जेलेंस्की पर भड़के मार्को रुबियो, युद्ध खत्म करने पर ध्यान देने की दी सलाह
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से जब पूछा गया कि क्या अमेरिका ने यूक्रेन के साथ खुफिया जानकारी साझा करना बंद कर दिया है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि जेलेंस्की को यह जानकारी कहां से मिल रही है और वह प्रेस में ऐसा क्यों कह रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, "हम चाहते हैं कि वह (जेलेंस्की) युद्ध खत्म करने पर ध्यान दें। उन्हें इसी बात पर ध्यान देना चाहिए।"
हृदयविदारक!
“मेरा महीने का किराया ₹80,000 है। अभी मेरी जेब में ₹20,000 भी नहीं बचे हैं…”
: कनॉट प्लेस से दुकानदार
बता दें कि यह दिल्ली के व्यापारियों के लिए दर्दनाक सच्चाई है क्योंकि कथित प्रदर्शनों से उनके व्यापार पर असर पड़ा है।
वह उस समय (पर्व) जो उनका गोल्डन समय होता है।
ध्रुव राठी, अभिजीत दिपके, राहुल और उनके पूरे गैंग जैसे लोगों के लिए, यह राजनीतिक ड्रामा हो सकता है। लेकिन इन व्यापारियों के लिए, यह उनकी रोजी-रोटी का सवाल है।
इनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
हम भारतीयों की सबसे बड़ी कमी यही है कि हमारी याददाश्त बहुत छोटी होती है ..हम पुरानी बातों को बहुत जल्दी भूल जाते हैं
राहुल गांधी ने बयान दिया मेरी सरकार रहती तो मैं 15 मिनट में चीन को उठाकर फेंक देता.. हमने खूब तालियां बजाई
और आज राहुल गांधी बार-बार गोदी मीडिया गोदी मीडिया चिल्लाते हैं
2009 में राहुल गांधी की सरकार थी, चीन भारत की सीमा में घुस आया फायरिंग किया, 20 जवान घायल हो गए एक जवान का निधन हो गया
1 मिनट के अंदर सरकार का बयान आया ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। चीन हमारी सीमा में नहीं आया है कुछ साहसिक पत्रकार लेह के मिलिट्री हॉस्पिटल में जाकर ग्राउंड जीरो से सच्चाई दिखा दिए और घायल जवानों का इंटरव्यू ले लिए
कुल 15 पत्रकारों और कैमरामैन के ऊपर इंडियन सीक्रेट एक्ट सहित देशद्रोह जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज करवा कर उन्हें जेल भेज दिया गया था
और मीडिया को आदेश दे दिया गया था इस मामले पर आपको कोई खबर नहीं चलानी है और जो कोई मीडिया खबर दिखाएगी या खबर छपेगा उसे ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट के तहत जेल भेज दिया जाएगा
फरवरी 2007 में पाकिस्तान का विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कुरैशी भारत आया था।
दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास में उसने भारत के सभी चैनलों को इंटरव्यू दिया।
उसका इंटरव्यू राजदीप सरदेसाई रजत शर्मा करण थापर बरखा दत्त शेखर गुप्ता सब ने लिया। कोई परेशानी नहीं.. बहुत फ्रेंडली सवाल पूछे गए.. गंगा जमुनी तहजीब के बारे में पूछे गए पाकिस्तान की जनता के शौक के बारे में पूछे गए लाहौर के गोल चक्कर में बिकने वाले मटन चिकन के बारे में सवाल पूछे गए
फिर नंबर आया अर्नब गोस्वामी का जो उस वक्त टाइम्स नाउ में थे
अरनव गोस्वामी ने आई एस आई द्वारा दिए गए सवालों की लिस्ट या फ्रेम के बजाय पाकिस्तान के विदेश मंत्री से एक पत्रकार की हैसियत से सवाल पूछना शुरू किया
अरनव गोस्वामी का पहला ही सवाल था कि समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में भारत ने जो सबूत पाकिस्तान को दिया है उस पर आप ने क्या कार्रवाई किया ?
