इस हालत का मुख्य जिम्मेदार @IndiGo6E के उच्च अधिकारी एवं @DGCAIndia है।
लेकिन यात्रियों के –
गुस्सा, आक्रोश, गाली, और दुर्व्यवहार झेल रहे बेचारे @CISFHQrs के सुरक्षाकर्मी, एयरलाइंस के आम कर्मचारी।
एक प्राइवेट कंपनी के कारण –
सारा सिस्टम ठप्प हो गया, लाखों लोग एयरपोर्ट पर बंधक बन गए, कोई इलाज के लिए तड़पता रहा तो कोई बाप बेटी के पीरियड्स के कारण जांघों से टपकता खून के लिए सैनेट्री पैड के लिए गुहार लगाता रहा, कोई ऑनलाइन अपने शादी का रिसेप्शन कर रहा। सिस्टम की ये बहुत बड़ी नाकामी है।
बिहार में AEDO की 935 सीटों पर बहाली आती है.
रिकॉर्ड 9.7 लाख आवेदन प्राप्त हुए. अब अगले माह जनवरी में उसकी परीक्षा होनी है लेकिन फिर से फॉर्म भरने का पोर्टल खोला गाया है. जबकि किसी भी छात्र की ऐसी कोई मांग नहीं थी.
आख़िर किसके लिए ये पोर्टल को खोला जा रहा है.? धांधली करने के लिए!
@umda_panktiyaan कौन कितना मशहूर है मेरे पास में,
मैं तो जिंदा हूँ महज़ जीवन की आस में।
ख्वाहिशें भी कई बार सवाल बन जाती हैं ,
आदमी अंत में रह जाता है अपनी तलाश में।
@ABPNews If the rupee is expected to find its own level, it would be helpful to know what policy measures are being planned by the government to support its stability??
महत्वपूर्ण जानकारी
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भारत सरकार द्वारा हाल ही में 181 की एक टोल-फ्री हेल्पलाइन शुरू किया गया है, जिसे खास तौर पर महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा, सहायता और आपातकालीन मदद के लिए शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य किसी भी संकट की स्थिति में तुरंत सहायता देना है।
181 में मिलने वाली सुविधाएँ
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• घरेलू हिंसा
• दहेज उत्पीड़न
• यौन उत्पीड़न / छेड़छाड़
• स्टॉकिंग / पीछा करना
• मानव तस्करी से जुड़ी शिकायतें
• संकट की स्थिति में ��ेडिकल सहायता
• पुलिस सहायता
• काउंसलिंग सपोर्ट (परामर्श)
• कानूनी सहायता से जुड़ी मार्गदर्शन
181 की खास बातें
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• यह नंबर पूरे भारत के लिए मान्य है
• इसकी सेवाएं 24×7 उपलब्ध रहती है।
• कॉल पूरी तरह मुफ्त है।
• महिला पुलिस और काउंसलर तुरंत मदद प्रदान करते हैं।
• आपकी पहचान गोपनीय रखी जाती है।
किसे कॉल करना चाहिए?
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कोई भी महिला या लड़की जिसे खतरा, हिंसा, उत्पीड़न या आपात सहायता की आवश्यकता हो।
~ साभार: @NCIBHQ
��मारे देश में ठेकेदारी की सच्चाई –
पहले सड़क बनाओ, ताकि लगे विकास दौड़ रहा है। फिर नाला डालने के नाम पर उसी सड़क को शान से तोड़ो।
फिर उसे बनाओ –
जैसे कोई बहुत बड़ा एहसान कर रहे हो। फिर बिजली के तार-खंभे डालने हों तो फिर से तोड़ो... आखिर सड़क ठेकेदारी की प्रयोगशाला ही तो है।
फिर उसे बनाओ –
दो महीने चमकेगी, तीसरे महीने फिर फ़ाइल तैयार। और जब नया प्रोजेक्ट आए तो उसे दोबारा तोड़ो....
क्योंकि हमारे द��श में –
सड़क कम, बजट ज़्यादा बनता है।
~ साभार: @NCIBHQ
दुखद खबर🥲
यूपी की शिवानी वर्मा बिहार के अररिया जिले में अध्यापिका थी
उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई है
एक तो यूपी में शिक्षक भर्ती नहीं दे रहे बाबा
और यूपी वाले अन्य राज्य में नौकरी कर भी रहे तो Safe नहीं हैं।
ईश्वर आत्मा को शांति प्रदा�� करें, एवं परिवार को सहनशक्ति🙏
🚨 भारत के शिक्षा मंत्री से सीधा सवाल >>
देश हर साल मिड-डे मील पर ₹20,000 करोड़ उड़ेल देता है ,
पर बच्चों की प्लेट में क्या मिलता है?
• दाल में सड़ी हुई मेंढक
• खाने में मरे हुए सांप
• बच्चे कबाड़ के कागज़ पर खाना खाते हुए
• करोड़ों के घोटाले, सालों से बिना रोक-टोक
• फूड पॉइज़निंग से बार-बार गिरते बच्चे
अगर इसे “राष्ट्रीय पोषण योजना” कहा जाता है , तो फिर पैसा किसकी जेब में जा रहा है?
दुनिया के विकसित देशों में बच्चे
ताज़े फल, सब्जियाँ, दूध, अंडे, सलाद, संतुलित भोजन खाते हैं।
और भारत में?
सबसे गरीब बच्चे—जो पोषण के सबसे ज़्यादा हक़दार हैं —>>
उन्हें परोसा जाता है कूड़ा, सड़ा हुआ खाना, और जानलेवा लापरवाही।
यह सिस्टम आखिर कब सुधरेगा?
गुणवत्ता, स्वच्छता और जवाबदेही कब विकल्प नहीं, अनिवार्य बनेगी?
कितने और मासूम बीमार होंगे,
कितने और पेट में जहर जाएगा,
तब जाकर इस मंत्रालय की नींद खुलेगी?