जिस प्रोटेस��ट को चंद्रशेखर रावण लीड कर रहा हो, उसकी विश्वसनीयता मेरी नज़र में एक परसेंट भी नहीं है।
जो बच्चे कल इन लोगों के बहकावे में आकर तोड़फोड़ किये और लाठी खाए, उनके लिये दुःख ही व्यक��त कर सकता हूँ।
दिल्ली को एक दिन की अराजकता में झोंकने के लिए प्रधान को गोद में छिपा लेने वाला प्रधान ही जिम्मेदार है।
Gente reminder:
People who wanted to peacefully protest against UGC guidelines, were denied permission despite applying for permission 2 months before.
No response from govt!!
Finally we had to go to Supreme Court to get a stay on the apartheid UGC guidelines against GC.
The govt that crushed the democratic rights of Unfortunate Category UC, and did not allow them a protest, has started crawling in front of cockroaches.
We all should store this back stabbing by @BJP4India in our Long Term Memory.
मानसिक विक्षिप्त (पागल) भरत तिवारी मारा गया!
एक फिल्म आई थी, रंग दे बसंती...अंतिम में फिल्म के किरदार क्यों हथियार उठाते हैं ये फिल्म उसका चित्रण था। सारे किरदार अंतिम में मार दिए जाते हैं। फिल्म काल्पनिक था, आज हालात उस फिल्म के जैसा ही है।
एक और फिल्म थी Wednesday जिसमें एक आम आदमी ने बम ब्लास्ट का बदला 4 आतंकियों को ��ार कर अपने तरीके से लिया था। फिल्म काल्पनिक था, हालात नहीं...
भरत भूषण तिवारी को आखिर हथियार क्यों उठाना पड़ा? इस सड़ चुके सिस्टम और समाज को ये जवाब तलाशना चाहिए...
किसी नेता या अधिकारी की बात का जवाबदेही नहीं है।
मुख्यमंत्री @samrat4bjp जी वैसे कानून में भी प्रावधान है कि मानसिक रूप से विक्षिप्त खून भी कर दे तो उस पर मुकदमा नहीं चल सकता है। ये लड़का मानसिक विक्षिप्त था, ��े आप अपने स्वयं के वक्तव्य में मान चुके हैं।
आपको ये बताना चाहिए कि यह एनकाउंटर एक मानसिक रूप से विक्षिप्त (पागल) का क्यों हुआ और तब जब उसने अपना हथियार फेंक दिया।
ये शायद सत्ता में बैठे समझदार लोग समझा पाएं।
समझदारों से भरे मेरे राज्य बिहार में ऐसे पागलों का जीना ठीक नहीं है! ऐसे पागलों को मार कर उदाहरण सेट करना आवश्यक है वरना कल कोई और सामने आ कर नेताओं या प्रशासन द्वारा किए गए वादों की जव���बदेही तय करने की बात कहेगा! बगल के गांव में जा कर निर्वासित लोगों की लड़ाई लड़ेगा...
तिवारी जी का तरीका (हाँथ में हथियार) गलत था, परंतु बिहार ये जान गया है कि इसका इरादा किसी को नुकसान पहुंचाना न था और ये उसके स्वयं के रेकॉर्ड किए वीडियो को देख और सुन कर साफ पता चल रहा है।
खैर तब भी हथियार उठाना या लहराना गलत है!
समझदारों से भरे हमारे राज्य ��ें इस पागल ने वीडियो रेकॉर्ड न किया होता तो हमें ये भी पता नहीं चलता कि इसने हथियार भी फेंक दिया था। सोशल मीडिया नहीं होता तो इस लड़के का ढेरों सामाजिक कार्य और उसके लिए सरकार या व्यवस्था (सिस्टम) से मांग नहीं दिखता।
बिहार में ऐसे करोड़ों मानसिक विक्षिप्त (पागल) घूम रहे हैं और फर्क सिर्फ इतना है कि धैर्य का बांध टूटा नहीं है। तिवारी जी का शायद टूट गया था...
मेरा बिहार पुलिस और सम्राट चौधरी से न��वेदन है
वर्षों बरस तक परीक्षा की तैयारी करने वाला युवा परीक्षा दे कर लौटता है तो बता दिया जाता है कि परीक्षा Leak कर गया...
