@SajjanarVC_IPS@Cyberdost@cyberabadpolice
What kind of help is this. All input are available and city police is waiting for online call. Very ridiculous and heartless reply. Only fantom policing.
@hydcitypolice Visiting card and payment receipt are at your end then you should dial his number and ask him to return money to concerning one. Pls take action against such fraud.
@hydcitypolice pls help. A wrong payment has been done by a businessman from bharatpur Rajasthan. Now recipient is not attending calls. Pls find enclosed.
@JATbera1 खींचों न कमानों को, न तलवार निकालो। जब तोप हो मुक़ाबिल तो अखबार निकालो। कदे पढ़ भी लिया कर भाया। @arvindchotia के नाखून बराबर भी ज्ञान ले लो तो तर जाओगे भव सागर से। शेष जय जय ...
दिक्कत ये है कि ढ़ाणी से निकला हुआ लड़का जिसको नेता सीधे मिलने बुला लेता है और इनको बीच में चौथ्ये की जरूरत पड़ती है।
दिक्कत यह है कि हमारे बीच ट्विटर चलाते-चलाते फर्स्ट ग्रेड कैसे बन गया, हम आज भी किसी और का सहारा ढूंढ रहे हैं और इससे चरित्र प्रमाण पत्र पर साइन करवा रहे हैं।
दिक्कत यह है कि इसको लोग इतना क्यों पढ़ते हैं बल्कि अखबार को आजकल लोग सिर्फ गाड़ी साफ करने के काम में ले रहे हैं।
दिक्कत यह है कि कोई भी युवा नेता जब हम जाते हैं तो सम्मान में खड़ा हो जाता है और इनको खड़ा कराकर इंतजार करवाता है।
My lord दिक्कत यह है कि यह भंडारा और ट्रेंड इतने आसान तरीके से कैसे चला लेते हैं बल्कि हमारे तो हजार हथकंडे भी फ्लॉप हो जाते हैं।
My lord अर्थात मेरे भगवान यह इनका दर्द कभी खत्म क्यों नहीं होता।
क्योंकि अपना तो एक ही फंडा है सबका साथ सबका विकास और इनका एक टांग छोड़ी दूसरी पकड़ी🤞👍
खैर कभी भी बळता ठूंठ मुंह से नहीं पकड़ना चाहिए 🙌
राजस्थान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🎉
विधायकों का स्टिंग करने वाले @DainikBhaskar के पत्रकार @avadheshjpr के बारे में 01.10.24 को RMC रजिस्ट्रार डॉ राजेश शर्मा ने सार्वजनिक रूप से वीडियो पर कहा कि इस पत्रकार ने मुझसे 10 लाख रुपये यह कहते हुए माँगे कि ख़बर करने के चक्कर में मेरे 3-4 लाख रुपये तो खर्च ही हो गए…
02.10.24 को पत्रकार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मैंने डॉ के साथ किए गए स्टिंग का वीडियो ACB को दे दिया है, एकाध दिन में मामला दर्ज हो जाएगा…
सत्यता यह है कि-
1. ACB ने एक साल में भी FIR दर्ज नहीं हुई है…
2. इस पत्रकार ने मामला दर्ज कराने के लिए ACB को कभी application नहीं दी और एसीबी के अनुसार कोई वीडियो भी नहीं मिला…
3. अखबार और पत्रकार ने न तो कभी अखबार में बताया और न ही कभी सोशल मीडिया पर बताया कि अंतिम रूप से क्या डील हुई और अंतिम परिणाम क्या रहा ?
