आज का परम सत्य यही है कि अरविंद केजरीवाल को ना सिर्फ निचली अदालत ने बरी कर दिया है बल्कि ये तक कह दिया कि जांच में उन्हें फंसाने का प्रयास हुआ।
अब बीजेपी भले कहे कि ये तो सिर्फ निचली अदालत का फैसला है, अभी ऊपरी अदालत से फैसला आना बचा है या कल तक केजरीवाल को इसी मामले में भ्रष्ट घोषित करनेवाली कांग्रेस भले आज इसे बीजेपी की साजिश बता दे पर सबसे बड़ी बात ये है कि केजरीवाल की पॉलिटिक्स आज पूरी तरह से रिवाइव हो चुकी है।
आप और हम ये सोचते रह सकते हैं कि अगर कोई सबूत था ही नहीं तो केजरीवाल से लेकर मनीष सिसोदिया को इतने दिन जेल में क्यों रखा अदालतों ने, क्यों उनकी जमानत याचिकाएं खारिज होती रहीं, क्यों एक्साइज पॉलिसी कैंसिल हुई वगैरह वगैरह.. लेकिन इन सवालों का कोई मतलब आज की डेट में नहीं है.. आगे ऊपरी अदालत में क्या होता है ये तो बाद की बात है लेकिन आज केजरीवाल के हाथ में एक क्लीन चिट है और यही सत्य है।
और ये क्लीन चिट सिर्फ केजरीवाल नहीं बल्कि बंगाल से लेकर हर राज्य तक में बीजेपी के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता रहेगा कि क्या जानबूझकर विपक्ष को फंसाया गया है?
कल सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगने के बाद आज निचली अदालत ने छीछालेदर कर दी है सरकार की। उधर अरविंद केजरीवाल अब INDI अलायंस का एक मजबूत चेहरा बनने की दावेदारी रखते हैं।
कई लोगों का मानना है कि पंजाब में उनकी जीत लगभग पक्की है.. औऱ आज के फैसले से उन संभावनाओं को बूस्ट ही मिलेगा। ऐसे में राहुल गांधी की जगह तीन बड़े चेहरे हैं जो इंडी गठबंधन को लीड करने का माद्दा रखते हैं.. ममता बनर्जी.. केजरीवाल और अखिलेश यादव।
आज के फैसले के दूरगामी प्रभाव होंगे।