देश की सुरक्षा एवं जनसेवा के लिए अपना सर��वस्व अर्पण करने वाले परिश्रमी, निष्ठावान और वीर पुलिस के साथियों को पुलिस स्मृति दिवस पर नमन, जय हिंद 🇮🇳
#PoliceCommemorationDay
@vivekkumar84 सर नेता जी अपना वोट देखते है।उनको राजनीति करनी है।और शायद इसमे भी वाही होगा।और पोलिस पर द��ाव बनाया जायेगा।क्यों कि कमजोर नही है कर रखा। आज समझ मे आ गया कि यूनियन क्या है उसी का फायदा है।
@vivekkumar84 सर इस तरीके कि आये दिन घटना होती है।अगर पुलिस कोई अपराध करती है।शिकायत,मुकदमा,कानूनी प्रक्रिया होती है।आप तो जानते है पुलिस मे दरोगा सिपाही क्या होता है फिर भी पुलिस के ��ाथ इतना अत्याचार क्यों ।दोनो पक्षों मे गलत होते है ।लेकिन न्याय कानून से होता है ।न कि इस तरह से
#Justice_for_Khaki
वाराणसी में पुलिस सब इंस्पेक्टर पर हुए वकीलों के कायराना हमले और उनको मरणासन्न कर देने के उपरांत पुलिस द्वारा अब तक कोई कार्यवाही न होने से पुलिस जवानों का मनोबल टूट चुका है, खाकी की यह दुर्गति खाकी का मनोबल तोड़ चुकीहै@CMOfficeUP@dgpup@etv@bstvlive@Aamitabh2
जैसाकि विदित है कि आएदिन सुर्ख़ियों में बने रहने हेतु विवादित बयानबाज़ी करने वाले कुछ साधु-सन्तों को परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के भार��ीय संविधान के निर्माण में रहे उनके अतुल्य योगदान के बारे में सही जानकारी नहीं होने के कारण इनको इस बारे में कोई भी ग़लत बयानबाज़ी आदि करने की बजाय यदि वे चुप रहें तो यह उचित होगा।
साथ ही, बाबा साहेब के अनुयायी, मनुस्मृति का विरोध क्यों करते हैं? उसे भी इनको अपनी जातिवादी द्वेष की भावना को त्याग कर ज़रूर समझना चाहिये।
इसके साथ-साथ, इन्हें यह भी मालूम होना चाहिये कि बाबा साहेब महान् विद्वान व्���क्तित्व थे। इस मामले में कोई भी टीका-टिप्पणी करने वाले साधु-सन्त, इनकी विद्वता के मामले में कुछ भी नहीं हैं। अतः इस बारे में भी कुछ कहने से पहले इनको ज़रूर बचना चाहिये, यही नेक सलाह।
देश में ख़ासकर राजनैतिक स्वार्थ के कारण राजनीति का गिरता हुआ स्तर अति-दुखद एवं चिन्तनीय।
इस सम्बंध में सभी पार्टियों की राजनीति, पार्टी के संविधान के हिसाब से विचार और सिद्धान्तों के आधार पर, देश व करोड़ों ग़रीबों व आमजन के हित में होनी चाहिये, जो कि ख़ासकर पिछले कुछ वर्षों से सही से देख��े को नहीं मिल रहा है, जबकि इस दौरान् देश के सामने विभिन्न प्रकार की आन्तरिक एवं बाहरी चुनौतियाँ काफी बढ़ी ��ैं।
इतना ही नहीं बल्कि देश के उच्च सरकारी व ग़ैर-सरकारी संस्थाओं व विशेषकर राजनीति में उच्च पदों पर बैठे लोगों के बारे में जिस प्रकार की अभद्र, अशोभनीय, अमर्यादित व असंसदीय टिप्पणी आदि सार्वजनिक तौर पर करके उनकी व देश की छवि को भी धूमिल करने के जो प्रयास किये जा रहे हैं वह अति-दुखद व चिन्तनीय। ख़ासकर चुनाव के समय यह प्रक्रिया और भी अधिक विषैली व हिंसक हो जाती है। इसी क्रम में अभी बिहार में भी ��ो कुछ देखने व सूनने को मिला है वह देश की चिन्ता को बढ़ाने वाला है।
जबकि हमारी पार्टी बी.एस.पी., शुरू से ही ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के अम्बेडकरवादी सिद्धान्त और नीति पर आयरन दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ पार्टी व सरकार चलाने का साहस दिखाने वाली पार्टी होने के कारण किसी भी प्रकार की दूषित व ज़हरीली राजनीति के ख़िलाफ है और दूसरों से भी यही उम्मीद करती है कि वे देश व आमजन के हित में घिनौनी स्वार्थ ����� राजनीति करने से दूर रहें और एक-दूसरे को ज़बरदस्ती नीचा दिखाने की सस्ती राजनीति से देश का माहौल खराब ना करें तो बेहतर।
