will do anything to divide Hindus on caste lines as soon as elections get over.
Their push is to position the party as ‘dalit focussed party’, which is not wrong, but when you purposefully ignore upper caste groups, bracket them with jihadi Muslims, we know your intent.
Thank you for being quick with it this time. Your ‘ek hain to safe hain’ and ‘batenge to ketenge’ to divisive caste politics took some time after 5 elections last year.
नहीं मंडल, तू दीमक है भाजपा का। तुमने स्पष्ट लिखा कि बंगाल के सवर्ण और मुस्लिम साथ रहे हैं। तुमने स्पष्ट बताया है कि बंगाल और सवर्ण और OBC अवसरवादी हैं जिन्होंने समय देख कर पाला बदला है।
बंगाल के कुलीन ब्राह्मणों को संदेशखाली के बलात्कारी शाहजहाँ के समकक्ष कहना, सत्ता की गोदी में बैठ कर, उन ब्राह्मणों-कायस्थों-वणिकों-क्षत्रियों पर थूकने जैसा है।
वह भी तब जब बंगाल ने एकमुश्त वोट हिन्दुत्व के नाम पर दिया है। इस जातिवादी अजेंडा का परिणाम तुम शायद न भोगो, पार्टी को तुम भोगवाकर जाओगे।
अगर पश्चिम बंगाल में एससी-एसटी हिंदुओं ने हिंदुत्व के लिए भाजपा को वोट किया है तो इसमें गलत क्या है? बहुत अच्छी बात है। वे लोग स्वयं को हिंदू माने और हिंदुत्व के लिए काम करें यही तो हमारा लक्ष्य है। दिलीप मंडल जैसे लोगों का लेखन जातीय विभाजन पर आधारित रहा है। यह सीधी सी बात भी हिंदू जातियों को आपस में लड़ाए बिना नहीं लिख सकते। बंगाल में सब हिंदुओं ने साथ आकर हिंदुत्व के लिए वोट किया। पर मंडल जैसों ने सोशल मीडिया पर इसमें भी सवर्ण बनाम एससी-एसटी करना शुरू कर दिया। वो इंग्लिश में कहते हैं ना: Old bad habits die hard.
दिलीप मंडल, दो दिन भाई टट्टी रोक ले यार! हग लेना भाई, जो भी तेरा जातिवादी एजेंडा है। आँख खोल कर देख कि बंगाल में दलित सेलिब्रेट नहीं कर रहा, वहाँ हिंदू सेलिब्रेट कर रहा है। उसके गाने सुन, उसका क्रोध देख।
तेरा सवर्ण-मुसलमान गठबंधन, दलित-आदिवासी ने जिताया सब बेकार है। खोल से बाहर निकल, बंगाल की दुनिया देख। वहाँ कोई अंबेडकर-फुले नहीं है। केवल हिंदुत्व है। माँ काली की धरा पर यदि 'जय श्री राम' चल रहा है, तो सोच कि क्या बदलाव है।
अंबेडकर मत ठूस, लोग समझ जाएँगे कि तेरे जैसे सलाहकारों ने भाजपा को केवल चुनावी हिंदू पार्टी बना दिया है, जो बस रैली में हिंदुओं की एकता खोजती है। रुक जा दो-चार दिन। फिर अतिसार करते रहना, हम देंगे दवाई।
Look what they did to Khattar: Every vocal Sanatani has to go through this. The day Sanatanis lose their fear of going to jail, only then can Sanatan Dharma be revived in Bharat. If the government is arresting Hindus just for discussing atrocities committed by missionaries, then we Hindus should speak even more about those atrocities. The government is busy elevating figures like Ambedkar, Phule, and Periyar—who criticized Sanatana Dharma—to the status of deities. This is not acceptable at the cost of Sanatan Dharma.
भाजपा का PR कौन संभालता है??
मतलब इतने मुद्दे हैं विपक्षी राजनीतिक पार्टियों के:
-रोहित वेमुला बिल
-गाज़ीपुर केस का राजनैतिकरण
-झारखंड के मंत्री द्वारा पत्रकार को पीटना
लेकिन इन सारे मुद्दों पर विपक्ष को घेरने की बजाय, हिन्दू कार्यकर्ताओं और GC अधिकारों की बात करने वालों के पुराने tweets निकालने में लगे हैं! उनको गलत साबित करने में लगे हैं!
और फिर कमाल ये कि इनका सवाल भी उन्हीं लोगों से है, कि इन मुद्दों पर वो कितना बोल रहे हैं??😂😂
मतलब आपलोग किस बात के विपक्ष हो?
अपना सारा काम दूसरों पर ही थोपना है तो तुम पैसे काहे के लेते हो??
मोदी जी डमरू-त्रिशूल ले कर फोटो खिंचा रहे हैं। साल भर पहले हम नाचने लगते, अब वो दिन गए। अभी टाइमलाइन पर इसे ‘एक त्रिशूल वाली फोटो फेंक कर मारेंगे, सब हिन्दू हृदय सम्राट लिखने लगेंगे’ की याद दोहराएँगे।
अभी होली में भभूत लगा कर नाच भी लेंगे काशी में, तो भी लोग विश्वास नहीं करेंगे। वो दिन बीत चुके हैं। जलवा दिखाने के लिए दस-गुणा प्रयास होगा। नाकाम रहेगा।
Well, AFAIK, Gautam Khattar talks facts. Francis Xavier was instrumental in persecution of Hindus in Goa. I don't and won't respect such a person.
