दोस्तों आप हमें एक बात कहें मशविरा दिजिए
आज से अगले महीने अक्टूबर लास्ट तक छुट्टी पर रहेंगे कम्पनी पैसा देगा मगर काम पर नहीं जाना होगा तो रुम में बैठ बैठ कर तंग हो जाएंगे यानी 35 से 38 दिन गुजारना है “ऐसे में हम किया करे जो फायदा हो टाइम बर्बाद ना हो” ट्वीटर रहा नहीं जो मेहनत करते बाकी सोशल मीडिया पर जाऊं या कोई दूसरा तीसरा ओप्शन बताओ घर भी नहीं जाना है...
नेपाल में बाढ़ के बाद थाईलैंड की स्थिति खराब हो चुकी है। पानी में तैरते सर्प और चीखती - पुकारते लोगो का जीवन बहुत दुखमय हो गया है।
विज्ञान आगे जा रहा है लेकिन प्रकृति का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।
बैंगकॉक लोग मौज मस्ती करने जाते थे लेकिन बैंगकॉक की गलिया और सड़के पानी से डूब चुकी है।
गाड़िया पानी में तैर रही है।
प्रकृति से टकराकर मानव खुद को सुविधा पहुंचाने के बजाय दुविधा में पड़ता जा रहा है जिसके कारण प्राकृतिक आपदा की घटनाएं बढ़ती जा रही है।
प्रकृति को छेड़ोगे तो प्रकृति आप को भी जरूर छेड़ेगी यही कारण है अब प्राकृतिक आपदा से कोई देश अछूता नहीं है।
NIHARIKA ERA BEGINS IN RF2
जिस तरह से पेड़ पौधों को काटा जा रहा है इससे आसमान बारिश का तांडव और बाढ की स्थिति..1/2
टमाटर फल है या सब्ज़ी???
सुप्रीम कोर्ट अमेरिका के पास काफ़ी टाइम है 😂😂😂
अपने देश के सुप्रीम कोर्ट ऐसे केस को रिजेक्ट कर बोल देंगे 😂
जिसको जो मानना है मानलो 😂
हमारा देश चुनौतीयो से नहीं ?? ऐसे चु...& से परेशान हैं।
"Kamakhya Railway station" पर लड़की को देखकर इस तरह की हरकतें करना बहोत ही शर्मनाक है।
देखिये इसकी हरकतें "आखिर कब सुधरेंगे ऐसे लोगा" ??
अगर विपक्ष ये सोच रहा है कि वो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेकर सिस्टम को सही कर सकते है तो ये उनकी गलत सोच है ,
ED , CBI , चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में ऐसी मानसिकता वाले लोग बैठे है जो निष्पक्ष संस्था होने के बावजूद भेदभाव करते है , ED का रिकॉर्ड तो सभी को पता है , पिछले कई सालो में ED ने हमेशा विपक्ष से जुड़े लोगो को निशाना बनाया है ,
चुनाव आयोग भी ऐसे ही करता है , जब भी कोई विपक्ष का नेता नियम तोड़ता है तो उस पर तुरंत कार्यवाही हो जाती है , लेकिन बात अगर भाजपा नेता पर आ जाये तो चुनाव आयोग कोई कार्यवाही नहीं करता है , हम देखते है क़ि चुनाव आने से पहले केंद्र सरकार और भाजपा सरकार अपनी भाजपा शासित सरकार में आम नागरिकों को पैसे अकाउंट में भेज कर प्रलोभन देता है , ताकि वोटर को भटकाया जा सके , लेकिन इस पर चुनाव आयोग खामोश रहता है ,
सुप्रीम कोर्ट में भी कुछ फैसले पक्षपाती रहते है , क्योंकि सिस्टम में निष्पक्षता की कमी है , सुप्रीम कोर्ट के अलावा हाईकोर्ट या देश की कई कोर्ट में आजकल ऐसे मामले सामने आ जाते है ,
हम एक उदाहरण देकर आपको समझाते है , उत्तरप्रदेश में रमजान माह के दौरान गंगा नदी पर चिकन बिरयानी खाने पर मुसलमानो के खिलाफ़ FIR हुई , कई दिनों तक उन्हें जेल में रखा गया और कई दिन जेल में रहने के बाद इन्हे जमानत मिली , इसके उलट हम देखते है कि इसके बाद सेम वैसा ही केस हुआ लेकिन इस केस में आरोपी दूसरे धर्म के थे , तो उन्हें तुरंत जमानत दे दी गयी ,
इसके अलावा कई मामले है , शरजील ईमाम , उमर खालिद , शाहरुख़ ये लोग कई सालो से जेल में बंद है लेकिन इसी तरह के अपराध करने वाले लोगो जल्दी जमानत मिल जाती है ऐसा क्यों ?
ये चुनाव आयोग का मामला नहीं है , ये ज्ञानेश कुमार का मामला नहीं है , ये सिस्टम में बैठे गलत लोगो की मानसिकता से जुड़ा है जिससे सिर्फ नुकसान आम आदमी का होता है और ये बदलना अब मुश्किल है ,