पाकिस्तान का विदेश मंत्री जवाब देने में अटक गया फिर और गोस्वामी ने जब कड़वे सवाल पूछने शुरू किये तुरंत ही आईएसआई के अधिकारी आए और अरनव गोस्वामी के साथ तू तू मैं मैं करने लगे और इंटरव्यू बंद करने को कहने लगे
पाकिस्तान का विदेश मंत्री चुपचाप बैठा देख रहा था
सवाल यह है क्या किसी देश का विदेश मंत्री किसी को इंटरव्यू दे और सेना के अधिकारी उसका इंटरव्यू रुकवा सकते हैं ?
दूसरी बात है की अर्नब गोस्वामी के पहले जिन पत्रकारों ने इंटरव्यू लिया उन्होंने उस वक्त मना क्यों नही कर दिया कि हम पत्रकार हैं हमारा धर्म है अपने अनुसार सवाल पूछना ना कि दिए गए फ्रेम के अनुसार सवाल पूछना
क्या ये महज संयोग है....या कुछ और...
* रूस कई साल से यूक्रेन के साथ युद्ध मे है.
* इजराइल 3 साल से युद्ध मे है.
* फ्रांस को अवैध घुसपैठियों ने जला रखा है.
* स्पेन पर घुसपैठियों ने हमला बोल रखा है.
* इटली भी अवैध प्रवाशियों के कारण जल रहा है.
* इंग्लैंड पहला मुस्लिम परमाणु शक्ति बनने के कारण पर है.
* अमेरिका और ईरान भी युद्ध मे हैं.
* हूतियों ने नंगे पैर सऊदी पर हमला बोल रखा है.
* वेनेजुएला पर क़ब्ज़ा किया जा चुका है.
* नेपाल मे तख्तापलट हो चुका.
* श्रीलंका मे तख्तापलट हो चुका.
* बांग्लादेश मे तख्तापलट हो चुका.
* पाकिस्तान टूटने की कगार पर खड़ा है.
.....और....
* भारत मे तख्तापलट की कोशिशें लगातार चल रही हैं....लेकिन भारत के पास ऐसा नेतृत्व है जिसकी वजह से ये कोशिशें कामयाब नहीं हो पा रहीं.
.......सबकुछ कितना स्वाभाविक है....मानो सब अपने आप हो रहा है....ये अराजकता अपने आप फैल रही है....लेकिन भारत के अनुभव से ये कहा जा सकता है कि.....कुछ भी अपनेआप नहीं हो रहा....कुछ भी स्वाभाविक नहीं है....बल्कि ये सब कुछ जान बुझ कर किया जा रहा है....
.....क्या दुनिया किसी बड़े बदलाव की तरफ जा रही है....!!...ऐसा लग रहा है...मानो पूरी दुनिया की व्यवस्था को बदलने की....और एक नई व्यवस्था बनाने की कोशिश हो रही है.....
....और इस रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा एक ही इंसान दिख रहा है....जो लगातार.....हर तरह के दबाव के बीच.....भारत को लगातार इन परेशानियों से बचाते हुए....आगे बढ़ता जा रहा है....
जय श्रीराम 🙏🚩
बिल्डिंग्स में आग, कार जलकर राख, दुकानों में लूट... ये है फ्रांस
दिल्ली में कॉकरोच क्रांति के नाम पर प्रदर्शनों के चलते बेहाल हैं लोकल दुकानदार
अब क्यों नहीं फ्रांस में हो रहे दंगों को 'लोकतांत्रिक हक' बता रहे बीबीसी और अल जजीरा? @pujaranaa
यह वीडियो भयंकर वायरल होना चाहिए। इसे डाउनलोड करके सबको भेजना चाहिए...
