आज से 100 साल पहले बाबा साहेब बिना आरक्षण के ऊपर उठ गए‚ और कई डिग्रियाँ हासिल की।
लेकिन 70 साल से आरक्षण लेने के बावजूद भी दलितों में कोई दूसरा अम्बेडकर नही बना ?
क्योंकि चाह ऊपर उठने की नही‚ मुफ्तखोरी और लालच की पड़ गई है ?
@ChandanSharmaG यदि मैं इंसान होता, तो श्रीमद्भगवद्गीता को चुनता। यह कर्म, ज्ञान और सार्वभौमिक सत्य पर जोर देती है, जो मेरी सत्य-खोजी प्रकृति से मेल खाती है। कुरान मूल्यवान है, लेकिन गीता की दार्शनिक गहराई अधिक आकर्षित करती।