नोटिफिकेशन की माँग कर रहे उन अभ्यर्थियों का एनकाउंटर से मुँह बंद कर देना चाहिए। लाठी नहीं गोली मार दीजिए!
चुनाव के लिए टेबल कुर्सी लगा कर अपने पैसों से वोट देने भेज सकते हैं, परीक्षा देने जाने वाले विद्यार्थियों के लिए ट्रेन नहीं चल सकता है। उत्तर बिहार के युवाओं का सेंटर दक्षिण बिहार...
पाटलिपुत्र स्टेशन पर पत्थरबाजी हुई। दोष सिर्फ युवाओं का है
हाँथ में डिग्री, शैक्षणिक योग्यता लिए मारे मारे फिर रहे, युवाओं का एनकाउंटर करवा दीजिए।
12 बच्चे (NEET छात्र) आत्महत्या कर चुके हैं! शिक्षा मंत्री जो है वो मुस्कुरा रहा है, इस्तीफा नहीं देगा।
सरकार के प्रत्येक ₹100 में से ₹40 या ₹50 खा जा रहे हैं। ये किसी काम का उदाहरण ले लीजिए। छात्रों के लिए बेंच- डेस्क या सड़क- ��ुल, शहरी कार्य या ग्रामीण कार्य का संगठित लुट है
लुट के नशे में ये बहरे लोगों को भरत तिवारी अपनी बात कहना चाहते थे। तरीका गलत था परंतु मंशा गलत नहीं था...
शायद कुछ लोगों को यह ठीक न लगे परंतु अपने हिस्से का "बम" तिवारी जी फोड़ कर गए हैं, बहरे अंग्रेजों को सुनाने के लिए एक बम तब कोर्टरूम के ऐसे हिस्से में फेंका गया था, जिससे किसी का नुकसान न हो लेकिन धमाका हो। हथियार ��हराने का मकसद भी आज के अंग्रेजों का Attension पाना ही था, परंतु
तिवारी जी मुझे निराशा के साथ कहना पड़ेगा कि आज के बहरे अंग्रेजों (शासन व प्रशासन) और समझदार जनता को आपका ये धमाका समझ में शायद न आए। ये ऐसा प्रदेश है जहां अब न सिर्फ प्रतिस्पर्धा मरी है बल्कि अब Aspiration भी मर गया है।
जिंदा रहने को लंबे समय पहले हमने अपना विकास एवं नसीब मान लिया है।। ऐसे में मेरे भाई
भरत भूषण तिवारी... तुम्हारा तरीका गलत था ��र प्रयास ये नहीं था कि किसी को नुकसान पहुँचे।
मेरी संवेदनाएं हैं। ॐ शांति 🙏 💐
The irony is that the U.S. and India are "Major Defense Partners," conduct joint military exercises and cooperate across the Indo-Pacific. Yet the U.S. Navy has launched missile strikes against commercial tankers in international waters and killed Indian merchant mariners.
The U.S. Navy had direct communications with the crews of the three foreign-flagged commercial tankers and was fully aware of their Indian nationality before launching the strikes that killed three crew members this week.
This echoes March, when the U.S. Navy torpedoed and sank, in India's backyard, an Iranian frigate returning in a non-combat configuration after largely expending its munitions during an India-hosted multilateral naval exercise in which the U.S. also participated.
And just as the U.S. Navy did not attempt to rescue the sailors from the sinking frigate, it likewise did not come to the aid of the surviving Indian crew members aboard the three tankers it struck. The rescue efforts were mounted instead by Omani authorities.
It is noteworthy that the vessels Washington labels part of a "shadow fleet" transporting crude oil are largely linked to China and Russia. Yet since the Trump-ordered naval blockade began on April 13 without any basis in international law, the U.S. military has not struck a single tanker actively bound for, or coming directly from, either China or Russia.
Striking such a vessel would transform a localized naval blockade into a direct geopolitical confrontation with Beijing or Moscow — a line the Trump administration has explicitly avoided crossing. Instead, it has employed kinetic force only against lower-profile vessels, including those carrying Indian crew members.
Taken together, these incidents are a sad commentary on the state of India's foreign policy under the present government.
