Onam is more than a harvest festival
it carries the memory of Vamana Bhagavan.
Celebrated under Shravana Nakshatra, this sacred day reminds us of humility, dharma and the grace of Mahavishnu.
Warm ThiruvOnam wishes to all, Happy Onam ☘️🌺
Lost in the Divine Melody 🪈
Surrendering every thought at His lotus feet ✨
Let the soothing rhythm of His flute wash over your soul and heal the quiet spaces within 🌸
May Kanha’s grace bring boundless love, peace, and light to your journey today 💫
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100 साल तक ढूंढते रहे ब्रह्मांड का अंत, नहीं मिला किनारा! 😱🔱
ज्ञान के अहंकार में थे शुक्राचार्य, फिर महादेव ने दिखाया अपना विराट स्वरूप पूरा ब्रह्मांड शिव में समाया है! अहंकार टूटा तो शरण मिली! 🙏
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इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को अब तक 103 Million यानी 10 करोड़ 30 लाख लोग देख चुके है, इतना ही नहीं 10M लोगो ने लाइक किया है, ये मामूली बात नहीं है !
इस बच्ची की आवाज में वाकई जादू है 🔥
रोंगटे खड़े करने वाला संवाद है— सुनिएगा ज़रूर
कलियुग के शतरंज मै राम नियम है, तो कृष्ण चाल है
मर्यादा मै रहना है तो श्री राम से सीखो
और मर्यादा मै रखना है तो श्री कृष्ण से सीखो
हरे कृष्ण - हरे राम !!
Celebrating Shri Krishna Janmashtami at home?
No elaborate setup needed - just faith, a deepam, flowers, a Krishna photo and a heartfelt offering.
A simple step-by-step puja guide for Janmashtami, including the midnight rituals. Save & share! 🙏
यह वीडियो हिंदू धर्म (सनातन धर्म) की निरंतरता, दर्शन और उसकी दीर्घायु के पीछे के कारणों का विश्लेषण करता है।
1. सभ्यताओं की तुलना और निरंतरता
प्राचीन सभ्यताएँ:
मिस्र (Egypt), रोम (Rome), ग्रीस और मेसोपोटेमिया जैसी महान प्राचीन सभ्यताएँ समय के साथ समाप्त या ध्वस्त हो गईं।
इनके विपरीत, भारत की प्राचीन सनातन परंपरा आज भी जीवित है, जिसका पालन दुनिया भर में 1 अरब से अधिक लोग कर रहे हैं।
2. धर्म बनाम 'जीवन जीने की प्रणाली' (Operating System)
हिंदू धर्म केवल नियमों, कर्मकांडों या ईश्वर की सूची तक सीमित कोई पारंपरिक धर्म नहीं है।
हिंदू धर्म सभ्यता का एक 'ऑपरेटिंग सिस्टम' (Operating System) है, जो 10,000 वर्षों के प्रयोगों, दर्शन और खोजों से विकसित हुआ है।
यह व्यक्ति पर विचार थोपता नहीं है, बल्कि अन्वेषण (Explore) करने की स्वतंत्रता देता है—चाहे आप एकेश्वरवादी हों, बहुदेववादी हों या ईश्वर को न मानने वाले हों।
3. आधुनिक विज्ञान और प्राचीन दर्शन:
भारतीय ज्ञान की तुलना आधुनिक विज्ञान और दर्शन से करता है:
अहंकार (Ego): जिसे 20वीं सदी में आधुनिक मनोविज्ञान ने पहचाना, उसे हजारों वर्ष पहले ही 'अहंकार' के रूप में वर्णित कर दिया गया था।
चेतना (Consciousness): उपनिषदों के अनुसार, चेतना केवल मस्तिष्क की उपज नहीं है, बल्कि ब्रह्मांड स्वयं को अनुभव कर रहा है।
भगवद्गीता और मुक्ति: आधुनिक थेरेपी जिसे अनित्यता (Impermanence) को स्वीकारना कहती है, उसे भगवद्गीता में कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान पर 'मुक्ति' के मार्ग के रूप में समझाया गया था।
वैज्ञानिक गणनाएँ:
प्रकाश की गति, ब्रह्मांड की आयु और समय के चक्र (Cyclic Nature of Time) का ज्ञान प्राचीन भारतीय ग्रंथों और वेधशालाओं में पहले से मौजूद था।
4. वैश्विक रुझान और आत्म-पहचान:
आज दुनिया भर के लोग (सिलिकॉन वैली से लेकर टोक्यो तक, विभिन्न पेशों से जुड़े लोग) इस परंपरा की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
मूल संदेश: यह दर्शन मनुष्य को 'पापी' या 'सीमित' नहीं मानता, बल्कि यह सिखाता है कि "अहं ब्रह्मास्मि" (आप स्वयं ब्रह्म का ही रूप हैं)।
5. सनातन के जीवित रहने का मुख्य कारण
मिस्र का अंत तब हुआ जब उसका फ़िरौन गिरा; रोम का अंत साम्राज्य के पतन से हुआ।
परंतु हिंदू धर्म किसी एक पैगंबर (Prophet), एक पुस्तक या एक राजा पर टिका हुआ नहीं है।
यह "मैं कौन हूँ?" (Who am I?) इस शाश्वत प्रश्न पर आधारित है।
प्रश्न को जीता नहीं जा सकता, जलाया नहीं जा सकता या गुलाम नहीं बनाया जा सकता, इसलिए यह परंपरा हर आक्रमण के बाद फिर से जीवित हो उठी।
निष्कर्ष:
सनातन धर्म को केवल एक पूजा-पद्धति न मानकर, एक गहन आध्यात्मिक और वैज्ञानिक जीवन-दर्शन के रूप में देखना चाहिए।