सनातन धर्म?शास्त्रों में सनातन धर्म की जो परिभाषा हैऔर हम जो मानते हैं,अनुशीलन योग्य है।अद्रोह:सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।अनुग्रहश्च दानं च सतां धर्म: सनातन:।महाभारतशान्तिपर्व।मन, वाणी, कर्म द्वारा समस्त प्राणियोंके प्रति कभी द्रोह न करना व दया दानादि कर्म सनातन धर्म है।
अपने द्वारा किया गया पाप ही अपने को मैला करता है ।स्वयं पाप न करे तो आदमी अपने आप ही विशुद्ध बना रहे ।शुद्धि अशुद्धि तो प्रत्येक मनुष्य की अपनी-अपनी ही है (अपने अपने ही अच्छे बुरे कर्मों के परिणाम स्वरूप हैं)।कोई दूसरा भला किसी दूसरे को कैसे शुद्ध अशुद्ध कर सकता है?
अत्तना हि कतं पापं अत्तना सन्किलिस्सति।अत्तना अकतं पापं अत्तनाव विसुज्झति।सुद्धी असुद्धि पच्चत्तं,नान्यो अन्यं विसोधये। स्वयं द्वारा किया गया पाप ही स्वयं को मैला करता है।स्वयं पाप न करे तो वह विशुद्ध बना रहता है।शुद्धि अशुद्धि तो प्रत्येक मनुष्य की अपनी-अपनी ही है।
हम ही अपने कर्म से होते शुद्ध अशुद्ध।
अन्य कौन शोधन करे देव ब्रह्म या बुद्ध।
अपने दूषित कर्म ही लाते दुख पैगाम।
क्यों बेचारे देव को करे व्यर्थ बदनाम।
कर्मों का फल दे मिटा, ऐसा ईश न कोय।
तो तू किसके सामने अंखियां भर भर रोय।
दीपावली का त्यौहार हमें अपने अंदर प्रज्ञा-दीप प्रज्वलित करने की याद दिलाता है ,विग्रहवान धर्म,मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवनादर्श को आचरण में उतारने की याद दिलाता है । दीपावली का त्यौहार आपका कल्याण साधे।आपका मंगल हो
बाहर के अँधियारे को रवि,शशि,अग्नि, विद्युत् दूर कर देते हैं।अंदर के अंधेरे को ये दूर नहीं कर सकते।राग,द्वेष,मोहऔर इन्हीं के अनुषंगी काम,क्रोध,लोभ,ईर्ष्या,नफरत, अहंकार आदि विकारों ने अंदर जिस गहन अन्धकार का घेरा बना रखा है उसे तो आप अंदर ज्ञान का दीप जला कर ही दूर कर सकते हैं।
लिखा तो धर्मग्रंथों में बहुत कुछ है किन्तु आचरण में कितना उतारा जाता है, यह महत्त्वपूर्ण है। जब तक आचरण में नहीं उतारा जाएगा धर्मग्रंथों में लिखी गई बातें बेअसर रहेंगी।
ऋग्वेद के अनुसार जो अनाज खेतों मे पैदा होता है, उसका बंटवारा तो देखिए...
1- जमीन से चार अंगुल भूमि का,
2- गेहूं के बाली के नीचे का पशुओं का,
3- पहली फसल की पहली बाली अग्नि की,
4- बाली से गेहूं अलग करने पर मूठी भर दाना पंछियो का,
5- गेहूं का आटा बनाने पर मुट्ठी भर आटा चीटियों का,
6- चुटकी भर गुथा आटा मछलियों का,
7- फिर उस आटे की पहली रोटी गौमाता की,
8- पहली थाली घर के बुजुर्गो की
9- फिर हमारी थाली,
10- आखिरी रोटी कुत्ते की,
ये हमें सिखाती है, हमारी सनातन संस्कृति।
मुझे गर्व है कि मैं इस संस्कृति का हिस्सा हूँ.......🙏🏻🙏🏻🚩🚩
सदाचार ही धर्म है, दुराचार ही पाप।
परसेवा ही धर्म है, परपीड़न ही पाप।।
बाहर भीतर स्वच्छ हों, करें स्वच्छ व्यवहार।
सत्य प्रेम करुणा जगे, यही धर्म का सार।।
"मंगल हुआ प्रभात" से साभार।
जितनी हानि न कर सकें, दुश्मन द्वेषी दोय।
अधिक हानि निज मन करे, जब मन मैला होय।
माँ बापू प्रिय बन्धुजन, भला करें सब कोय।
अधिक भला निज मन करे, जब यह उजला होय।।
धम्मपद से ---
"सहा नहीं है जिसने पीड़ा परतंत्रता दुसाधिन की।
वह क्या जाने स्वतंत्रता का सुख अगाध क्या होता है।"
इन पंक्तियों के साथ स्वतंत्रतादिवस का 76वाॅं वार्षिक आवर्ती उत्सव आपके लिए मंगलप्रद हो।
आदर्श कोई और प्रस्तुत करें और नेतृत्व हम करें,अब यह बात नहीं चलनी चाहिए।हमें अपनी आस्था की प्रामाणिकता अपने आचरण द्वारा सिद्ध करनी होगी,कारगिल के वीर शहीदों और देश पर ज़िन्दगी निछावर करने वाले अन्य शहीदों की तरह।नमन ,वीर शहीदों नमन।