एक बड़ा सवाल यह भी है कि MLA को दी गई 10 लाख की अवैध नकद रिश्वत राशि पत्रकार को किसने दी क्योंकि जनता में चर्चा है कि किसी नेता ने यह cash दिया…
दोषी MLA को सज़ा मिले लेकिन 52 अन्य MLA को भी सज़ा मिले, पूर्व में किए गए डॉ वाले स्टिंग में क्या खेल हुआ ? यह भी जनता को पता चले और CBI जाँच हो…
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ऐसी रिपोर्ट पेश की है जिससे अरावली का दायरा सिमट गया है। अरावली राजस्थान का केवल पर्वत नहीं, हमारा 'रक्षा कवच' है। केंद्र सरकार की सिफारिश पर इसे '100 मीटर' के दायरे में समेटना, प्रदेश की 90% अरावली के 'मृत्यु प्रमाण पत्र' पर हस्ताक्षर करने जैसा है।
सबसे भयावह तथ्य यह है कि राजस्थान की 90% अरावली पहाड़ियाँ 100 मीटर से कम हैं। यदि इन्हें परिभाषा से बाहर कर दिया गया, तो यह केवल नाम बदलना नहीं है, बल्कि कानूनी कवच हटाना है। इसका सीधा मतलब है कि इन क्षेत्रों में अब वन संरक्षण अधिनियम लागू नहीं होगा और खनन बेरोकटोक हो सकेगा।
पहाड़ की परिभाषा उसकी ऊँचाई से नहीं, बल्कि उसकी भूगर्भीय संरचना (Geological Structure) से होती है। एक छोटी चट्टान भी उसी टेक्टोनिक प्लेट और पर्वतमाला का हिस्सा है जो एक ऊंची चोटी है। इसे अलग करना वैज्ञानिक रूप से तर्कहीन है।
अरावली थार रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकने वाली दीवार है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि 10 से 30 मीटर ऊंची छोटी पहाड़ियां (रिज) भी धूल भरी आंधियों को रोकने में उतनी ही कारगर होती हैं। इन छोटी पहाड़ियों को खनन के लिए खोल देने का मतलब दिल्ली और पूर्वी राजस्थान तक रेगिस्तान को खुद निमंत्रण देना है।
अरावली की चट्टानी संरचना बारिश के पानी को रोकती है और उसे जमीन के भीतर भेजती है। ये पहाड़ियाँ पूरे क्षेत्र में भूजल रिचार्ज का काम करती हैं। इन्हें हटाने का मतलब पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहे उत्तर-पश्चिम भारत में सूखे को निमंत्रण देना है।
अरावली वह दीवार है जो पश्चिम से आने वाली जानलेवा 'लू' (Heat Wave) और थार रेगिस्तान को पूर्वी राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानों में घुसने से रोकती है।
यह फैसला पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि खनन माफियाओं के लिए 'रेड कार्पेट' है। थार के रेगिस्तान को दिल्ली तक जाने का निमंत्रण देकर सरकार आने वाली पीढ़ियों के साथ जो अन्याय कर रही है, उसे इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।
विडंबना ये है कि सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई इसलिए शुरू हुई थी ताकि अरावली को स्पष्ट रूप से पहचाना और बचाया जा सके। लेकिन केंद्र सरकार की जिस सिफारिश को कोर्ट ने माना, उसने अरावली के 90% हिस्से को ही तकनीकी रूप से 'गायब' कर दिया।
मैं सुप्रीम कोर्ट से आग्रह करता हूं कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को देखते हुए अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करे। यह फैसला सीधा विनाश को निमंत्रण देने वाला है।
#SaveAravalli
मोदीजी के चाइना वाले बयान "न कोई घुसा है और न कोई कब्जा किया है" की तर्ज पर बयान दे रही हैं MLA साहिबा 🤣
वैसे इनके संघी सजनवा ऋषि बंसल सामने नहीं आए मीडिया के!
"ना मैंने पैसा लिया, ना कोई लेटर दिया फिर भी मेरे खिलाफ ये साजिश की गई। मैं भास्कर अखबार को कहना चाहती हूं कि या तो खबर का खंडन छापें नहीं फिर मैं कोर्ट में मानहानि का दावा पेश करूंगी"।
-ऋतु बनावत, निर्दलीय विधायक, बयाना
इन बातों का कोई अर्थ है भाई साहब?
क्या इस तरह के राजनीतिक टाइप तंज एक अध्ययनशील पत्रकार के हैंडल से अपेक्षित हो सकते हैं?
क्या एक बार किसी व्यवस्था की कमर किसी प्रहार से टूट जाए तो कोई नई व्यवस्था खड़ी नहीं हो सकती?
आतंकवाद और उसके खिलाफ युद्ध एक सतत् प्रक्रिया है। जब तक आतंकवादी सोच कहीं भी जीवित रहेगी, विभिन्न तरीकों से सिर उठाती ही रहेगी।
आज मुझे आपकी यह टिप्पणी देखकर दुख भरी हैरानी हुई।
आप एक जिम्मेदार नागरिक भी हैं। इसलिए हैरानी होना स्वाभाविक भी है।
कोई खर्च नहीं, वकील की आवश्यकता नहीं वाले पंपलेट पर भीलवाड़़ा बार एसोसियेशन के एडवोकेट रामपाल शर्मा ने सुनाई खरी खरी
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एक देशद्रोही लैब ने टेस्टिंग में बाबा रामदेव के पतंजलि के घी को फेल कर दिया ,बोला कि खाने लायक नहीं है , बाबाजी के ऊपर 1 लाख 42 हजार का जुर्माना लगाया गया है,
लैब के मालिक को और लैब टेस्ट करने वाले को देशद्रोही घोषित किया जाए ,ये लोग बाबाजी के देश निर्माण के कार्य में बाधा डाल रहे हैं।