मंगलोर से 40 किलोमीटर दूर एक श्राइन है।
धर्मस्थला कहते हैं।
यहाँ चलता है- SKDRDP
गूगल कीजिये।
"श्री क्षेत्र धर्मस्थला रूरल डेवलेपमेंट प्रोजेक्ट" जिसकी नींव डाली वीरेंद्र हेगड़े ने। हेगड़े साहब, यहाँ के मठाधीश है। इनके पिता भी थे। युवा वीरेन्द्र ने कमान अस्सी के दशक में सम्हाली। तब यहां सालाना दो तीन करोड़ का चढ़ावा आता था।
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हेगड़े साहब ने इसे उसके श्रद्धालुओ को उधार देना शुरु किया। गरीब, मजदूर, किसान, लघु व्यवसायी- उन्हें खोजकर, उनकी जरूरत के अनुसार लोन दिया जाता।
कोई कोलेटरल नही। मांगिये, नाम पता दीजिये, ऋण का पर्पज बताइये। इसकी जांच परख के बाद आपको ऋण मिल जाएगा। लोन पीरियड में फ्री बीमा, बेहद आसान क़िस्त, और साथ मे व्यवसाय के सम्बंध में तकनीकी सहायता भी।
क़िस्त लेने ट्रस्ट के कर्मचारी घर आते, और क़िस्त लेकर भगवान के फ़ोटो, और देवस्थान के नाम से छपी हुई रसीद देते। अब भगवान का पैसा भला कौन डिफॉल्ट करेगा, तो ऑन टाइम रिकवरी रेट 98+% था।
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तो भगवान से लिया उधार जब भगवान को वापस मिलता, तो किसी और को दिया जाता। जमा होते कोष से वीरेंद्र हेगड़े ने भारत का पहला स्वरोजगार प्रशिक्षण क्रेंद्र बनाया। रूडसेटी नामक गाँव के - वर्ल्ड क्लास सेंटर।
व्यवसाय के लिए लोग यहाँ फ्री में ट्रेनिंग लेते। मठ उन्हें लोन देता। मनुष्य का धन, ईश्वर के नाम पर, मनुष्य के काम आ रहा था। इससे प्रेरणा भारत सरकार ने ली।
जो लोग किसी बैंक में नौकरी करते है, वे R-seti ट्रेनिंग सेंटर्स से वाकिफ होंगे। देश के सभी जिलों में 2008-09 के दौरान भारत सरकार ये सेंटर खोले। जिन्हें जिले का लीड बैक रन करता है।
यह आरसेटी, दरअसल रूडसेटी सेंटर की रेप्लिका है। जो हालिया दशक में भारत मे स्किल ट्रेनिंग, स्किल इंडिया वगैरह योजनाओं का बीज है।
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जब 2011 में मैं SKDRDP की स्टडी करने गया था, उनका सालाना टर्नओवर 2200 करोड़ का था। उस वक्त कर्नाटक के 15 जिलों में 12 लाख से ज्यादा लोग इस व्यवस्था से लाइव लाभान्वित थे।
पूरी व्यवस्था, बैंकों से रिटायर्ड कुछ सीनियर अफसरों का बोर्ड सम्हालता। बाबा वीरेंद्र हेगड़े, इसके कस्टोडियन, मार्गदर्शक, और संरक्षक थे।
मिलने गए। पैर छुए। किसी गॉडमैन के लिए पहली बार सच्ची श्रद्धा उपजी थी। वापस आकर, मैंने अपने इलाके में ऐसी ही व्यवस्था खड़ा करने में कुछ भूमिका निभाई।
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धर्मस्थळा बेहद छोटा मंदिर है।
देश मे हजारो करोड़ चढ़ावे वाले दूसरे मंदिर, देवस्थल, ट्रस्ट हैं। अपारदर्शी, अनप्रोफेशनल मैनेजमेंट, संग्रह का भाव- चोरी तो होनी ही है। आज नही, तो पांच,दस, सौ या हजार साल बाद..
