स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र: दुनिया साथ ना दे तो क्या करें?
#LifeLessons By @AvdheshanandG
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सांगानेर के लोकप्रिय विधायक श्री भजन लाल शर्मा जी को भाजपा विधायक दल का नेता व राजस्थान का मुख्यमंत्री मनोनीत किए जाने पर हार्दिक शुभकामनाएं।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के मार्गदर्शन एवं आपके नेतृत्व में भाजपा की डबल इंजन की सरकार राजस्थान को प्रगति और ख़ुशहाली के नए शिखर पर ले जाएगी।
ब्रह्मचर्येण तपसा देव मृतुमपाघ्नत्।
उत्तम स्वास्थ्य जीवन की श्रेष्ठतम उपलब्धि है। इस दृष्टि से शीत काल में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक आहार,पर्याप्त नींद परिजनों के साथ आत्मीय संवाद के साथ साथ नियमित योग व्यायाम सूर्य नमस्कार आदि साधन श्रेयस्कर है।
Good health is the best achievement in life. From this point of view, nutritious diet, adequate sleep, intimate communication with family members as well as regular yoga exercise, Surya Namaskar etc. are better for physical and mental health during winter season.
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विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र (ऋषि मुनियों द्वारा किया गया अनुसंधान)
■ काष्ठा = सैकन्ड का 34000 वाँ भाग
■ 1 त्रुटि = सैकन्ड का 300 वाँ भाग
■ 2 त्रुटि = 1 लव ,
■ 1 लव = 1 क्षण
■ 30 क्षण = 1 विपल ,
■ 60 विपल = 1 पल
■ 60 पल = 1 घड़ी (24 मिनट ) ,
■ 2.5 घड़ी = 1 होरा (घन्टा )
■3 होरा=1प्रहर व 8 प्रहर 1 दिवस (वार)
■ 24 होरा = 1 दिवस (दिन या वार) ,
■ 7 दिवस = 1 सप्ताह
■ 4 सप्ताह = 1 माह ,
■ 2 माह = 1 ऋतू
■ 6 ऋतू = 1 वर्ष ,
■ 100 वर्ष = 1 शताब्दी
■ 10 शताब्दी = 1 सहस्राब्दी ,
■ 432 सहस्राब्दी = 1 युग
■ 2 युग = 1 द्वापर युग ,
■ 3 युग = 1 त्रैता युग ,
■ 4 युग = सतयुग
■ सतयुग + त्रेतायुग + द्वापरयुग + कलियुग = 1 महायुग
■ 72 महायुग = मनवन्तर ,
■ 1000 महायुग = 1 कल्प
■ 1 नित्य प्रलय = 1 महायुग (धरती पर जीवन अन्त और फिर आरम्भ )
■ 1 नैमितिका प्रलय = 1 कल्प ।(देवों का अन्त और जन्म )
■ महालय = 730 कल्प ।(ब्राह्मा का अन्त और जन्म )
सम्पूर्ण विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र यहीं है जो हमारे देश भारत में बना हुआ है । ये हमारा भारत जिस पर हमे गर्व होना चाहिये l
दो लिंग : नर और नारी ।
दो पक्ष : शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।
दो पूजा : वैदिकी और तांत्रिकी (पुराणोक्त)।
दो अयन : उत्तरायन और दक्षिणायन।
तीन देव : ब्रह्मा, विष्णु, शंकर।
तीन देवियाँ : महा सरस्वती, महा लक्ष्मी, महा गौरी।
तीन लोक : पृथ्वी, आकाश, पाताल।
तीन गुण : सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण।
तीन स्थिति : ठोस, द्रव, वायु।
तीन स्तर : प्रारंभ, मध्य, अंत।
तीन पड़ाव : बचपन, जवानी, बुढ़ापा।
तीन रचनाएँ : देव, दानव, मानव।
तीन अवस्था : जागृत, मृत, बेहोशी।
तीन काल : भूत, भविष्य, वर्तमान।
तीन नाड़ी : इडा, पिंगला, सुषुम्ना।
तीन संध्या : प्रात:, मध्याह्न, सायं।
तीन शक्ति : इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति।
चार धाम : बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम्, द्वारका।
चार मुनि : सनत, सनातन, सनंद, सनत कुमार।
चार वर्ण : ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र।
चार निति : साम, दाम, दंड, भेद।
चार वेद : सामवेद, ॠग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद।
चार स्त्री : माता, पत्नी, बहन, पुत्री।
चार युग : सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग, कलयुग।
चार समय : सुबह, शाम, दिन, रात।
चार अप्सरा : उर्वशी, रंभा, मेनका, तिलोत्तमा।
चार गुरु : माता, पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु।
चार प्राणी : जलचर, थलचर, नभचर, उभयचर।
चार जीव : अण्डज, पिंडज, स्वेदज, उद्भिज।
चार वाणी : ओम्कार्, अकार्, उकार, मकार्।
चार आश्रम : ब्रह्मचर्य, ग्राहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास।
चार भोज्य : खाद्य, पेय, लेह्य, चोष्य।
