आज इस आवाज में दर्द है...
राजवीर सिंह चलकोई को हम सुनते रहे हैं। उनकी बोली में हमेशा एक खनक रहती है अल्हड़पन झलकता है। मैंने इस पूरे वीडियो में देखा कि वो बात कहीं भी नहीं है। क्यों?
क्योंकि हमारे आत्मसम्मान पर चोट ही हुई है
राज्यपाल महोदय ने एक आदेश जारी कर राजस्थान के सभी विश्वविद्यालयों में मराठी के केंद्र खोलने के लिए कह दिया है। दूसरी तरफ वर्षों से राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए संघर्ष कर रहे लोग अभी तक राजस्थान के विश्वविद्यालयों में राजस्थानी के केंद्र नहीं खुलवा पाए हैं। स्कूलों में राजस्थानी की पढ़ाई शुरू नहीं करवा पाए हैं। राजस्थान की राजभाषा नहीं बनवा पाए हैं। पीड़ा तो है। सच्ची है। झलकेगी ही। छलकेगी ही।
राजस्थान वालों के चेहरे पर ऐसा जोरदार झापड़ मारा गया है, जिसका अहसास तो हुआ है लेकिन आत्म गौरव खो चुके लोग यह तय नहीं कर पा रहे कि रिएक्ट क्या करना है और कैसे करना है। इस पीड़ा को सभी सुनें और और सोचें कि हम अभागे लोग कहां खड़े हैं?
वीडियो साभार @republic
Social Infact: समानता का अधिकार सबका है, ज़रूरतमंद को ज़रूर जगह दे। ट्रेन में और अन्य सभी विभागों में भी ऐसे ही मानसिकता वाले अधिकारियों की ज़रूरत है जो समाज में समानता पर ध्यान दें और ज़रूरतमंदों की निःस्वार्थ मदद करें।
सेना का तमाशा बनाया जाना, इस तरह हीरो-हीरोइन आदि लोगों के लिये परेड और ये वाला ट्रीटमेंट देना बहुत ग़लत है...
ये राष्ट्रपति, रक्षामंत्री, प्रधानमंत्री या सेना के जनरल तो हैं नहीं फिर क्यों ये सब...??
मेरे हिसाब से बहुत ग़लत है। https://t.co/vsb8MRUzQb
प्रस्तुत वीडियो ASI राजेश मीणा
पुलिस थाना केकड़ी सदर।
जिला, अजमेर का बताया जा रहा है। अगर यह सही है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सुनिए
@PoliceRajasthan जांच कर संज्ञान लें
पूजनीय पिताश्री,मेरे प्रेरणास्रोत,स्वर्गीय दाता श्री जसवंत सिंह जी जसोल की जयंती पर सादर नमन।
भारतीय सेना में राष्ट्रसेवा से लेकर केंद्रीय मंत्री के रूप में दूरदर्शी नेतृत्व तक,आपका संपूर्ण जीवन देश के प्रति समर्पण,अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण रहा।
आपके आदर्श जीवन के सिद्धांतों को आत्मसात कर सदैव जनसेवा एवं सामाजिक सरोकार के कार्यों के लिए प्रयासरत हूँ।
#JaswantSinghJasol
बाड़मेर जिले के गोरड़िया–बालेवा क्षेत्र में 4000 बीघा कृषि भूमि पर ACME Solar द्वारा सोलर प्लांट लगाया जा रहा है।
इस परियोजना की आड़ में 7000 से अधिक वर्षों पुराने खेजड़ी और जाळ के पेड़ों को काटने की तैयारी है, हर खेजड़ी के बदले ₹15,000 का ठेका दिया गया है।
एक तरफ देशभर में अरावली बचाने की यात्राएं, भाषण और अभियान चल रहे हैं, दूसरी तरफ राजस्थान के रेगिस्तान में जीवनदायी खेजड़ी को बेरहमी से काटा जा रहा है।
क्या विकास का मतलब प्रकृति का विनाश है?
मारवाड़ के नेता इस पर चुप क्यों हैं?
क्या खेजड़ी का संरक्षण सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है?
@BhajanlalBjp@narendramodi
बरेली में एक मुस्लिम महिला भारत के राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगे के ऊपर अपने जूते चप्पल तमाम रखी है
कुछ लोगों ने जब उसको टोका तब वह महिला बेशर्मी से कहती है क्या हुआ
सर @bareillypolice@Uppolice
इस महिला पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई किया जाए