Reporter: You are on the cusp of making history.
Trump: I like this guy. Your reporters are much nicer than mine.
Trump casually exposed Godi Media of India 😭😭
India’s IT ministry banned Telegram for one week because some users shared leaked exam questions.
This punishes 150M+ ordinary Telegram users in India — not the insiders who leaked the exam materials.
And the ban hasn't stopped anything. The leaks just moved to other apps.
The engineer who built Claude Code just dropped a 28-minute video on how to write prompts that actually work
I've seen $300 courses that don't cover what he shows in the first 10 minutes
CLAUDE.md files, memory shortcuts, parallel sessions, prompting patterns
all in one video and completely free works whether you're a developer, a beginner, or someone who's been using Claude for months.
Big news for Indian traders! 🇮🇳
Zerodha, Groww, Angel One & others got approval to offer US Stocks directly.
Now easier to trade US markets!
Perfect time to explore global opportunities!
https://t.co/Zjy4My5RdO
₹15.15 लाख करोड़ का महाघोटाला? राजेश एक्सपोर्ट्स की बैलेंसशीट में ऐसा क्या खेल हुआ कि पूरी मार्केट हिल गई।
राजेश एक्सपोर्ट्स का मामला अब सिर्फ एक कंपनी की गड़बड़ी नहीं रह गया है। यह भारतीय शेयर बाजार, ऑडिट सिस्टम, बैंकिंग निगरानी और कॉर्पोरेट गवर्नेंस की पूरी व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन गया है।
SEBI ने ज्वेलरी और गोल्ड कारोबार से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स पर आरोप लगाया है कि कंपनी ने कई साल तक अपनी कमाई के आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए। यह आरोप कोई छोटा-मोटा नहीं है। रकम है करीब ₹15.15 लाख करोड़।
यानी इतना बड़ा आंकड़ा कि कई राज्यों के सालाना बजट भी इसके सामने छोटे लगें।
सवाल सीधा है अगर कंपनी की बैलेंसशीट में इतना बड़ा खेल चल रहा था, तो ऑडिटर क्या कर रहे थे? बैंक क्या देख रहे थे? बोर्ड ने क्यों नहीं रोका? और बाजार नियामक को भनक इतनी देर से क्यों लगी?
विदेशी कंपनियों के नाम पर कारोबार का पहाड़
SEBI के मुताबिक राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी कुल कमाई का 97 से 99 प्रतिशत हिस्सा विदेशी सहायक कंपनियों से दिखाया। इनमें सबसे अहम नाम स्विट्जरलैंड की कंपनी Valcambi SA का है।
कहानी यहीं से संदिग्ध हो जाती है।
राजेश एक्सपोर्ट्स के कागजों में Valcambi SA को ऐसा दिखाया गया जैसे कंपनी का असली कारोबार वहीं से चल रहा हो। लेकिन जब उसके अपने ऑडिटेड खातों को देखा गया तो तस्वीर मेल नहीं खाती दिखी।
सरल भाषा में समझिए भारत में बैठी कंपनी कह रही थी कि हमारी विदेशी कंपनी से बहुत बड़ी कमाई हो रही है, लेकिन विदेशी कंपनी के अपने दस्तावेज उस दावे को मजबूत नहीं कर रहे थे।
यही वह दरार थी जहां से पूरा मामला खुलना शुरू हुआ।
कागजों पर बिक्री, कागजों पर खरीद?
SEBI के आदेश में एक और चौंकाने वाला आरोप सामने आया है। कंपनी ने एक संस्था के साथ हजारों करोड़ रुपये की बिक्री और खरीद दिखाई। लेकिन उस संस्था ने ऐसे लेन-देन से ही इनकार कर दिया।
अगर यह आरोप जांच में सही साबित होता है, तो इसका सीधा मतलब होगा कि कारोबार असल में नहीं हुआ, सिर्फ कागजों पर दिखाया गया।
यानी बिक्री भी कागजों पर, खरीद भी कागजों पर, और कंपनी की कमाई भी कागजों पर।
लेकिन शेयर बाजार में निवेशक इन्हीं कागजों पर भरोसा करते हैं। बैंक भी इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कंपनी की ताकत आंकते हैं। और यही वजह है कि यह मामला बेहद गंभीर हो जाता है।
कंपनी का पैसा निजी खातों तक कैसे पहुंचा?
