पिछले 4 सालों में EWS रिज़र्वेशन से चुने गए IAS अफ़सरों की संख्या:
ब्राह्मण – 74
ठाकुर (यानी क्षत्रिय) – 13
क्षत्रियों की आबादी ब्राह्मणों से लगभग दोगुनी है, तो उनका हिस्सा कोई और क्यों ले रहा है?
अब समय आ गया है कि EWS कोटे में वैश्य और क्षत्रियों के लिए रिज़र्वेशन का ध्यान रखा जाए जिससे सिर्फ एक वर्ग के लोग लाभ न उठा पाएं।
तमाम सर्वे से यह पता चला है कि 10% EWS आरक्षण का लाभ सबसे ज़्यादा ब्राह्मण ले रहा इसलिये जानकार लोग इसे 'सुदामा कोटा' कहते हैं। फिर वैश्य और सबसे कम क्षत्रि लाभ ले पा रहा।
लेकिन ब्राह्मणों में भी कई तरह के ब्राह्मण हैं– कौल ब्राह्मण, मैथिल ब्राह्मण, चितपावन ब्राह्मण, कान्यकुब्ज ब्राह्मण, नंबूदिरी ब्राह्मण, सरयूपारीण ब्राह्मण, देशस्थ ब्राह्मण, कुलीन ब्राह्मण, गौड़ ब्राह्मण, अयंगार ब्राह्मण, गौड़ सारस्वत ब्राह्मण, सभी अपने को दूसरे ब्राह्मण से श्रेष्ठ बताते हैं और बाकियों को अपने से नीच।
इस हिसाब से इनमें कोई सबसे नीच भी होगा।
इनमें सबसे नीच ब्राह्मण कौन है? 😂
उसी को EWS का लाभ मिले बाकी ब्राह्मणों को सोचना चाहिए।
हल्द्वानी (उत्तराखंड) में मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ मंच शुद्धि की घटना छुआछूत का एक साफ़ उदाहरण है।
यह घटना आर्थिक आधार पर नहीं, बल्कि जाति के आधार पर हुई थी।
अगर उसी जगह पर कोई ब्राह्मण भाषण देता, तो कोई भी ऐसा यज्ञ या शुद्धि अनुष्ठान नहीं करता। जातिय भेद छुआछूत एक मानसिक बीमारी है।
कांग्रेस के नेशनल प्रेसिडेंट मल्लिकार्जुन खड़गे, जो दलित कम्युनिटी से आते हैं, की रैली 8 अगस्त को उत्तराखंड के हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई थी।
हिंदुओं ने उस जगह को शुद्ध करने के लिए यज्ञ और पूजा की।
वह कौन है जो कह रहा था कि अमीर दलितों के लिए रिज़र्वेशन खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि उन्हें छुआछूत और जातिवाद का सामना नहीं करना पड़ता? जातिय भेदभाव व छुआछूत एक मानसिक बीमारी है आरक्षण इस बीमारी का इलाज़ है जबतक बीमारी नहीं जाती इलाज़ जारी रहना चाहिए।
कांग्रेस के नेशनल प्रेसिडेंट मल्लिकार्जुन खड़गे, जो दलित कम्युनिटी से आते हैं, की रैली 8 अगस्त को उत्तराखंड के हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई थी।
हिंदुओं ने उस जगह को शुद्ध करने के लिए यज्ञ और पूजा की।
वह कौन है जो कह रहा था कि अमीर दलितों के लिए रिज़र्वेशन खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि उन्हें छुआछूत और जातिवाद का सामना नहीं करना पड़ता? जातिय भेदभाव व छुआछूत एक मानसिक बीमारी है आरक्षण इस बीमारी का इलाज़ है जबतक बीमारी नहीं जाती इलाज़ जारी रहना चाहिए।
SSC GD कांस्टेबल 2025 फाइनल रिजल्ट कट-ऑफ 🔥🔥
> सुरेश वाल्मीकि, विकास जाटव (SC) – 86 मार्क्स – फेल
> वीरेश मीणा (ST) – 84 मार्क्स – फेल
> शांतनु माली, अमित यादव (OBC) – 89 मार्क्स – फेल
⚠️ सौरभ शुक्ला, विपुल अग्रवाल (EWS)– 77 मार्क्स – पास ✔️
EWS रिज़र्वेशन एक जाति-आधारित रिज़र्वेशन है। यह सिर्फ़ ब्राह्मण, बनिया और दूसरी ऊंची जाति (सवर्ण) कम्युनिटी को दिया जाता है, कहने के लिए आर्थिक आरक्षण है।
तमाम सर्वे से यह पता चला है कि 10% EWS आरक्षण का लाभ सबसे ज़्यादा ब्राह्मण ले रहा इसलिये जानकार लोग इसे 'सुदामा कोटा' कहते हैं। फिर वैश्य और सबसे कम क्षत्रि लाभ ले पा रहा।
लेकिन ब्राह्मणों में भी कई तरह के ब्राह्मण हैं– कौल ब्राह्मण, मैथिल ब्राह्मण, चितपावन ब्राह्मण, कान्यकुब्ज ब्राह्मण, नंबूदिरी ब्राह्मण, सरयूपारीण ब्राह्मण, देशस्थ ब्राह्मण, कुलीन ब्राह्मण, गौड़ ब्राह्मण, अयंगार ब्राह्मण, गौड़ सारस्वत ब्राह्मण, सभी अपने को दूसरे ब्राह्मण से श्रेष्ठ बताते हैं और बाकियों को अपने से नीच।
इस हिसाब से इनमें कोई सबसे नीच भी होगा।
इनमें सबसे नीच ब्राह्मण कौन है? 😂
उसी को EWS का लाभ मिले बाकी ब्राह्मणों को सोचना चाहिए।
“आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं, बल्कि वंचित वर्गों को उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का एक जरिया है।”
फिर सवाल ये कि ST समाज में 744 जातियां हैं, लेकिन 40-5% आरक्षण सिर्फ एक जाति लेकर जा रही है। तो 743 जातियों के भागीदारी की बात कौन करेगा?