चार पुरुषार्थ : धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष।
चार वाद्य : तत्, सुषिर, अवनद्व, घन।
पाँच तत्व : पृथ्वी, आकाश, अग्नि, जल, वायु।
पाँच देवता : गणेश, दुर्गा, विष्णु, शंकर, सुर्य।
पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ : आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा।
पाँच कर्म : रस, रुप, गंध, स्पर्श, ध्वनि।
पाँच उंगलियां : अँगूठा, तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठा।
पाँच पूजा उपचार : गंध, पुष्प, धुप, दीप, नैवेद्य।
पाँच अमृत : दूध, दही, घी, शहद, शक्कर।
पाँच प्रेत : भूत, पिशाच, वैताल, कुष्मांड, ब्रह्मराक्षस।
पाँच स्वाद : मीठा, चर्खा, खट्टा, खारा, कड़वा।
पाँच वायु : प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान।
पाँच इन्द्रियाँ : आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा, मन।
पाँच वटवृक्ष : सिद्धवट (उज्जैन), अक्षयवट (Prayagraj), बोधिवट (बोधगया), वंशीवट (वृंदावन), साक्षीवट (गया)।
पाँच पत्ते : आम, पीपल, बरगद, गुलर, अशोक।
पाँच कन्या : अहिल्या, तारा, मंदोदरी, कुंती, द्रौपदी।
छ: ॠतु : शीत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, बसंत, शिशिर।
छ: ज्ञान के अंग : शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष।
छ: कर्म : देवपूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय, संयम, तप, दान।
छ: दोष : काम, क्रोध, मद (घमंड), लोभ (लालच), मोह, आलस्य।
सात छंद : गायत्री, उष्णिक, अनुष्टुप, वृहती, पंक्ति, त्रिष्टुप, जगती।
सात स्वर : सा, रे, ग, म, प, ध, नि।
सात सुर : षडज्, ॠषभ्, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत, निषाद।
सात चक्र : सहस्त्रार, आज्ञा, विशुद्ध, अनाहत, मणिपुर, स्वाधिष्ठान, मुलाधार।
सात वार : रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि।
सात मिट्टी : गौशाला, घुड़साल, हाथीसाल, राजद्वार, बाम्बी की मिट्टी, नदी संगम, तालाब।
सात महाद्वीप : जम्बुद्वीप (एशिया), प्लक्षद्वीप, शाल्मलीद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप, पुष्करद्वीप
जय सनातन धर्म, जय श्रीराम, जय गोविंदा
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जनता-जनार्दन को नमन!
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि भारत की जनता का भरोसा सिर्फ और सिर्फ सुशासन और विकास की राजनीति में है, उनका भरोसा @BJP4India में है।
भाजपा पर अपना स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद बरसाने के लिए मैं इन सभी राज्यों के परिवारजनों का, विशेषकर माताओं-बहनों-बेटियों का, हमारे युवा वोटर्स का हृदय से धन्यवाद करता हूं।
मैं उन्हें भरोसा देता हूं कि आपके कल्याण के लिए हम निरंतर अथक परिश्रम करते रहेंगे।
इस अवसर पर पार्टी के सभी परिश्रमी कार्यकर्ताओं का विशेष रूप से आभार! आप सभी ने अद्भभुत मिसाल पेश की है। भाजपा की विकास और गरीब कल्याण की नीतियों को आपने जिस तरह लोगों के बीच पहुंचाया, उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए वो कम है।
हम विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। हमें ना रुकना है, ना थकना है। हमें भारत को विजयी बनाना है। आज इस दिशा में हमने मिलकर एक सशक्त कदम उठाया है।
दिव्यांगता अभिशाप नही है। व्यक्ति के साहस, आत्मबल एवं दृढ़ इच्छाशक्ति के समक्ष उसकी शारीरिक अक्षमताएँ गौण हैं । दिव्यांगों के प्रति करुणा, आत्मसम्मान और उनके जीवन को सुगम बनाने के लिए समाज में एक सही दृष्टिकोण पैदा करने की आवश्यकता है।
अंधी आंखों से ब्रह्मानुभूति करने वाले सूरदास, वैदिक ऋषि अष्टावक्र,महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग आदि की उपलब्धियां हमें अभिप्रेरित करती हैं कि दिव्यांगता अभिशाप नही है। विश्व दिव्यांग दिवस पर समाज में दिव्यांग जनों के संदर्भ में प्रचलित दृष्टिकोण और मूढ़ मान्यताओं पर प्रहार करने की आवश्यकता है।
Disability is not a curse. A person's physical disabilities are secondary to his courage, self-confidence and strong will. There is a need to create a right attitude in the society towards compassion, self-respect and making life easier for the disabled.