यहाँ इस बारे में यह विशेष उल्लेखनीय है कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का आदर्श कल्याणकारी भारतीय संविधान, भारत के करोड़ों लोगों के हित, सुरक्षा व उनके आत्म-सम्मान को सर्वोपरि मानते हुये, हर संवैधानिक संस्था को अपनी-अपनी निर्धारित सीमा में रहकर कार्य करने अर्था���् उन सबके लिए चेक एण्ड बैलेन्स की गारण्टी सुनिश्चित की है, जिस पर सही से अमल करके ही हालात को बिगड़ने से ज़रूर बचाया जा सकता है।
केन्द्र सरकार द्वारा कल संसद में, भारी हंगामे के बीच लाया गया 130वाँ संविधान संशोधन बिल, देश में पिछले कुछ वर्षों से चल रहे राजनैतिक हालात में, यह स्पष्टतः लो��तंत्र को कमज़ोर करने वाला लगता है और इसका सत्ताधारी पार्टियाँ अपने-अपने लाभ, स्वार्थ व द्वेष में ज्यादातर इसका दुरुपयोग ही करेंगी, ऐसी जनता को आशंका।
अतः इस बिल से हमारी पार्टी कतई भी सहमत नहीं है। सरकार इसे देश के लोकतंत्र एवं संविधान के हित में ज़रूर पुनर्विचार करे तो यह उचित होगा।
@PROBLEMOFPOLICE@samajwadiparty@DrRKVermamla2@yadavakhilesh@Rajeevkrishna69 पुलिस की समस्या महोदय लोगों को कभी नही दिखती है ।अध्यक्ष महोदय तो ऐसे कर रहे है जैसे इनके मन का म्यूजिक नही कोई दूसरा लगाओ।सभी विभागों की अपेक्षा पुलिस कर्मी के साथ आये दिन रोड एक्ससीडेंट,मानसिक उत्पीड़न,परिवार से दूर रहना,कम वेतन मे दिन रात ड्यूटी।कोई तो भला कर दी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा यह स्वीकार करना कि देश के विशाल आबादी वाले अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) समाज के लोगों की राजनीतिक व आर्थिक आशा, आकांक्षा व आरक्षण सहित उन्हें उनका संवैधानिक हक़ दिलाने के मामलों में कांग्रेस पार्टी खरी व विश्वासपात्र नहीं रही है कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह दिल में कुछ व जुबान पर कुछ और जैसी स्वार्थ की राजनीति ज़्यादा लगती है।
वास्तव में उनका यह बयान उसी तरह से जगज़ाहिर है जैसाकि देश के करोड़ों शोषित, वंचित व उपेक्षित एससी/एसटी समाज के प्रति कांग्रेस पार्टी का ऐसा ही दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण रवैया लगातार रहा है और जिस कारण ही इन वर्गों के लोगों को फिर अन्ततः अपने आत्म-सम्मान व स्वाभिमान तथा अपने पैरों पर खड़े होने की ललक के कारण अलग से अपनी पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) यहा��� बनानी पड़ी है।
कुल मिलाकर इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस पार्टी यूपी सहित देश के प्रमुख राज्यों की सत्ता से लगातार ��ाहर है और अब सत्ता गंवाने के बाद इन्हें इन वर्गों की याद आने लगी है जिसे इनकी नीयत व नीति में हमेशा खोट रहने की वजह से घड़ियाली आँसू नहीं तो और क्या कहा जाएगा, जबकि वर्तमान हालात में बीजेपी के एनडीए का भी इन वर्गों के प्रति दोहरे चरित्र वाला यही चाल-ढाल लगता है।
वैसे भी एससी/एसटी वर्गों को आरक्षण का सही से लाभ व संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को भारतरत्न की उपाधि से स��्मानित नहीं करने तथा देश की आज़ादी के बाद लगभग 40 वर्षों तक ओबीसी वर्गों को आरक्षण की सुविधा नहीं देने तथा सरकारी नौकरियों में इनके पदों को नहीं भरकर उनका भारी बैकलॉग रखने आदि के जातिवादी रवैयों को भला कौन भुला सकता है, जो कि इनका यह अनुचित जातिवादी रवैया अभी भी जारी है।