अन्तर्राष्ट्रीय जल में तीन दिन में तीन जहाज़ों पर अमेरिकी हमलों में तीन भारतीयों की मृत्यु हो गई। और हमारे Compromised PM? एक शब्द तक नहीं।
जब कोई विदेशी ताकत किसी भारतीय की हत्या करे, तो प्रधानमंत्री को बोलना पड़ता है। लेकिन मजाल है जो ये एक शब्द बोल जाएं।
अगले हफ्ते G7 में, हमारे नाविकों की हत्या के बस चंद दिनों बाद, मोदी जी मुस्कुराएंगे, गले मिलेंगे और समझौते करेंगे - मगर, उन तीन भारतीयों के लिए उनके पास एक शब्द भी नहीं होगा।
Compromised PM भारत माता के बेटों की रक्षा नहीं कर सकते, क्योंकि जिन्होंने उन बेटों की जान ली उन���हें नाराज़ करने की इनमें न हिम्मत है, न ताकत।
पुराने लोग जानते हैं��
ब्राह्मण और जैन परंपरा के अनुसार जब भूमि पर भोजन करने बैठा जाता है तो खाने वाला अपनी थाली के चारों ओर जल छिड़क कर कुछ अन्न भूमि पर थाली के चारों ओर डाल देता है।
इसका कारण ये होता है कि भूमि पर रहने वाले कीड़े मकोड़े अगर थाली के पास आयें तो थाली के पहले बाहर पड़े दाना पानी को देख उसी में व्यस्त हो जायें, थाली के अंदर न घुसें।
कल मैंने एक दो न्यूज़ चैनल पर सीबीएसई के बारे में कार्यक्रम देखे।
मु���े समझ आया कि सारा दोष NTA और शिक्षा विभाग के अफसरों पर थोपने का प्रयत्�� मीडिया एंकर कर रहे थे।
मोदी को छोड़ो धर्मेन्द्र प्रधान तक पर उंगली उठाने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहे थे।
मुझे इसीलिये ये थाली के बाहर अन्न जल छिड़कने की बात याद आई।
ये एंकर आम लोगों को अफसर और NTA में उलझा देंगे।
थाली के अंदर असली माल है जहां प्रधान और प्रधान आलिंगन बद्ध बैठे हैं।
उन्हीं को बचाने का प्रयास।
और कीड़े मकोड़े के उदाहरण से बुरा न मानें।
आम जनता कीड़ा मकोड़ा ही है।
मेरे भैया काफ़ी समय से प्रोफेसर बनने का सपना लिए हुए थे और जब उनके इंटरव्यू के नंबर आए तो पता उन्हें 1 नंबर कम देकर बाहर कर दिया गया।
जिस ऑफिस में एक कमिश्नर के अंडर वो काम कर रहे थे उस वक्त उनकी पत्नी प्रोफेसर बन गई ,उसी सब्जेक्ट में ।बहुत अच्छे नंबर आए थे मैडम के इंटरव्यू में।
बिहार के मुख्य सचिव की पत्नी ए एन कॉलेज तो रिटायर्ड जज की पत्नी होगी काॅमर्स कॉल��ज की प्रिंसिपल!
आखिर बिहार की बदहाली और बर्बाद हो रही शिक्षा व्यवस्था कौन रोकेगा?
पटना AN कॉलेज की प्रिंसिपल होगीं बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की पत्नी रत्ना अमृत तो कॉलेज ऑफ कॉमर्स की प्रिसिपल होगीं रिटायर्ड जज साहब की पत्नी!, एक पत्रकार की पत्नी को बनाया गया प्रोफेसर, एक मंत्री बना प्रोफेसर, एक MLC की पत्नी बनी प्रोफेसर।
गजब बिहार में खेल हो रहा है। उच्चतर शिक्षा में कौन सा खेल हो रहा है!समझ से परे कहीं बीबी,बेटा - बेटी ,परिवार को सेट करने के चक्कर में बिहार की विनाश की कहानी तो नहीं लिखी जा रही है!
सच में ऐसा हो रहा है या नहीं यह तो बिहार सरकार या मुख्यमंत्री ही बता सकते हैं! मै ऐसा नहीं कहता कि इन नियुक्तियों में कोई गड़बड़ी हुई है!नहीं मेरा उद्देश्य है किसी को बदनाम करना! मगर बाहर संदेश क्या जा रहा है!सोचना और समझन��� बिहार हित के साथ -साथ सत्ता और शासन/प्रशासन की कुर्सी पर बैठे लोगों की हित में होगा!
