अंतर साफ़ है,
उन्नाव में दसवीं बारहवीं में टॉप करने वाले छात्रों को अखिलेश यादव जी ने लैपटॉप और साइकिल बांटी
अखिलेश यादव लैपटॉप बांट रहे है दूसरी तरफ़ नफ़रत बाँटी जा रही है,
निर्णय आपको करना है कि कौन आपने लिए सही है।
“ कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है
कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते ”
ओम प्रकाश राजभर एक रोती बिलखती माँ के सामने सामन्ती सोच के साथ बैठे हैं जबकि माँ न्याय की भीख माँग रही है…
उप्र में दिनदहाड़े लुटते ‘सुनारों की सुरक्षा’ की समस्या अभी सुलझी नहीं थी कि तब तक ‘सोनाबंदी’ का व्यापार-चौपट करनेवाला आह्वान आ गया और फिर ‘सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी ढाई गुना बढ़ाने का फ़रमान’।
ज़ेवरात-गहनों के व्यापार में बड़ी कंपनियों के आ जाने से ये छोटे सुनार वैसे ही कम्पटीशन नहीं कर पा रहे थे, अब उन्हें लग रहा है कि शायद बड़ी कंपनियों से एकमुश्त कमीशन लेने के चक्कर में ही भाजपाइयों ने युद्ध के बहाने, सोनाबंदी की बात करी है। भाजपाई जानते हैं कि एक साल में तो लाखों सुनार चौपट होकर अपना काम बंद कर देंगे, तब ये बड़ी कंपनियाँ हर छोटे-बड़े शहर में अपने शोरूम खोलकर मनमाने दाम पर गहने बेचकर जनता को लूटेंगी और भाजपा को अकूत धन कमाकर देंगी। आज भाजपाई नीतियों के मारे सुनार-स्वर्णकार समाज की इन समस्याओं को सुनकर लगा कि सबसे अधिक धन लगाकर व्यापार करनेवाले लोगों के चमचमाते शोरूमों और ज्वेलरी शॉप्स की चमक जब धूमिल हो गई है तो बाक़ी दूसरे काम-कारोबार का क्या। ये लोग कहाँ जाएंगे और कैसे अपने परिवारों को पालेंगे।
भाजपा सरकार की नीतियों ने देश की अर्थव्यवस्था को अनर्थ-व्यवस्था में बदल दिया है।आम लोगों के जीवन को संकट से भर दिया है।
सुनार कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
हरिद्वार में पिता स्वर्गीय प्रतीक यादव की अस्थियां विसर्जित करते रो पड़ी 7 वर्षीय बेटी पद्मजा,
यह ऐसी समय वह दृश्य होती है जो शब्दों में बयां नहीं की जा सकती,
विनम्र श्रद्धांजलि 😭🙏
रामपुर कोर्ट ने आजम खान साहब को हेट स्पीच मामले में दो साल की सजा सुनाई है।
जबकि वह और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम पहले से ही दो पैन कार्ड मामले में 7 साल की सजा काट रहे हैं,
समाजवादी पार्टी हर एक मामले पर नजर रखी हुई है आजम खान साहब के साथ अन्याय नहीं होने देंगे,
शिवपाल सिंह यादव की आंख में आंसू थे, धर्मेंद्र यादव बेचैन साफ दिख रहे थे, आदित्य यादव तो बच्चों की तरह रोने लगे ! डिम्पल यादव की तकलीफ़ उनके शांत और गुम हो गए चेहरे में दिख रही थी ,उनका सदमा दिखता था, अस्पताल के बाहर अखिलेश यादव ने अपने आंसू रोकने के लिए अपनी सारी शक्ति लगा दी, होंठो को दांतों से काटने लगे थे, बड़े नेता न होता तो खुले में रो पड़ते ! अर्जुन कभी सार्वजनिक मंच पर नही दिखे , मगर उनकी बेचैनी यह बताने के लिए काफी थी कि परिवार मातम कैसा है ! -
किसके लिए - चंद्रप्रकाश गुप्ता का एक बेटा ,जिनकी माता श्री साधना गुप्ता जी , 1987 में जिसका जन्म हुआ , जो 16 साल की आयु में अपनी मां के साथ उनके पति मुलायम सिंह यादव जी घर आया, वो सौतेला था (यही सच है) मगर परिवार ने कभी उसे यह एहसास नही कराया, यादव परिवार के हर घर के दरवाजे उसके लिए खुले थे, जब वो चला गया तो हर आंख नम हुई। हर चौखट से आह निकली।
महान है यादव परिवार ! - अगर यह परिवारवाद है ,तो ऐसा ही होना चाहिए! यादव परिवार भारत का आदर्श परिवार है ! राजनीति से अलग हटकर देंखे तो पता चलेगा कि यादव परिवार ने समाज की आंखों में बेइंतहा सम्मान अर्जित किया है।
प्रतीक भाई को श्रद्धांजलि , निसंदेह एक नेकदिल इंसान थे !
#prateekyadav
#प्रतीकयादव
ये लखनऊ के BBD यूनिवर्सिटी जैसे निकम्मे संस्थान का हाल है,
जिसमें छात्र एक-एक रोटी के लिए तरस रहे है,
यह घटना जहां पर स्वयं मुख्यमंत्री बैठते हैं उसी शहर की है,
सोचिए इस सरकार में छात्रों को किस तरह से प्रताड़ित किया जाता है कि जब उन्हें कीड़े मकोड़े वाला खाना दिया जाए और वो विरोध करें तो उन्हें यूनिवर्सिटी प्रशासन पीटता है,
आखिर छात्र भी तो इंसान ही है,
क्या छात्रों को सही खाना मिलन गुना हो जाएगा,
आखिर इस सरकार में इतनी मनमानी क्यों,