कल्पना कीजिए कि आपने एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म बनाया है जो चोरों को पुलिस से बचाने के लिए कानूनी प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचता है, ताकि वे बिना किसी डर के चोरी करते रहें। हर चोरी पर आप अपना कमीशन कमाते हैं और फिर उसी कंपनी को दुनिया के सबसे innovative स्टार्टअप्स में से एक बताकर प्रचारित करते हैं।
ठीक यही काम @Meesho_Official के फाउंडर @viditaatrey कर रहे हैं।
Meesho हमारे द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की पायरेटेड प्रतियाँ बेचने वाले विक्रेताओं को अपने प्लेटफ़ॉर्म पर जगह दे रहा है। जब भी हम इन लिस्टिंग्स की शिकायत करते हैं, हर बार हमसे नए-नए दस्तावेज़ माँगे जाते हैं। अब तो हमसे यह साबित करने के लिए वीडियो प्रमाण भी माँगा जा रहा है कि वे पुस्तकें पायरेटेड हैं, जबकि उन्हें बाज़ार मूल्य से बहुत कम कीमत पर बेचा जा रहा है।
मैं @PiyushGoyal और @jitanrmanjhi से निवेदन करता हूँ कि Meesho जैसे प्लेटफॉर्म को बंद किया जाए। इसे पहले भी कई बार कोर्ट में अलग अलग पार्टियों द्वारा लताड़ा गया है लेकिन लीगल कॉस्ट ज्यादा होने की वजह से यह काम सिर्फ बड़ी कंपनियां ही कर पाई हैं। मैं 500 से भी ज्यादा ऐसे छोटे बिजनेस को जानता हूं जो Meesho की चोरी और सीनाजोरी की वजह से परेशान हैं। ऐसे प्लेटफ़ॉर्म भारत के वास्तविक छोटे व्यवसायों को बर्बाद कर रहे हैं।
@Hindi_panktiyan आदरणीय @PiyushGoyal और @jitanrmanjhi कोई भी किताब किसी लेखक का सपना होता है उसे एक किताब से उतनी बचत नहीं होती है ऐसे में किताबों की पायरेटेड प्रतियाँ बिकना लेखक और प्रकाशक के लिए चिंता का विषय है। कृपया उचित एक्शन लें।
मुझे अब लौटना है
उस जगह से, उस वक़्त से, उस याद से
जहाँ तुमने मुझे छोड़ा था
मुझे अब लौटना है
बहुत आसान था
तुम्हारे साथ दूर तक जाना
पर वापस लौटना
उतना ही कठिन लगा
आखिर कठिन क्यूँ ?
दरअसल मैंने जब
तुम्हारे साथ ये रास्ता तय किया
तो मेरे ऊपर जो सपनों के
अपनों के और सबके बोझ थे
सारे बोझ हल्के लगने लगे
और जब तुमने छोड़ा मुझे अकेला
मैं बोझ तले दब गया
लौटना मुझे वाक़ई मुश्किल लगा
पर मुझे अब लौटना है
वापस उन्हीं यादों के सहारे
अकेले ही सही पर इस किनारे
मुझे अब लौटना है
इसलिए नहीं कि तुम्हें भूल पाऊँ
इसलिए कि मैं खुद को थोड़ा बचा पाऊँ
उन गलियों से जहाँ से गुज़रे थे हम
उन किनारों से जहाँ पर बैठे थे हम
उन यादों से जो दिल में घर कर गईं
उन बातों से जो हरपल मुझे सताती हैं
उन वादों से जो बीच में टूट गए
और उन रिश्तों से जो बेवजह छूट गए
मुझे लौटना पड़ा
पर लौटने का मेरा मन नहीं था।
प्रियेष मालवीय
एकांत में रोता पुरुष - कविता संग्रह
हरसिंगार प्रकाशन
आज की कविता में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक @sanjeevpaliwal से सुनिए @author_priyesh की बेहतरीन कविता.
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