थालियाँ सजाते हैं यह अपने बच्चों के लिए। हम जैसों को फेंके जाते हैं सिर्फ़ टुकड़े।अपना tiffin खुद pack करके काम पे जाते हैं हम। किसी ने कुछ दिया नहीं है। जो है, वो है जो यह लोग हमसे ले नहीं सके। इनका बस चलता तो वो भी अपने ही बच्चों को दे देते। 🙏🏽
(Haryanvi poem)
'वें दिन आवैं याद मेरै।'
कवि - मंगत राम शास्त्री।
Poet - Mangat Ram Shastri.
Presented by
The Awakening Production
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@DrKumarVishwas कुमार भाई मैं आप का बहुत सम्मान करता हूं और करूगा. बस उम्मीद करता हूं आप रोड़ छाप भाषा का यूज नहीं करे. आप के कहे शब्दों को हम लोग पसंद करते है. वैसे वो एक सीएम है.. एक माननीय पद है.. आप की नाराजगी हो सकती है. होना भी चाहिए. लेकिन शब्दों का उच्चारण बीजेपी नेता की तरह मत करें.
बहुत ही दुखद है ये देश और समस्त विश्व इस समय बेहद मुश्किल दौर से गुज़र रहा है। मुझे ये वीडियो प्राप्त हुआ और बहुत कष्ट हुआ ये जानकर कि कैसे लोग लाचार हो रहे है। अगर ये वाक्या आपके साथ हो रहा होता तो आप क्या करते । बस वही करना है ।
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मन बड़ा ही पीड़ा में है ये देख कर की इंसान कितना आत्म केंद्रित है इसे केवल और केवल अपना मनोरंजन दिखाई देता है। ये मानसिकता कैसे सुधर सकती है नहीं जानता जयपुर में भी यही दृश्य रहा लोग कृतज्ञता का दीपक नहीं स्वार्थ के पटाखे लिए हुए घरों से बाहर थे। धन्य है ऐसी विलक्षण विभूतियां।🙏
ये तो हद्द है😳कहा क्या गया,हो क्या रहा है ? कब सुधरेंगें😡? मेरी कॉलोनी में लोग सड़क पर पटाखे फोड़ रहे हैं ! हम हर विपदा का प्रहसन क्यूँ बना देते हैं ?कोरोना योद्धाओं के लिए कृतज्ञता का दीपक हथेली पर लिए, बालकनी से पटाखे न चलाने के लिए पड़ोसियों पर चिल्लाता मैं अकेला क्यूँ हूँ ?