देश की राष्ट्रपति दिल्ली में,
देश के प्रधानमंत्री दिल्ली में,
देश के विपक्ष के सबसे बड़े नेता दिल्ली में,
देश का सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली म���ं,
देश के मुख्य न्यायाधीश दिल्ली में,
देश का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का मुख्यालय दिल्ली में।
फिर भी इसी दिल्ली में DTC के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी 9 दिनों से हड़ताल पर हैं। उनकी आवाज़ आखिर किस तक पहुँच रही है?
₹862 प्रतिदिन में क्या कोई कर्मचारी अपने परिवार का सम्मानजनक ज���वन चला सकता है?
राशन, किराया, बच्चों की पढ़ाई, बिजली-पानी और इलाज-क्या इतने कम पारिश्रमिक में इन बुनियादी जरूरतों को पूरा करना संभव है? और वो भी दिल्ली जैसे महानगर में...???
सवाल सिर्फ DTC के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का नहीं, बल्कि उनके परिवारों के सम्मानजनक जीवन का है।
क्या ये बड़े लोग इस मामले पर स्वतः संज्ञान नहीं ले सकते हैं ??
हड़ताल का समाधान टकराव से नहीं, संवाद से निकले।
कर्मचारियों की बात सुनी जाए, उनकी समस्याओं पर संवेदनशीलता से विचार हो और बातचीत के माध्यम से उचित समाधान निकाला जाए।
दिल्ली की सड़कों को चलाने वाले इन कर्मचारियों की आवाज़ भी सुनी जानी चाहिए।
@India_NHRC @dtc_union @dtchq_delhi @CMODelhi @gupta_rekha @drpankajbjp @BJP4Delhi @PMOIndia @narendramodi @RahulGandhi @priyankagandhi @INCIndia @INCDelhi
परम आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी,
सादर नमस्कार,
DTC के हजारों contractual drivers की हड़ताल केवल वेतन का विषय नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन, श्रम की गरिमा और सामाजिक न्याय का विषय है।DTC बस चालक अत्यंत जिम्मेदारी और कौशल का कार्य करते हैं-भारी वाहन चलाना, हजारों यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेना और दिल्ली के अत्यधिक व्यस्त याताया��� में प्रतिदिन सेवा देना साधारण कार्य नहीं है इसलिए Driver को skilled labour के रू�� में सम्मानजनक एवं न्यायसंगत वेतन मिलना ही चाहिए।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 समानता, अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर, अनुच्छेद 21 गरिमापूर्ण जीवन तथा अनुच्छेद 39(d) समान कार्य के लिए समान वेतन की संवैधानिक भावना को मजबूत करता है।
माननीय Supreme Court ने State of Punjab & Ors. v. Jagjit Singh & Ors. (2016) में समान कार्य करने वाले temporary/daily-wage/contractual कर्मचारियों के लिए “Equal Pay for Equal Work” के सिद्धांत पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया है��
इसके अतिरिक्त Code on Wages, 2019 में minimum wages निर्धारित करते समय workers की skill, unskilled, semi-skilled, skilled औरhighly-skilled को ध्यान में रखने का स्पष्ट प्रावधान है।
ऐसे में DTC जैसे महत्वपूर्ण public transport system को चलाने वाले skilled drivers को वर्षों तक अत्यंत कम remuneration पर रखना गंभीरता से विचार करने का विषय है।
इसलिए आपसे निवेदन है कि माननीय दिल्ली परिवहन मंत्री जी को निर्देश दें कि दिल्ली सरकार और DTC contractual drivers के प्रतिनिधियों के बीच तत्काल सार्थक वार्ता कराई जाए तथा वेतन, medical सुविधा, social security, leave, bonus, accident-related deductions और job security जैसे मुद्दों का न्यायसंगत समाधान निकाला जाए।
ड्राइवर केवल बस नहीं चलाता, वह हजारों यात्रियों की जान और दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालता है। उसके कौशल और जिम्म���दारी के अनुरूप सम्मानजनक वेतन मिलना चाहिए।
@narendramodi कृपया इस विषय में व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर समाधान सुनिश्चित करें।
@PMOIndia @AmitShahOffice @BJP4Delhi @BJP4India @CMODelhi @gupta_rekha @drpankajbjp
लेकिन सर, दुर्भाग्यपूर्ण है कि आप और आपकी सरकार दिल्ली के अतिथि शिक्षकों की समस्याओं को लगभग भूल ही गई है। पिछले लगभग 9 वर्षों से दिल्ली के गेस्ट टीचर्स के पारिश्रमिक में कोई वृद्धि नहीं हुई है।
यह अत्यंत विडंबनापूर्ण स्थिति है कि देश की राजधानी दिल्ली में बच्चों को शिक्षित करने वाले शिक्षक आज भी दिहाड़ी के आधार पर काम करने को मजबूर हैं। जिन शिक्षकों के कंधों पर दिल्ली के भविष्य की नींव मजबूत करने की जिम्मेदारी है, उनके भविष्य और आर्थिक सुरक्षा को ही अनिश्चित छोड़ दिया गया है।
सर, आप दिल्ली के प्रशासक हैं और आपके लिए महंगाई भत्ते (DA) सहित विभिन्न सुविधाओं एवं भत्तों का प्रावधान है�� दूसरी ओर, दिल्ली के अतिथि शिक्षक वर्षों से पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपनी सेवाएं देने के बावजूद DA जैसी मूलभूत आर्थिक राहत से भी वंचित हैं। आखिर यह कैसा न्याय है?
क्या शिक्षक केवल तब महत्वपूर्ण हैं, जब उनसे परीक्षा परिणाम, शिक्षा की गुणवत्ता और स्कूलों की व्यवस्था सुधारने की अपेक्षा की जाती है? यदि वे दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा हैं, तो उनके सम्मान, पारिश्रमिक और आर्थिक अधिकारों की जिम्मेदारी भी सरकार की ही होनी चाहिए।
यदि वास्तव में आपके मन में दिल्ली क��� शिक्षकों के प्रति सम्मान और उनके भविष्य के लिए संवेदना है, तो दिल्ली के हजारों अतिथि शिक्षकों के लिए ठोस और तत्काल कदम उठाइए। उनके पारिश्रमिक में समयानुकूल वृद्धि कीजिए, महंगाई के अनुरूप DA अथवा समकक्ष राहत का प्रावधान कीजिए और उनके रोजगार को अधिक सुरक्षित एवं सम्मानजनक बनाने की दिशा में ठोस नीति बनाइए।
शिक्षक को सम्मान देने की शुरुआत केवल सम्मान समारोहों से नहीं, बल्कि उसके श्रम का उचि��� मूल्य देने से होती है।
दिल्ली के अतिथि शिक्षक वर्षों से अपने अधिकार और सम्मान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब समय है कि सरकार उनकी आवाज सुने और उन्हें केवल“गेस्ट” ��हीं, बल्कि दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में सम्मान दे।
सादर,
Girdhar Singh Bisht
_दस साल से शिक्षकों का वेतन नहीं बढ़ा, लेकिन सरकारों के वादों की ऊँचाई लगातार बढ़ती रही!_
*दिल्ली के गेस्ट टीचर्स को फ��ीचर बनाए रखने के इस महान योगदान के लिए दिल्ली के अलोकप्रिय सरकारों का बहुत-बहुत धन्यवाद! 🙏
@LtGovDelhi @narendramodi
@msisodia @gupta_rekha @ashishsood_bjp