174000 लाशे गिरी थीं ,,700 मुगलों को अपने हाथों से काटने वाले योद्धा ,,
यह थे श्रीराम मंदिर रक्षक पण्डित देवीदीन पाण्डेय जी !
**🔱 श्रीराम मंदिर के वीर रक्षक : पण्डित देवीदीन पाण्डेय 🔱**
🛕 अयोध्या की पावन धरा पर, जहाँ भगवान श्रीराम का जन्म हुआ, वहाँ सदियों से राम मंदिर की रक्षा के लिए अनेक वीरों ने अपना बलिदान दिया।
ऐसे ही एक महान योद्धा थे
पण्डित देवीदीन पाण्डेय ।
सनेथू गांव, अयोध्या के रहने वाले पण्डित देवीदीन पाण्डे का जन्म एक सम्मानित सर्यूपारीण ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
वे एक कर्मकांडी पुरोहित थे।
शास्त्रों का अध्ययन, पूजा-पाठ, हवन-यज्ञ और लोगों को धार्मिक मार्गदर्शन देना ही उनका दैनिक कार्य था।
उनकी आँखों में हमेशा भगवान राम के प्रति अटूट भक्ति झलकती थी।
लेकिन जब इतिहास का सबसे काला अध्याय लिखा जा रहा था, तब उनकी नियति ने उन्हें पुरोहित से योद्धा बना दिया।
🕌 **मुगल आक्रमण** 🕌
सन् 1528 के आसपास, बाबर के सेनापति **मीर बाकी** के नेतृत्व में मुगल सेना राम मंदिर को ध्वस्त करने के उद्देश्य से अयोध्या की ओर बढ़ी। मंदिर की प्राचीन गगनचुंबी शिखर को गिराने और उस पवित्र भूमि पर मस्जिद बनाने की उनकी मंशा थी।
जब यह खबर सनेथू गांव तक पहुँची, तो पण्डित देवीदीन पाण्डेय जी का खून खौल उठा। उन्होंने अपना पुरोहित वाला चोला उतार फेंका और कहा —
**“जब धर्म पर संकट आए, तब शास्त्रों की रक्षा तलवार से करनी पड़ती है।”** ⚔️
उन्होंने आसपास के ब्राह्मणों और क्षत्रियों को एकत्र किया। जो लोग कभी पूजा-पाठ करते थे, वही अब हथियार उठाने को तैयार हो गए। पण्डित जी स्वयं आगे बढ़े और मुगल सेना का सामना करने के लिए तैयार हुए।
**⚔️ महायुद्ध का आरंभ ⚔️**
युद्ध का मैदान भयानक था। मुगल सेना भारी संख्या में थी — घुड़सवार, तोपें, तीर और तलवारें। लेकिन पण्डित देवीदीन पाण्डे की अगुवाई में छोटी-सी हिंदू सेना डटकर लड़ी।
पण्डित जी की तलवार मानो बिजली की तरह चमक रही थी। उन्होंने एक-एक करके मुगल सैनिकों को मार गिराना शुरू कर दिया। उनकी फुर्ती, शौर्य और राम-भक्ति का जोश अद्भुत था।
कहा जाता है कि उस विकराल युद्ध में
पण्डित देवीदीन पाण्डेय जी ने अकेले ही 700 मुगल सैनिकों को अपने हाथों से काट डाला ।
चारों ओर लाशों के ढेर लग गए। इतिहास गवाह है कि उस युद्ध में कुल **1,74,000 लाशें** गिरी थीं।
खून की नदियाँ बहने लगीं।
धूल और धुएँ में भी पण्डित जी का सिंहनाद गूँजता रहा — **“जय श्री राम!”** 🕉️
🏹 **वीरता का चरम क्षण** 🏹
युद्ध अपने चरम पर था। पण्डित जी पूरी तरह घायल हो चुके थे, फिर भी वे रुकने वाले नहीं थे। तभी एक मुगल सैनिक चुपके से उनके पीछे पहुँचा और अपनी तलवार से जोरदार वार किया।
तलवार इतनी तेजी से चली कि पण्डित जी का ऊपरी सिर कटकर दो भागों में फट गया ।
खून उनके चेहरे पर बहने लगा।
लेकिन महान योद्धा रुके नहीं।
उन्होंने तुरंत अपने गमछे को सिर पर बाँध लिया, खून को रोकने की कोशिश की और फिर से युद्ध में कूद पड़े।
यह दृश्य देखकर मुगल सैनिक भी भयभीत हो गए।
एक ब्राह्मण पुरोहित, जिसका सिर फटा हुआ है, फिर भी तलवार चलाए जा रहा है — यह अद्भुत दृश्य था।
पण्डित जी लड़ते रहे।
एक के बाद एक वार झेलते रहे।
शरीर पर सैकड़ों घाव हो चुके थे।
आखिरकार, अत्यधिक रक्तस्राव और चोटों के कारण वे वहीं धराशायी हो गए।
**वीरगति को प्राप्त करते हुए** उन्होंने राम-नाम का जाप किया और अपने प्राण त्याग दिए। 🚩
🙏 **अमर बलिदान** 🙏
पण्डित देवीदीन पाण्डेय जी की यह वीरता आज भी अयोध्या की मिट्टी में बसी हुई है। उन्होंने साबित कर दिया कि ब्राह्मण केवल शास्त्रों का ज्ञाता नहीं, बल्कि जब समय आए तो वह तलवार भी उठा सकता है।
उनकी कहानी हमें सिखाती है की
धर्म की रक्षा के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार रहना चाहिए ।
आज जब श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बन चुका है, तो हमें उन वीर शहीदों को याद करना चाहिए जिन्होंने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।
पण्डित देवीदीन पाण्डेय जी को हमारा बार-बार नमन है।
जय श्री राम!