SEBI ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी के पैसे मालिक राजेश मेहता के निजी खातों तक पहुंचे। कुछ रकम का इस्तेमाल व्यक्तिगत डेरिवेटिव ट्रेडिंग में होने की बात भी कही गई है।
किसी भी कंपनी में मालिक और कंपनी के पैसे के बीच साफ दीवार होनी चाहिए। कंपनी का पैसा शेयरधारकों का पैसा होता है। उसे निजी ट्रेडिंग या निजी खातों में इस्तेमाल करना गंभीर कॉर्पोरेट गवर्नेंस उल्लंघन माना जा सकता है।
अगर यह साबित हुआ, तो सवाल सिर्फ अकाउंटिंग का नहीं रहेगा। मामला फंड डायवर्जन, निवेशकों से विश्वासघात और संभावित टैक्स जांच तक जा सकता है।
ऑडिटर ने मुहर कैसे लगा दी?
यह इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।
कंपनी की बैलेंसशीट कोई WhatsApp मैसेज नहीं होती कि किसी ने लिख दिया और सबने मान लिया। उसे तैयार करने के बाद कई स्तरों पर जांच होती है। मैनेजमेंट, बोर्ड, ऑडिट कमेटी, स्वतंत्र निदेशक और अंत में ऑडिटर।
ऑडिटर का काम सिर्फ दस्तखत करना नहीं होता। उसका काम यह देखना होता है कि कंपनी जो आंकड़े दिखा रही है, वे सच हैं या नहीं।
अब सवाल उठता है
विदेशी सब्सिडियरी से इतनी बड़ी कमाई दिखाई गई तो उसके दस्तावेज क्यों नहीं परखे गए?
कथित बिक्री और खरीद के लिए सामने वाली पार्टी से पुष्टि क्यों नहीं ली गई?
अगर कंपनी का पैसा निजी खातों में जा रहा था तो उसे पकड़ा क्यों नहीं गया?
क्या ऑडिट सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया था?
बैंक और रेटिंग एजेंसियों की भूमिका भी सवालों में
इतना बड़ा कारोबार दिखाने वाली कंपनी को बैंकिंग सिस्टम भी गंभीरता से देखता है। कारोबार जितना बड़ा, बैंकिंग सुविधाएं उतनी बड़ी। क्रेडिट लिमिट, लोन, गारंटी, लेटर ऑफ क्रेडिट, एक्सपोर्ट फाइनेंस सब कंपनी के वित्तीय आंकड़ों पर निर्भर करते हैं।
अब सवाल यह है कि क्या बैंकों ने कंपनी के आंकड़ों को स्वतंत्र रूप से जांचा?
क्या निर्यात, बिक्री, भुगतान और विदेशी लेन-देन का मिलान किया गया?
क्या किसी ने यह देखा कि जिस कारोबार का दावा किया जा रहा है, उसका वास्तविक पैसा कहां है?
अगर बैंक भी सिर्फ ऑडिटेड बैलेंसशीट पर भरोसा करते रहे, तो यह बैंकिंग निगरानी की भी बड़ी विफलता है।
क्या यह टैक्स चोरी का मामला भी बन सकता है?
फिलहाल SEBI ने मुख्य रूप से गलत खुलासे, गलत आंकड़े और फंड डायवर्जन की बात कही है। लेकिन मामला यहीं रुकता नहीं दिखता।
अगर जांच में यह साबित होता है कि फर्जी बिक्री, फर्जी खरीद, गलत इनवॉइस या पैसा घुमाकर विदेश भेजने का खेल हुआ है, तो आयकर विभाग, GST विभाग, ED और FEMA से जुड़ी एजेंसियां भी सक्रिय हो सकती हैं।
क्योंकि जहां फर्जी कारोबार दिखता है, वहां टैक्स का सवाल अपने आप उठता है।
क्या गलत खर्च दिखाकर टैक्स बचाया गया?
क्या पैसा विदेश भेजा गया?
क्या विदेशी कंपनियों का इस्तेमाल केवल आंकड़े सजाने के लिए हुआ?
क्या शेयर बाजार में भरोसा पैदा करके निवेशकों को भ्रमित किया गया?
इन सभी सवालों की जांच जरूरी है।
SEBI को इतनी देर से गंध क्यों नहीं आई?