इतना ही नहीं बल्कि इन सभी जातिवादी पार्टियों ने आपस में मिलकर एससी, एसटी व ओबीसी आरक्षण को किसी ना किसी बहाने से एक प्रकार स��� निष्क���रिय एवं निष्प्रभावी ही बना दिया है। इस प्रकार दलितों, आदिवासियों व अन्य पिछड़ों इन बहुजन समाज को सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक तौर पर गुलाम व लाचार बनाए रखने के मामलों में सभी जातिवादी पार्टियाँ हमेशा से एक ही थैली के चट्टे-बट्टे रहे हैं,
जबकि अम्बेडकरवादी पार्टी बी.एस.पी. सदा ही इन वर्गों की सच्ची हितैषी रही है और यूपी में चार बार बी.एस.पी. के नेतृत्व रही सरकार में सर्वसमाज के ग़रीबों, मज़लूमो�� के साथ-साथ बहुजन समाज के सभी लोगों के जान-माल व मज़हब की सुरक्षा व सम्मान तथा इनके हित एवं कल्याण की भी पूरी गारण्टी रही है।
अर्थात् देश के बहुजनों का हित केवल बी.एस.पी. की आयरन गारण्टी में ही निहित है। अतः ख़ासकर दलित, आदिवासी व अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी समाज) के लोग ख़ासकर कांग्रेस, सपा आदि इन विरोधी पार्टियों के किसी भी बहकावे में नहीं आयें, यही उनकी सुख, शान्ति व समृद्धि हेतु बेहतर है।
संसद का आज से शुरू हो रहा बहुप्रतीक्षित सत्र, पिछले सत्रों की तरह देशहित व जनहित के अहम् और अति-ज़रूरी मुद्दों पर उचित एवं समुचित बहस तथा किसी बेहतर परिणाम के बिना ही, सरकार और विपक्ष के बीच टकराव, आरोप-प्��त्यारोप, हंगामा तथा देश के करोड़ों ग़रीब व अन्य मेहनतकश बहुजनों के थोड़े ’अच्छे दिन’ की ओर सही से आगे बढ़ने के भरोसे के बेगै़र ज़्यादातर निराश करने वाला ना हो, इसकी सभी देशवासियों को चिन्ता स्वाभाविक।
वैसे भी देश के सामने ज़बरदस्त महंगाई, ग़रीबी व बेरोज़गारी, महिला असुरक्षा तथा ख़ासकर क्षेत्र व भाषा आदि को लेकर बढ़ता आपसी विवाद व हिंसक टकराव आदि के जनहित की समस्यायें के साथ ही आन्तरिक व बाहरी/सीमा सुरक्षा जैसी देशहित के मुद्दे लोगों की सुख-शान्ति व समृद्धि के संघर्ष क�� प्रभावित कर रहे हैं, तथा इन मामलों पर सार्थक बहस के आधार पर आगे की दीर्घकालीन ठोस नीति व रणनीति बनाकर उन पर अमल के लिए संसद का सुचारू रूप से संचालन जनता ज़रूरी समझती है, ताकि देश विकास व लोग तरक्की के रास्ते पर सही/आसानी से चल सकंे, जिसमें ही देश के सर्वसमाज एवं बहुजनों का हित निहित है।
इसके अलावा, विश्व के राजनीतिक व आर्थिक हालात जिस तेज़ी से लगातार नई करवटें बदल रहे हैं उसमें भारत सहित विभिन्न देशों के लोकतंत्र व उसकी संप्रभूता आदि को नई चुनौतियाँ एवं नया ख़तरा भी मंडलाने लगा है, जिसके प्रति भारत सरकार की अपनी राजनीतिक सजगता व कुशलता ही काफी नहीं है, बल्कि उसका सही से मुकाबला करने के लिए सरकार अगर विपक्ष के माध्यम से पूरे देश की जनता को विश्वास में लेकर आगे बढ़े तो यह उचित होगा। वास्तव में सरकार और विपक्ष दोनों पार्टी हित से ऊपर उठकर इन मुद्दों पर एकता बनायें, यही देश के बहुजनों क�� चाहत है।
इसके साथ ही, संसद के वर्तमान मानसून सत्र के दौरान पहलगाम नरसंहार के मामले में भारत के ’आपरेशन सिन्दूर’ पर चर्चा के लिये सरकार को सकारात्मक होना चाहिये तो यह बेहतर होगा, क्योंकि देश की जनता व सीमाओं की सुरक्षा अन्ततः सरकार का पूर्ण उत्तरदायित्व बनता है, जिसके प्रति प्रतिपक्ष द्वारा भी पार्टी हित से ऊपर उठकर सरकार से सहयोग का रवैया अपनाना ज़रूरी अर्थात् सरकार व विपक्ष दोनों के लिए देश व जन सुरक्षा सर्वोपरि है।