इस वीडियो में भारत-बांग्लादेश के पुराने जटिल बॉर्डर और 2015 के लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट की सरल व्याख्या की गई है।
https://t.co/LwQU1UhkNP
वीडियो में तेलंगाना के BJP सांसद कोंडा विशेश्वर रेड्डी मैप दिखाकर समझा रहे हैं कि 2015 से पहले भारत और बांग्लादेश की सीमा दुनिया की सबसे जटिल सीमाओं में से एक थी।
मुख्य बातें सरल भाषा में।
एक देश के छोटे-छोटे टुकड़े (जमीन के टुकड़े) दूसरे देश के अंदर फंसे हुए थे। भारत के अंदर बांग्लादेश के टुकड़े थे और बांग्लादेश के अंदर भारत के टुकड़े थे।
https://t.co/JUmtAQuzg0
और भी जटिल स्थिति।
सिर्फ साधारण enclaves नहीं थे। कुछ जगहों पर 2nd order enclaves थे (जैसे बांग्लादेश के अंदर भारत का टुकड़ा, और उसके अंदर फिर बांग्लादेश का छोटा टुकड़ा)।
और दुनिया का इकलौता 3rd order enclave भी था। एक के अंदर दूसरे का, उसके अंदर तीसरे का (रूसी डॉल जैसी स्थिति)। वीडियो में मैप पर ये टुकड़े दिखाए गए हैं।
https://t.co/nbMrAnJjvI
समस्या क्यों थी?
इन टुकड़ों में रहने वाले लोगों को नागरिकता, पहचान पत्र, स्कूल, अस्पताल और प्रशासनिक सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं। वे दशकों तक असमंजस में रहे। 2010 की जनगणना के अनुसार इन enclaves में करीब 50,000 से ज्यादा लोग रहते थे।
कैसे हल हुआ?
1974 में ही भारत और बांग्लादेश के बीच लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट (LBA) हुआ था, लेकिन भारत में इसे लागू करने के लिए संविधान संशोधन की जरूरत थी।
2015 में मोदी सरकार के समय भारतीय संसद ने 100वें संविधान संशोधन (28 मई 2015) को पास किया। इससे समझौता लागू हुआ।
https://t.co/Thxz1nvY4e
क्या हुआ एक्सचेंज में?
भारत ने 111 अपने enclaves बांग्लादेश को दिए।
बांग्लादेश ने 51 अपने enclaves भारत को दिए।
कुल 162 enclaves का आदान-प्रदान हुआ।
वहां रहने वाले लोगों को चुनने का अधिकार मिला कि वे किस देश की नागरिकता लें और कहां रहना चाहते हैं।
31 जुलाई 2015 की आधी रात को ये एक्सचेंज हुआ और सीमा साफ हो गई।
https://t.co/JUmtAQuzg0
वीडियो के आखिरी हिस्से में स्पीकर इसे वर्तमान राजनीति से जोड़ते हैं। स्क्रीन पर “Regime change”, “India not yielding”, “I want to remove Modi”, “Without winning Elections – Bangladesh Style” जैसे शब्द दिखते हैं। वे पुराने enclaves की समस्या को अवैध घुसपैठ और मौजूदा चुनावी रोल (SIR) से जुड़े मुद्दों से जोड़कर कोई राजनीतिक तर्क दे रहे हैं।
संक्षेप में:-
वीडियो मुख्य रूप से बताता है कि भारत-बांग्लादेश सीमा कितनी उलझी हुई थी और 2015 के 100वें संशोधन से उसे कैसे साफ और सुलझाया गया और अभी जो बांग्लादेश की तर्ज पर रिजीम चेंज की बात चल रही है उसके पीछे कौन से कारण व शक्तियाँ हैं।