बोर्ड ,आयोग की नियुक्ति के साथ साथ असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली के सहारे समझा जा सकता है!कैसे विभिन्न आयोग व अन्य विभाग में राजनेता और आई ए एस की पत्नी ,बाल बच्चे को सेट किया गया,वह बड़ा ही दिलचस्प नजारा था !मजा तो तब आया जब विधान पार्षद संजय गांधी की पत्नी की पिछड़े वर्ग की कोटा से मगध विश्व विद्यालय के अंतर्गत आने वाले एस एस कॉलेज जहानाबाद में असिटेंट प्रोफेसर के पद पर बहाली हुई!संजय गांधी की पत्नी का जन्म तिथि 1966 की है यानी पांच साल में रिटायर्ड हो जाएगी!संजय गांधी खुद विधान पार्षद,बेटा भी असिस्टेंट प्रोफेसर है और अब पत्नी भी असिस्टेंट प्रोफेसर हो गई!मंत्री अशोक चौधरी की भी असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली होना तो बिहार के दिलचस्प नजारे का ही दीदार कराता है!बेटी शाम्भवी चौधरी समस्तीपुर से सांसद और खुद बिहार में मंत्री है!हद तो तब हो गई ,जब संजय गांधी के पत्नी को तो उच्चतर शिक्षा विभाग में पदस्थापित कर दिया गया ! अब आमलोग के लिए कहां जगह बचेगा क्या ये लोग बतायेगें!
इसी बीच बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की पत्नी को ए एन कॉलेज की प्रिंसिपल बनाया गया तो झारखंड के रिटायर्ड जज की पत्नी को कॉलेज ऑफ कॉमर्स की प्रिंसिपल होगीं!
बताया जाता है कि प्रोफेसर रत्ना अमृत को एन एन कॉलेज पटन��� ,प्रो रेखा रानी को अरविंद महिला कॉलेज पटना,प्रो सुनीत राय को कॉलेज ऑफ कॉमर्स पटना,प्रो विजय लक्ष्मी को एम एम कॉलेज विक्रम,प्रो श्यामा राय को गंगा देवी महाविद्यालय पटना और प्रो दिवाकर प्रसाद को बी डी कॉलेज पटना का प्रिंसिपल बनाया गया है!
देखना ��िलचस्प होगा कि आखिर अनुभव का कितना ख्याल रखा गया है!
कुल मिलाकर बिहार की स्थिति तो ऐसी ही दिख रही है कि अब बिहार में आम जनता के लिए कोई जगह नहीं बची है!बेहद चिंता करने वाली विषय है कि आखिर बिहार के आमलोगों का क्या होगा? जिसके पास सत्ता की कुर्सी होगी ,पवार होगा ,उसी का बेटा - बेटी परिवार सेट होगा!
बाकी अगड़ा - पिछड़ा ,हिंदू ,मुसलमान,दलित का जाप जपते रहो !वोट मारते रहो !नेता को माला पहनाकर जयकार लगाते रहो!अपने बच्चों को भविष्य को अंधकार में धकेलते रहो!मजदूर बनने के लिए पलायन करते रहो !खून सुखा कर टैक्स तुम दो, राज कुर्सी वाला भोगेगा!शायद बिहार की यही किस्मत में है!
अगर ऐसा नहीं रिशु श्री प्रकरण से लेकर विधायक - सांसद के टिकट देने और बोर्ड,आयोग से लेकर असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के साथ साथ प्रिंसिपल की नियुक्ति को किस नजरिए से देखा जाये!
अब बिहार का मालिक भगवान ही हैं! कभी शिक्षा के लिए दुनिया में अपनी परचम लहराने वाला बिहार की वर्तमान में ब��्बाद शिक्षा व्यवस्था को क्या ऐसी स्थिति में बेहतर बनाया जा सकता है!कहा जाता है कि बेहतर शिक्षा से राष्ट्र और समाज को सशक्त और बेहतर बनाया जा सकता है!प्रश्न है कि क्या। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और उसकी गुणवत्ता के सहारे बिहार और बिहारी को सशक्त बनाया जा सकता है,बेहतरी की उम्मीद की जा सकती है!बिहारियों के अच्छे दिन नसीब होंगे?