आरोपी को तलब करने से पहले दर्ज गवाही के आधार पर दोषसिद्धि नहीं हो सकती:-इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी आरोपी को धारा 319 दंड प्रक्रिया संहिता (अब BNSS के समकक्ष प्रावधान) के तहत मुकदमे में शामिल करने से पहले दर्ज किए गए साक्ष्य उसके विरुद्ध दोषसिद्धि का आधार नहीं बन सकते।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस समय गवाही दर्ज हुई हो, यदि आरोपी मुकदमे का पक्षकार नहीं था और अदालत में उपस्थित नहीं था, तो ऐसी गवाही को उसके खिलाफ अंतिम रूप से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कानून के अनुसार साक्ष्य आरोपी की उपस्थिति में दर्ज होना चाहिए ताकि उसे जिरह और बचाव का अवसर मिल सके।
मामला वर्ष 2008 के एक हत्या कांड से जुड़ा था। पुलिस ने आरोपी का नाम आरोपपत्र में शामिल नहीं किया था। बाद में कुछ गवाहों के बयानों के आधार पर उसे धारा 319 CrPC के तहत मुकदमे में तलब किया गया। लेकिन तलब किए जाने के बाद पुनः दर्ज गवाही में प्रमुख गवाहों ने आरोपी की संलिप्तता से इनकार कर दिया।
इसके बावजूद निचली अदालत ने पहले दर्ज बयानों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा दे दी थी। हाईकोर्ट ने इसे कानूनी रूप से गलत माना और कहा कि तलब किए जाने से पहले दर्ज साक्ष्य दोषसिद्धि का आधार नहीं बन सकते।
पर्याप्त वैध साक्ष्य के अभाव में हाईकोर्ट ने आरोपी की दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया।
केस शीर्षक-
प्रमोद कुमार सिंह उर्फ गुड्डू सिंह बनाम राज्य
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पीले चचा खुद कह रहे है कि लाखों की संख्या में यादव और अपराधी बीजेपी का झंडा लगाकर घूम रहे हैं भारती जनता पार्टी की सरकार बनाने के लिए..
यही यादव जो भारती जनता पार्टी की सरकार का झंडा लगाकर घूम रहे यही जब कोई अपराध करते है तो यही पीले चचा भारती जनता पार्टी से सवाल करने के बजाय अखिलेश यादव जी से सवाल करते है।
फिर वहां इनको वो अपराधी नहीं दिखता है इनको सिर्फ अखिलेश यादव जी का स्वजातीय दिखता है।
इसके लिए जिम्मेदार कौन ?
क्या यह न्याय पालिका / न्याय व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार की तरफ प्रत्यक्ष इशारा नहीं करता है
पूछता है भारत !
सावधान भारत
सावधान इंडिया
मासूम की चीखें,बर्बाद हुए सपने..
लखनऊ में एक बार फिर से इंसानियत शर्मसार और दिल दहला देने वाली घटना।
जानकीपुरम के मिर्जापुर गाँव में मानसिक रूप से कमजोर 15 साल की किशोरी को खाली मकान में बंधक बनाकर रातभर तीन दरिंदों ने
जीवन नर्क बना डाला।
⚖️ क्या केवल सिविल विवाद होने से आपराधिक मुकदमा खत्म हो सकता है? हाईकोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण जवाब।
मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने उसकी संपत्ति पर जबरन कब्जा कर लिया और उसके मकान से सामान भी निकाल लिया। इस संपत्ति को लेकर पहले से एक दीवानी (सिविल) मुकदमा भी चल रहा था। आरोपियों का तर्क था कि जब विवाद सिविल प्रकृति का है, तो उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल किसी सिविल विवाद के लंबित होने से आपराधिक मुकदमा समाप्त नहीं किया जा सकता। यदि शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया किसी आपराधिक अपराध के तत्व दिखाई देते हैं, तो आपराधिक कार्यवाही जारी रहेगी। अदालत ने कहा कि एक ही घटना से सिविल और आपराधिक दोनों प्रकार के विवाद उत्पन्न हो सकते हैं तथा दोनों कार्यवाहियां समानांतर रूप से चल सकती हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि सिविल मुकदमा लंबित है या नहीं, बल्कि यह है कि शिकायत में आपराधिक अपराध के आवश्यक तत्व मौजूद हैं या नहीं। यदि मौजूद हैं, तो केवल सिविल विवाद का हवाला देकर आपराधिक कार्यवाही को खत्म नहीं किया जा सकता। ⚖️
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“ना बंगला बनाया…
ना काली कमाई की…
बस रिश्वत लेने से मना कर दिया!”