धन किसी मानव के ही काम आएगा। वह पुजारी हो, लुटेरा हो, चोर हो, ठेकेदार या ट्रस्टी। भगवान इसका भोग नही करेंगे। कभी भी नही करेंगे। लेकिन इसका सही इस्तेमाल हो सकता है।
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प्रेरणा लेने के लिए इस देश मे उदाहरण मौजूद हैं। लेकिन इसके लिए मंदिर के धनो का प्रवाह पब्लिक डोमेन लाना होगा। पारदर्शी, प्रोफेशनल मैनेजमेंट और उपयोग की सस्टेनेबल प्लानिंग करनी होगी।
देवस्थलों को मानवता की सेवा में लगाना होगा। यह नही किया, तो हर कोने में उग रहे मन्दिर और फलते फूलते बाबागिरी के उद्योग में जनता का धन फुंकता रहेगा। आपकी श्रद्धा पर अकर्मण्य चोर, पलते रहेंगे।
लेकिन इसके लिए शीर्षतम स्तर पर ईमान, धर्मनिष्ठा, मानवीयता और नीयत चाहिए। सिर्फ जय श्रीराम चिल्लाने से बात नही बनेगी। हिंदुत्व और आस्था से खिलवाड़ कर रहे मंदिर ट्रस्टों में सही लोगो की जरूरत है। हमे चम्पतराय हटाने होंगे।
और वीरेंद्र हेगड़े लाने होंगे।
Car 24 करके एक यूट्यूब चैनल द्वारा एक वीडियो बनाया गया था 0 एथेनाल और E20 तेल डलाकर।
जिसमें साफ दिखा कि E-0 पेट्रोल से गाड़ी का एवरेज 22km/l के आसपास था और E20 पेट्रोल में 14km/l था।
लेकिन अब उन्होंने यह वीडियो गड़बड़ी मंत्री जी के दबाव में वीडियो डीलिट कर दिया है।
मुझे नहीं पता ऐसी ख़बर बड़ी या ब्रेकिंग क्यों नहीं ... क्योंकि ग़रीब का बच्चा है? बंडा का मामला है? जिसे आप मैप में भी खोज नहीं पाएंगे!
ख़ैर बंडा सरकारी अस्पताल में 19 महीने के बच्चे की आंखों में डॉक्टर ने कफ साफ करने वाला ड्रॉप डाल दिया उसके आंखों की रोशनी चली गई है...
पूरे 1651 करोड़ देकर अपना महामानव सेशेल्स से एक मेडल खरीद लाया है।
जैसे भारत में परीक्षा के पेपर या यूनिवर्सिटी की डिग्री खरीदी जाती है।
फिर उस डिग्री पर जो चाहे छाप लो। एंटायर पॉलिटिकल साइंस जैसा दुनिया का इकलौता विषय भी।
आखिर में उसी डिग्री पर गलत स्पेलिंग में एक ऐसी सील लगाओ कि डिग्री लेने वाला चौथी फेल ही नज़र आए।
मोदीजी ने आखिर ये कारनामा भी आज कर दिखाया।
चैनल एक - आज तक।
6 अलग-अलग दिन अलग शो और व्यक्ति एक ! पुरी भीड़ में हर बार अंजना ओम कश्यप इसे चुन लेती है और माईक लगा देती है सवाल के लिए !
ख़ैर अब आप बताइए इतनी निष्पक्षता कोई दिखा सकता है ?
इमरजेंसी का केवल एक हिस्सा दिखाने वालों को 1978 का इंदिरा गाँधी का यह इण्टरव्यू ज़रूर सुनना चाहिए। वे कौन से हालात थे जिनमें में इंदिरा गांधी को इमरजेंसी लगानी पड़ी।
विपक्ष के नेता कह रहे थे कि अगर हम बैलेट से नहीं जीतेंगे तो बुलेट से सत्ता हथिया लेंगे।
पूरे देश में अराजकता की आंधी चला दी गई थी। एक बड़ा षड्यंत्र था जिसके ख़िलाफ़ इंदिरा गांधी झुकी नहीं।
इमरजेंसी के बाद बनी जनता पार्टी सरकार ने किस तरह 23, हज़ार शिक्षकों को जेल में डाल दिया था।
RSS वाले पिछले 50 साल से यह झूठ फैला रहे हैं कि इंदिरा गांधी ने आपातकाल इसलिए लगा दिया था क्योंकि उनकी संसद सदस्यता रद्द कर दी गई थी।
यह देखिए तब के RSS प्रमुख बालासाहब देवरस का इंदिरा गाँधी को लिखा पत्र जिसमें वह ख़ुद इंदिरा गाँधी को बधाई दे रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों की पीठ ने श्रीमती इंदिरा गांधी के निर्वाचन को वैध ठहराया है।
अब समय आ गया है कि 50 साल के झूठ से पर्दा हटाया जाय।