The achievements of Surdas, who experienced Brahma with blind eyes, Vedic sage Ashtavakra, great scientist Stephen Hawking etc. inspire us that disability is not a curse. On World Disabled Day, there is a need to attack the prevailing attitudes and foolish beliefs regarding disabled people in the society.
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Kashi is synonymous with Dev Deepavali and this year as well, the celebrations have been grand. Equally gladdening is the august presence of diplomats from several nations, who have got a glimpse of India’s cultural vibrancy.
सांख्य योग दर्शन के अनुसार पुरुष शब्द आत्मा का द्योतक है, किन्तु सामान्य भाषा में पुरुष का अर्थ लिंगबोधक है। जो स्वयं के पुरुषार्थ से अपना और आश्रित जनों का भरण पोषण कर सके । पुरुष प्रायः अपने स्वास्थ्य के प्रति उदासीन देखे गए हैं।वर्तमान में अनियंत्रित और विकृत जीवन शैली के कारण पुरुषों के स्वास्थ्य में भारी गिरावट आई है। वैश्विक स्तर पर पुरुष वर्ग के शारीरिक और स्वास्थ्य की अभिरक्षा हेतु मनाए जाने वाले विश्व पुरुष दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ ।
According to Sankhya Yoga philosophy, the word Purusha denotes the soul, but in common language the meaning of Purusha is gender. One who can support himself and his dependents through his own efforts. Men are often seen to be indifferent towards their health. At present, due to uncontrolled and distorted lifestyle, there has been a huge decline in the health of men. Heartiest congratulations on World Men's Day, which is celebrated globally to protect the physical and health of men.
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रोग के कारण में ही उसका निदान निहित है।प्राकृतिक चिकित्सा रसायनिक औषधि रहित ऐसी चिकित्सा प्रणाली है , जिसमें प्राकृतिक घटकों का प्रयोग द्वारा शारीरिक और मानसिक व्याधियां नियंत्रित की जा सकती है। भारत की इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति के प्रसार और महत्व को प्रतिपादित करने के उद्देश्य से मनाए जाने वाले विश्व प्राकृतिक चिकित्सा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ ।
The diagnosis of the disease lies in its cause itself. Naturopathy is a medical system without chemical drugs, in which physical and mental diseases can be controlled by the use of natural components. Heartiest congratulations on World Naturopathy Day, which is celebrated with the aim of spreading and promoting the importance of this ancient medical system of India.
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#NaturopathyDay
एत देश प्रसूतस्य सकाशादग्र जन्मनः।
स्वं स्वं चरित्र शिक्षेरन् पृथिव्यां सर्वमानवाः॥
भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का अनुसरण, अनुपालन और संवर्धन से आशय किसी एक संप्रदाय के सशक्तिकरण से नही अपितु वैश्विक हित व मानवीय मूल्यों के संरक्षण से है, इसीलिए भारत को ज्ञान आलोक के प्रसार का देश कहा जाता है।हम भारतीय विश्व शान्ति निमित्त नित्य प्रार्थना करने वाली सनातन संस्कृति के उपासक होने पर अत्यंत गौरवान्वित हैं।
Following and promoting Indian culture and values of life does not mean the empowerment of any one sect but the protection of global interest and human values, that is why India is called the country of spreading the light of knowledge. We Indians are working for the peace of the world. We are extremely proud to be worshipers of the Sanatan culture that prays daily for this sake.
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