If he has stated such facts, it comes under Right to Free Speech, not bigotry.
I STAND WITH GAUTAM KHATTAR.
आदरणीय @DrPramodPSawant जी
कांग्रेस नेता की शिकायत पर गोवा पुलिस @GautamKhattar को गिरफ्तार करने हरिद्वार आई है।
प्रश्न यह है कि गौतम खट्टर ने जो कुछ कहा है वह सत्य या झूठ? यदि सत्य है तो FIR क्यों?
गौतम खट्टर नहीं मिले तो भाई को पकड़ लिया
@pushkardhami जी,
कृपया संज्ञान लें।
गिरिराज सिंह के हनुमान हैं चंद्रशेखर रावण!
ऐसा हम नहीं, वो खुद कह रहे हैं!
अब "Guilty by association" का 4 दिन से ड्रामा करने वाले बताएं-
इनको भी separate electorate डिमांड का सहभागी माना जाए?
फिर इनकी पार्टी को भी?
बोलो, बोलो??
तो किसी तथाकथित GC व्हाट्सएप्प ग्रुप में एक रैंडम व्यक्ति ने रैंडम अवसर पर यह बोल दिया कि ‘हमें पाकिस्तान से मदद लेनी चाहिए खालिस्तान की तरह’। फिर उसके स्क्रीनशॉट लिए गए और इधर का रिप्लाय उधर फोटोशॉप कर के ट्विटर पर घूम रहा है।
कितनी क्यूट बात है कि सामान्य वर्ग के लोग इतने डेस्पेरेट हो गए हैं कि वो पाकिस्तान की सहायता लेने की बातें लिख रहे हैं! ये बेचारे आइटीसेलियों और मोदी जी के चाटुकारों की डेस्पेरेशन है जहाँ हर वह व्यक्ति जो मोदी जी से अम्बेडकर प्रेम पर कुछ पूछता है, वह अंततः देशद्रोही हो जाता है।
वैसे, मैं किसी भी ग्रुप में नहीं हूँ, पर सामान्य वर्ग की लड़ाई लड़ने वालों को मेरा समर्थन है। इन्होंने पिछले तीन महीने में काम से कम चार बार, पैसे खर्च कर के, मेरे खिलाफ माहौल बनाने का पूरा प्रयास किया।
परिणाम यह है कि ये लोग अब अपने ही ऊपर होने वाले कमेंटों से कारण लिखना-बोलना कम कर चुके हैं। ये उठल्लू आइटीसेलिए अब अपने अंतिम तीर पर गए हैं: पाकिस्तान से समर्थन माँग रहा है। मतलब, जो लोग तुम्हारे नैरेटिव मेकिंग के सूत्रधार थे, वही इतने मूर्ख हैं कि ग्रुप में पाकिस्तान लिख रहे हैं?
इससे पहले सोरोस एजेंट, कॉन्ग्रेस से फंडेड आदि बोल कर देख लिए कुछ नहीं हुआ। दो-तीन बेचारे हीरो बन रहे थे, तीनों पर केस किया, माफी माँग कर शांत हो गए। दूसरी बात यह भी है कि लोगों को इनकी हताशा दिखती है।
मोदी जी बेचारे नब्बे दिनों से न तो वायरल हो पा रहे हैं, न ही कम्यूनिटी नोट उनका पीछा छोड़ रहा। पूरी भाजपा परेशान ही है। किसी नेता को छोड़ा नहीं जा रहा है। इनकी कंपनियाँ डैमेज कंट्रोल करने में अत्यधिक परिश्रम कर रही हैं।
एक ग्रुप है जो नए अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ चिपकना चाह रहा है कि कुछ काम मिले। उस चक्कर में बेचारे को अपनी यूटिलिटी दिखाने के लिए अजीत भारती को ‘यहाँ से फंडिंग है’ फैलाना पड़ा। दो लोगों पर केस हुए, शांत हो गए। ये समूह हर जगह स्वयं को मेरा हितैषी कहता है, सिवाय एक व्हाट्सएप ग्रुप के।
तो, कुल मिला कर कहना यह है कि जिस ऑल्टन्यूज का मुख्यालय अहमदाबाद में है, आज तक उसका भाजपा कानूनी रूप से बाल भी बाँका न कर पाई। जो कर पाए, हमारे जैसे लोगों ने ही किया है। तो ये तो खेलना बंद करो कि ये पाकिस्तान से मिले हैं, जुबैर से मिले हैं। हमें पता है कौन किसको खेलने दे रहा है।
और हाँ, इसको ‘ग्रुप में इन्फिल्ट्रेट’ करना नहीं कहते कि वहाँ जा कर कुछ लिख दिया। वहाँ से सूचनाएँ निकालो, कि क्या योजना बनी, किस पाकिस्तानी से मदद ली गई। ये क्या चिरकुट की तरह लड़की की कॉपी पर अपने दुश्मन का नाम लिख आए कि बदनाम कर देंगे। हैंडरायटिंग तो तुम्हारी है।