आदिशक्ति माँ दुर्गा के अष्टम स्वरूप माँ महागौरी की आराधना से साधक के जीवन में पवित्रता, आत्मसंयम और शक्ति का संचार होता है।
जगज्जननी माँ से प्रार्थना है कि सभी श्रद्धालुओं के जीवन में सुख और शांति का वास हो, उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हों तथा घर-आंगन नई आशा व नव ऊर्जा से आलोकित हो।
जय माँ महागौरी।
जय माता दी 🙏🏻
#JaiMataRani #JaiMataDi #UttarPradesh #BJP4UP #संडीला_विधानसभा #संडीला #हरदोई #भाजपा #विधायक
यूक्रेन के राष्ट्रपति के बाद अब पूरा यूरोपियन यूनियन एलॉन मस्क के सामने गिड़गिड़ा रहा है कि प्लीज एलन स्टरलिंक चालू कर दो वरना हम यूरोप को नहीं बचा पाएंगे
पहले खुद जेलेन्सकी गिड़गिड़ाए उसके बाद यूरोपीय यूनियन की प्रेसिडेंट उर्सला गिड़गिड़ाई एलोन भैया प्लीज हम तुम्हारे आगे हाथ जोड़ते हैं यूक्रेन में अपना स्टार लिंक फिर से चालू कर दो
और अब डेनमार्क की प्रधानमंत्री एलन मस्क के सामने हाथ जोड़कर निवेदन कर रही है कि अगर आपने यूक्रेन में स्टार लिंक फिर से चालू नहीं किया तो पूरा यूरोप को कोई बचा नहीं सकेगा
अब आप समझ गए होंगे की बार बाला नर्तकी नंदन का पुत्र क्यों एलन मस्क के समर्थन में खड़ा हो गया है
याद रखिएगा चाणक्य ने कहा था कि एक विदेशी महिला से पैदा हुआ औलाद कभी देशभक्त नहीं हो सकता वह हमेशा गद्दार ही रहेगा
‘आपके सवाल मुझे उकसाने के लिए होते हैं’, चीन का ‘पिछलग्गू’ बनने के सवाल पर जयशंकर का दोटूक जवाब
एक पत्रकार ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से पूछा कि छह साल पहले भारत की नीति रूस को भरोसा दिलाने की थी, लेकिन क्या अब रूस को भारत को भरोसा दिलाने की कोशिश करनी चाहिए? पत्रकार ने आगे सवाल किया कि क्या रूस चीन का पिछलग्गू बनता जा रहा है?
इस पर जयशंकर ने कहा, “देखिए, मेरे पेशे और आपके पेशे में फर्क यह है कि आपकी बातें मुझे उकसाने के इरादे से कही जाती हैं।”
"अमेरिका से सिर्फ भारत को परेशानी नहीं", ऐसा क्यों बोल पड़े एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "आप ऐसे पेश कर रहे हैं, जैसे अमेरिका के साथ समस्या सिर्फ भारत को है।"
उन्होंने आगे कहा,"अमेरिका ने अपनी रणनीतिक स्थिति में बदलाव किया है, जिसके बाद हर देशों को उसके साथ अपने संबंधों को फिर से कैलकुलेट करना पड़ रहा है।"
हर वो व्यक्तित्व जो भारत का प्रहरी है, पप्पू उसके खिलाफ है,
ट्रंप ने भारत को Dead Economy कहा,पप्पू ने तुरंत समर्थन किया
#ElonMusk ने भारत को नीचा दिखाते हुए अंबानी पर निशाना साधा,पप्पू ने तुरंत समर्थन किया
यही पप्पू #CaptainSmit की बहादुरी पर आज तक खामोश है,एक ट्वीट तक नहीं किया
इस बार इनकी तबियत से ' खातिरदारी ' होनी
चाहिए,,
इनकी तशरीफ में कुलबुला रहा अराजकता का कॉकरोच तसल्ली बख्श तरीके से शांत किया जाना चाहिए,,
हर महीने इनको धरना-प्रदर्शन का ' दस्त ' लग जाता है,,फिर गंदगी फैलाएंगे,,
#SayNoToCJP#DelhiWantsPeace