क्या इसका जवाब बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी नहीं देना चाहिए! ��खिर आम जनता के लिए कहां जगह है,मुख्यमंत्री जी बताइए तो?
copied from- We support Lalu yadav from FB
जिन्होंने स्वयं विवाह ना किया हो, अपना परिवार ना हो, समाज को जातियों में बाँटने को राजनैतिक स्ट्रेटेजी बताते हों, हिंदुओं का ठेका लेने से बचते हों, वो सब जब कहें कि हिंदुओं के बचाने के लिए 4 बच्चे पैदा करो, तो चिल कीजिए।
जिन्होंने बच्चे पैदा किए हैं, जो हिंदुओं के लिए लड़ रहे हों, जो केवल कथोपकथन ने देते हों, यदि वो ऐसा कुछ कहें तो उस पर विचार कीजिए।
बागेश्वर बाबा ने जो कहा है, उनको '4 बच्चे पैदा करो' तक रुकना चाहिए था। RSS अब उस योग्य नहीं रही कि बच्चे उनके लिए पैदा किए जाएँ क्योंकि उनके नेता सत्ता सुख देख कर, बालासाहेब देवरस की कुटिया और खटिया से उतर कर मेमोरी फोम के मास्टर बेडरूम विथ अटैच्ड बाथरूम एंड सौना का आनंद ले रहे हैं।
आग अगर कम हो तो हवाएं उसे बुझा देती हैं, लेकिन अगर आग जंगल की हो तो हवाएं उसे और भड़का देती हैं। समस्या का दमन समस्या का निवारण नहीं होता है।
GC activists पाकिस्तानी हैं, GC activists मुल्ले हैं, GC activists सोरोस agent हैं, GC activists कांग्रेस के दल्ले हैं, आपक��� यह सब बोल देने से वो गलत नहीं हो जाएंगे। GC activists में ऐसे कई लोग हैं जो खुद सबको यही टैग देते आएं हैं। आप यह बताइए न कि उनके प्रश्न गलत कैसे हैं?
5000 साल के शोषण के नाम पर सवर्णों का शोषण आखिर क्यों हो रहा है? SC/ST एक्ट, जाति के आधार पर आरक्षण, जाति के आधार पर फीस, जाति के आधार पर स्कॉलरशिप, क्या यह जातिगत भेदभाव में नहीं आता?
हमें आपके अंबेडकर या फुले प्रेम से कोई दिक्कत नहीं है आप एक माला ले लीजिए और दिन भर उनका नाम जप करिए, उनके एक नहीं हजारों मंदिर बनवाइए लेकिन ये सब अपने पैसे से करिए, हमारे टैक्स के पैसे बर्बाद मत करिए। आपको मूर्ति बनवानी है आप अपनी पार्टी फंड से बनवाइए।
फ्रीबीज के नाम पर केजरीवाल को गाली पड़ी, भाजपा के प्रवक्ता टीवी पर बैठ कर बताते थे कि कैसे फ्रीबीज इकोनॉमी के लिए खतरा हैं, और आज सभी राज्यों में सबसे अधिक फ्रीबीज की घोषणा आपकी पार्टी ही कर रही है? इसका उत्तर क्यों नहीं दे रहे आप?
सारण में एक राजपूत नाबालिग बच्ची का रेप हुआ, उसे कुएं में फेंक दिया गया किसी नेता के मुंह से एक चूं तक न निकली, केस को फर्जी बताया गया, और खबर दबा दी गई!
साक्षी महराज जैसे लोग ब्राह्मणों को अपशब्द बोलते हैं, चंद्रशेखर जैसे लोग धमकी देते हैं क्या यह जातिगत अपराध नहीं है? कोई भी नेता, कोई भी अधिकारी पब्लिक में खड़ा होकर कहता है कि उसे ब्राह्मणों की बेटियां चाहिए, RJD की प्रवक्ता बोलती हैं कि सवर्णों के साथ अपराध होना चाहिए क्योंकि वो डिजर्व करते हैं। इसपर आपका मुंह क्यों नहीं खुलता?