अभी लौंडे हो, लिखना-बोलना आता नहीं, खुद को जेम्स बॉण्ड मत समझो। याद रखना, इतने सोरोस-सपा-कॉन्ग्रेस-पाकिस्तान करके भी, सामान्य वर्ग की लड़ाई लड़ने वालों का %# नहीं हिला पाओगे।
युद्ध जारी रहेगा।
भाजपा आईटी सेल का कहना है कि फूले को लेकर राहुल गांधी की पोस्ट पर कम्युनिटी नोट नहीं लगा, मोदी जी की पर लग गया। अरे भाई! राहुल गांधी की पोस्ट पर कम्युनिटी नोट लगवाना क्या भाजपा आईटी सेल के तनख्वाह प्राप्त लोगों की जिम्मेदारी नहीं है? दूसरी बात राहुल गांधी तो जाना-माना हिंदू विरोधी व्यक्ति है। एक विदेशी और विधर्मी माता का पुत्र है। तो वो तो फूले जैसे हिंदू विरोधी आइकन को प्रोमोट करेगा ही। वो स्वाभाविक है। उसका काम ही divide and rule है। इसलिए लोगों को उतना गुस्सा नहीं आता। पर जब हिंदुत्व का नाम लेकर सत्ता में आए मोदी वही काम करते हैं तो लोगों को झटका लगता है। आउटरेज होती है। और आप भी फूले की सच्चाई बताकर राहुल गांधी की पोस्ट पर कम्युनिटी नोट लगवा सकते थे। पर आपको तो फूले का सच बताने से मना किया गया है तो इसमें क्या किया जा सकता है?
राजस्थान में चुनाव होते तो आज मोदी जी का ट्वीट आता कि राणा सांगा ने किस वीरता का परिचय दिया था। वो उनके भाले, घोड़े, कवच में हुए छेदों की संख्या गिनाते और मूर्ति पर माल्यार्पण करते।
राणा सांगा के साथ समस्या यह हो गई कि वो दलीत-पीड़ीत-शोषीत-वंचीत समाज से भी नहीं आते कि हों महाराष्ट्र के, और थोप दिए जाएँ पूरे देश पर!
ऐसे राजा होने का क्या लाभ जब ब्रह्मा जी को ‘रंडीबाज’ और ‘बेटीचो*’ भी न कह पाएँ, न ही बाईस प्रतिज्ञा ले पाएँ! फुले जी ने पुस्तक लिखी और आज देखिए कि महाराष्ट्र में चुनाव नहीं है पर पीएम सात ट्वीट धकापेल लिख दिए।
मोदी से समस्या उनके द्वारा किए जा रहे तुष्टिकरण से नहीं है। वो तो हम बारह वर्षों से झेल रहे हैं। मोदी से जो समस्या है, वह आज और कल में @narendramodi हैंडल से किए गए पोस्ट में दिखता है।
ज्योतिबा फूले पर सात पोस्ट हुए हैं आज, पर मंगल पांडे के बलिदान दिवस को बिलकुल नकार दिया गया।
फुले स्वघोषित रूप से हिन्दू-घृणा करने वाला व्यक्ति था जो उसकी पुस्तक गुलामगीरी के पन्नों पर दिखती है। 1857 की क्रांति को ले कर उसके विचार क्या हैं, वह क्या PM को नहीं पता?
और मंगल पांडे का 1857 में योगदान, क्या नरेन्द्र मोदी केवल इस कारण से नकार गए क्योंकि उनके हिन्दू-विरोधी दलित नायकों की शृंखला में एक ब्राह्मण फिट नहीं होता?
हमारी समस्या यही है कि सवर्णों का योगदान मिटाया जा रहा है, ब्राह्मण विरोधियों को सरकारी प्लेटफॉर्म से वह सब बनाया जा रहा था जो वो कभी थे ही नहीं। ब्राह्मण यूनिवर्सिटी की दीवारों पर गाली सुनता है, नारों में लिंच होता है और सरकारी योजनाओं को फायनेंस करने में पिसता रहता है।
@PMOIndia@BJP4India और @RSSorg स्पष्ट तौर पर राष्ट्र में विभाजनकारी नीतियों को बढ़ा रहे हैं। आलोचना की डींगे मारने वाले नरेन्द्र का सत्य यह है कि वो पत्रकारों को हाउस अरेस्ट करवाते हैं। उनके निर्देश पर उन्मुक्त सोशल मीडिया को बाँधने के लिए मूर्खों से भरी संसदीय समिति अपनी अनभिज्ञता की विष्ठा सार्वजनिक करती है।
नरेन्द्र मोदी को निशिकांत दूबे जैसे चाटुकार ही चाहिए। वही उनको उचित उन्माद देते हैं। बाकी, साक्षात्कारों में ‘आलोचना होती रहनी चाहिए’ का धनिया छिड़कते रहिए।