इतना प्यार लुटाया है तुमपे कि अब किसी और को देने के लिए कुछ बचा ही नहीं है
पर अब जो तुम बदल गए हो ये कोई वजह भी नहीं
जयो मुबारक हो तुम्हें ये तुम्हारी ये बिन मांगी आज़ादी
पर सच तो ये है ये आज भी मैं तुमसे एक बार पहली बार मिलना चाहता हूँ
कितने दिलों को तोड़ती है ये कमबख्त
फरवरी
यूं ही किसी ने इसके दिन नही घटाए..
Kambakhat kitne dilo ko todti hai February aise hi nhi kisi ne is ke Din ghataye hai