अब वही UP Police का सिपाही सस्पेंड है…
और उसका परिवार रात-रातभर पुलिस दबिश का डर झेल रहा है।
सुनील शुक्ला की मां कैमरे पर रो पड़ीं।
कहती हैं —
“हमने बेटे को सिखाया था कि भूखे रह लेना,
लेकिन गलत पैसा मत लेना…”
परिवार का आरोप है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के बाद
आधी रात घर पर पुलिस पहुंची,
बीमार मां का BP बढ़ गया,
पूरा परिवार दहशत में आ गया।
सबसे ज्यादा लोगों को ये बात झकझोर रही है कि —
जिस घर में आज तक रिश्वत का ₹1 नहीं आया,
उसी घर को आज प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
पिता होमगार्ड थे…
बहन भी नौकरी कर रही है…
गांव का साधारण परिवार सिर्फ इतनी मांग कर रहा है —
“ईमानदारी की सजा मत दो।”
सुनील शुक्ला का मामला अब सिर्फ एक सस्पेंशन नहीं रहा…
ये उस सिस्टम पर बड़ा सवाल बन चुका है
जहां भ्रष्टाचार पर बोलने वाला ही निशाने पर आ जाता है।
मुख्यमंत्री से परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है।
“अगर सच बोलना गुनाह है…
तो फिर ईमानदार बचेगा कौन?”
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— at Mugra Badshapur Jaunpur.
🔥 BIG BREAKING 🔥
ब्लूमबर्ग का बहुत बड़ा धमाका....
रिज़र्व बैंक ने अर्थव्यवस्था बचाने के लिए 12 बिलियन डॉलर में कई टन सोना बेचा है।
देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए रिज़र्व बैंक ने 83 टन सोना बेच दिया है... मोदी सरकार की मर्जी से।
देश रसातल में जा रहा है। मौजूदा सरकार सिर्फ गाल बजाने वाली सरकार है।
देश का गोल्ड भंडार 880 टन था, इस बार सरकार ने गोल्ड रिज़र्व के आंकड़े छिपा लिए हैं।
1991 में भी सोना गिरवी रखा गया था; देश के इतिहास में किसी भी सरकार ने कभी सोना नहीं बेचा।
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सोचिए जिस एजेंसी से भ्रष्ट अफसर डरते हैं, उसी एजेंसी के अंदर घुसकर स्टिंग करना कितना बड़ा रिस्क होगा!
दैनिक भास्कर के रिपोर्टर सुधीर बिश्नोई ने डेढ़ महीने तक लगातार अंडरकवर रहकर लोकायुक्त के कथित भ्रष्ट नेटवर्क को एक्सपोज किया। डीएसपी से लेकर कर्मचारियों तक की डील कैमरे में रिकॉर्ड करना कोई सामान्य काम नहीं है।
पूरी रिपोर्ट भास्कर पर देखें व पढ़े: https://t.co/fQYsGTwgVh
लाइव वीडियो : महिला को सड़क पर भगा-भगा कर मारा जा रहा है। आरोप है कि महिला को शादी के 12 साल बाद भी बच्चा ना होने पर यातनाएँ दी जाती हैं। महिला को कई दिन तक कमरे में भूखा-प्यासा रखने का भी आरोप है। मामला उत्तर प्रदेश के हापुड़ का है।
ऐतिहासिक निर्णय परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह (2020) में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने यह महत्वपूर्ण आदेश दिया कि सभी पुलिस थानों तथा केंद्रीय जांच एजेंसियों में अनिवार्य रूप से नाइट विज़न, ऑडियो-वीडियो युक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
इसका उद्देश्य पुलिस हिरासत में होने वाली यातना (Custodial Torture) को रोकना तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना था।
प्रकरण का नाम: परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह एवं अन्य
न्यायालय: भारत का सर्वोच्च न्यायालय
निर्णय दिनांक: 2 दिसंबर 2020
पीठ: न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन
न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ
न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस
मुख्य विषय: हिरासत में मानवाधिकारों की सुरक्षा, पुलिस की क्रूरता की रोकथाम तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
@Uppolice