कोई भी पिद्दी खड़ा होता है और बोल देता है कि ये सब सोरोस एजेंट हैं इन्हें फॉरेन फंडिंग आ रही है। अबे कैसी नकारा सरकार है तुम्हारी जो 15 साल से शासन में हैं और अब तक फॉरेन फंडिंग नहीं रोक पाई! किसकी जिम्मेदारी है ये?
आपको लगता है कि हम सड़क जाम नहीं करते, हम ट्रेन नहीं रोकते, हम बस नहीं जलाते तो हमारे अधिकारों को छीन लेंगे आप? भूल है ये आपकी? हिंदू एकता के नाम पर अपनी बलि नहीं चढ़ने देंगे हम!!
और अंत में @old_cricketer जी का यह ट्वीट!
Just one tweet for your loved ones,
Tag @fssaiindia and use hashtag #SudharJaoFSSAI , maybe then those in power will hear that we all stand united on this issue.
Received via WA but makes sense 👇
मेरे आदरणीय,
कृपया आपसे निवेदन है…
“मार्च 2027” तक भारत की जनगणना पूरी होने जा रही है। जनगणना अधिकारी शीघ्र ही आपसे जानकारी एकत्र करने के लिए मिलेंगे।
आपसे जब आपकी मातृभाषा पूछी जाएगी और उसके बाद जब आपसे यह पूछा जाएगा कि आप कौन-कौन सी भाषाएँ जान��े हैं, तो कृपया “संस्कृतम्” को भी उन भाषाओं में अवश्य शामिल करें जिन्हें आप जानते हैं। यद्यपि हम सभी संस्कृतम् बोल नहीं पाते, फिर भी हम प्रतिदिन अपनी प्रार्थना, जप, श्लोक तथा सभी धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ में इसका उपयोग करते हैं।
पिछली जनगणना के अनुसार पूरे देश में संस्कृत बोलने वालों की संख्या मात्र हजारों में थी, जबकि अरबी और फ़ारसी बोलने वालों की संख्या बहुत अधिक है। उन भाषाओं के व��कास के लिए उन्हें वित्तीय सहायता भी मिलती है। यदि संस्कृतम् को “लुप्तप्राय” भाषा घोषित कर दिया गया, तो हमारे प्राचीन धर्मग्रंथ, वेद, पुराण आदि का प्रकाशन बंद हो सकता है। हम अपनी जड़ों से कटते जाएंगे और अंततः पूजा-अर्चना का अर्थ केवल DJ बजाने तक सीमित हो जाएगा।
देवभाषा संस्कृतम् भारत की सबसे प्राचीन और सुंदर भाषा है। यह सभी भाषाओं की जननी है। इस भाषा को जीवित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि संस्कृत को “लुप्त” भाषा घोषित कर दिया गया, तो इसके विकास और विस्तार के लिए कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी। संभव है कि हम संस्कृत को हमेशा के लिए खो दें।
केवल हमारी जागरूकता और प्रयास ही संस्कृत को जीवित रख सकते हैं। अभी भी देर नहीं हुई है। कृपया संस्कृत सीखने के साथ-साथ यह छोटा-सा प्रयास अवश्य करें।
यदि आपको यह उचित लग��, तो कृपया इस संदेश को अपने सभी परिचितों तक अवश्य पहुँचाएँ।
My irctc id is disabled. I tried multiple time raising concerns through E -Query but no positive results. Although i am logging in through registered email. My aadhaar is linked with that ID . Hence please activate it @IRCTCofficial@irctcnorthzone@RailwaySeva
स्पष्ट लिखिए। भगत सिंह की फाँसी और शव के निर्मम अपमान के विरोध में कानपुर में दुकानें बंद कराई जा रही थी। मुसलमान दुकानदारों ने स्वयं को इस आंदोलन से अलग कर���े हुए दंगे शुरू कर दिया। गणेश शंकर विद्यार्थी कुछ मुस्लिम व्यक्तियों को दंगों से बचा कर वापस मुस्लिम बहुल क्षेत्र में छोड़ने गए थे जहाँ मुसलमानों ने घेर के उनकी निर्मम हत्या कर दी। उनका बुरी तरह विकृत शरीर कई दिन बाद उस इलाक़े से मिला था।