यह सवाल सिर्फ राजेश एक्सपोर्ट्स से नहीं, पूरे बाजार सिस्टम से है।
कंपनी सालों तक शेयर बाजार में सूचीबद्ध रही। हर साल रिपोर्ट आई। ऑडिटेड बैलेंसशीट आई। निवेशक पैसा लगाते रहे। शेयर बाजार में कंपनी की वैल्यू बनती-बिगड़ती रही।
फिर इतने बड़े आरोप तक पहुंचने में इतने साल क्यों लगे?
क्या सिस्टम शिकायत आने का इंतजार करता रहा?
क्या शेयर बाजार की निगरानी सिर्फ कागजी नियमों तक सीमित है?
क्या बड़े नाम और बड़े आंकड़े अपने आप भरोसेमंद मान लिए जाते हैं?
सबसे ज्यादा नुकसान छोटे निवेशकों का
ऐसे मामलों में सबसे बड़ा नुकसान आम निवेशक का होता है। वह कंपनी के मालिक को नहीं जानता। वह बैलेंसशीट खुद जांच नहीं सकता। वह ऑडिटर की मुहर, SEBI के सिस्टम और स्टॉक एक्सचेंज के खुलासों पर भरोसा करता है।
जब यही भरोसा टूटता है, तो छोटे निवेशक की पूंजी डूबती है।
SEBI के मुताबिक इस कथित गड़बड़ी और फंड डायवर्जन से शेयरधारकों की संपत्ति को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ। इसका सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ता है जिन्होंने कंपनी के प्रकाशित आंकड़ों पर भरोसा करके शेयर खरीदे।
यह सिर्फ कंपनी का मामला नहीं, सिस्टम की परीक्षा है
राजेश एक्सपोर्ट्स केस भारत के कॉर्पोरेट सिस्टम की बड़ी परीक्षा है।
अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पूछा जाएगा कि ₹15.15 लाख करोड़ जैसे आंकड़े सालों तक बैलेंसशीट में कैसे चलते रहे?
ऑडिटर सो रहे थे या सिस्टम अंधा था?
बोर्ड ने सवाल क्यों नहीं पूछे?
बैंक कैसे भरोसा करते रहे?
और SEBI को इतनी देर से क्यों पता चला?
अब यह देखना होगा कि जांच सिर्फ कंपनी और उसके मालिक तक सीमित रहती है या उन सभी लोगों तक पहुंचती है जिनकी मुहर, मंजूरी और चुप्पी से यह कथित खेल इतना बड़ा हुआ।
क्योंकि अगर लाखों करोड़ के आंकड़े भी बिना असली कारोबार के बैलेंसशीट में घूम सकते हैं, तो यह सिर्फ निवेशकों के लिए खतरा नहीं, बल्कि पूरे वित्तीय सिस्टम के लिए खतरे की घंटी है।
#RajeshExports @SEBI_India@FinMinIndia@dir_ed@CBIHeadquarters
आज मसूरी जाते हुए आगे वाली टैक्सी से जब पर्यटकों ने कचरे को खिड़की से बाहर फेंका तो रहा नहीं गया। उन्हें शांति से जाकर उनका प्लास्टिक वेस्ट वापस किया। साथ में महिला पर्यटक से अनुरोध किया कि आगे से ऐसा ना करें। उत्तराखंड को साफ रखें, देश को साफ रखें, पब्लिक प्लेसिस में कूड़ा न फेंके।
रिश्वतखोर को पकड़ो, इनाम में मिलेंगे एक लाख रुपए, तमिलनाडु के CM विजय ने दिया आदेश
◆ थलपति विजय की TVK सरकार ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक समर्पित 24 घंटे की टोल फ्री हेल्पलाइन 1800 425 1555 शुरू की है
#TamilNadu | #Vijay | TVK Vijay | Tamil Nadu | CM Vijay
🦠 Silent Fungal Infection Spreading in India
A new resistant ringworm strain (Trichophyton indotinea) is quietly affecting many families. It causes itchy red patches on skin and spreads easily through shared towels, clothes & bedsheets.
Key Tips to Stay Safe:
• Wash infected clothes separately in hot water
• Don’t share towels or soaps
• Wear loose cotton clothes
• Keep skin dry
• Complete full medicine course
Don’t ignore skin infections — see a doctor!
https://t.co/yyVlVGZPDl