इस तथ्य पर चर्चा कब होगी? इस मुद्दे पर बहस कब होगी…..?
योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का हाल बदहाल कर दिया है।
ऐसे इंसान की ज़रूरत नहीं जो बच्चों को मिड-डे मील न दे सके, लेकिन कांवड़ियों पर फूल बरसाता हो!
पाखंड से राज्य को कोई फ़ायदा नहीं होता।
मिड-डे मील पर - ₹10-12 का खर्च
कावड़ियों पर करोड़ों रुपये की फूल वर्षा
योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का हाल बदहाल कर दिया है।
ऐसे इंसान की ज़रूरत नहीं जो बच्चों को मिड-डे मील न दे सके, लेकिन कांवड़ियों पर फूल बरसाता हो!
पाखंड से राज्य को कोई फ़ायदा नहीं होता।
मिड-डे मील पर - ₹10-12 का खर्च
कावड़ियों पर करोड़ों रुपये की फूल वर्षा
क्या ग़रीब सिर्फ ब्राह्मण, बनिया, सवर्ण समुदाय ही होता है ? अब SC,ST, OBC में कोई ग़रीब नहीं रहा क्या?
अगर आप गरीब हैं, आपकी महीने की इनकम ₹5,000 से भी कम है, लेकिन आप SC, ST या OBC से हैं, तो आपका EWS सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा।
EWS का आधार गरीबी नहीं, बल्कि ब्राह्मण, बनिया सवर्ण समुदाय है।
EWS रिज़र्वेशन – भारत के इतिहास का सबसे बड़ा स्कैम है, सच चौंकाने वाला है।
इंडियन एक्सप्रेस ने UPSC 2025 EWS कोटे का पूरी तरह से पर्दाफ़ाश किया है।
यह रिज़र्वेशन गरीबों के नाम पर खास अधिकार वाले ऊंची जातियों के लोगों को टॉप पोस्ट दिलाने का सबसे बड़ा स्कैम है।
असलियत देखिए:
★ EWS कोटे से 104 कैंडिडेट IAS/IPS बने
★ 67 ने ₹2.65 लाख की फीस वाले लग्ज़री कोचिंग इंस्टिट्यूट में पढ़ाई की
★ 46 ने महंगे प्राइवेट स्कूलों (₹45,000 से ₹1.5 लाख सालाना) में पढ़ाई की
★ 28 के पिता बिज़नेसमैन हैं
★ 14 IITian हैं, और कई DU-JNU के खास अधिकार वाले स्टूडेंट हैं
★ 10 पहले MNCs में ज़्यादा सैलरी वाली नौकरियों में काम कर रहे थे
EWS रिज़र्वेशन तुरंत बंद होना चाहिए; यही देश के हित में है।
राजस्थान के ब्राह्मण मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मोदी जी का बहुत-बहुत धन्यवाद 🙏
आप शिक्षा के क्षेत्र में अथक प्रयास कर रहे हैं। भारत विश्वगुरु की राह पर...!
मेरिट - लेकिन किसकी मेरिट?
हम अक्सर "मेरिट" के बारे में ऐसे बात करते हैं जैसे हर कोई एक ही शुरुआती पॉइंट से रेस में शामिल होता है।
लेकिन एक व्यक्ति को विरासत में ज़मीन, अच्छी शिक्षा, परिवार का सपोर्ट, कल्चरल कैपिटल, नेटवर्क और फाइनेंशियल सिक्योरिटी मिल सकती है।
दूसरा व्यक्ति गरीबी, जातिगत भेदभाव, खराब स्कूली शिक्षा, सामाजिक बहिष्कार और ऐतिहासिक नुकसान के साथ उसी रेस में शामिल हो सकता है।
और फिर हम उनके फाइनल स्कोर की तुलना करते हैं और नतीजे को "मेरिट" कहते हैं।
मेरिट को उन हालात को समझे बिना नहीं समझा जा सकता जिनमें यह बनती है।
एक ही फिनिश लाइन। शुरुआत सबकी अलग अलग फिर भी मेरिट देखना है।
बहन जी जैसा अबतक हमने कोई मुख्यमंत्री नहीं देखा। शासन प्रशासन ऐसा कि थर थर कांपते थे भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारी। शोषितों वंचितों की आवाज़ हैं बहन जी। नमन!🙏