Amnesty International calls on the Government of India to drop all charges against the 16 activists and immediately release the eight activists who remain in detention. https://t.co/LZIe195bPf
सुप्रीम कोर्ट में #VVPAT केस कल 24 अप्रैल को Cause List में 5 वे Item पर।
मैंने अनेक पोस्ट में बताया है की किस तरह 2023 में ईवीएम हटाने या और VVPAT की पर्चियों को वोटरों के हाँथ में देकर और फिर डब्बे में गिराने के बाद डिजिटल गिनती के साथ साथ 100% पर्चियों की गिनती कराये जाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में तीन केस दायर की अंतिम सुनवाई की डेट 20 मार्च थी, लेकिन सुनी गई 16 व 18 अप्रैल को। और 19 अप्रैल को वोटिंग शुरू हो गई।
बहस अधिवक्ता कपिल सिबल @KapilSibal , प्रशांत भूषण @pbhushan1 (जूनियर रिया यादव) , और गोपाल शंकरनारायणन ने किया।
अब सर्वोच्च न्यायालय में "For Directions" कर के कल यानि 24 अप्रैल को 5 वे Item का आया है।
अगर पर्ची गिनने का भी निर्देश आता है तो यह समझने वाली बात है की VVPAT में हाल में की गई तबदीली पर अगर कोई पर्ची कट कर बिना वोटर के verify किये हुए जा रहा है तो वह भी सेट किया हुआ हो सकता है।
देखते हैं कल यानि 24 April को क्या आर्डर आता है!
जय संविधान।
@AdvRajendraPal@ratanlal72@DrJaihind@suraj_yadav2005@RahulGandhi@INCIndia
#BanEvmSaveIndia
#ModiTohGayo
#DefeatBJPSaveIndia
#LokSabhaElections2024
#संविधान_बचाओ_संघर्ष_समिति
#LokSabha2024 | A look at how political parties can access personal data of welfare scheme beneficiaries and other potential voters through indirect and often illicit means to create voter profiles for targeted campaigning.
Disha Verma✍️
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अयोध्या के राममंदिर में कुछ लोग मूर्ति के पास जा सकते हैं, कुछ लोग नहीं. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री माननीय जीतन राम मांझी बेरिकेड के पीछे से दर्शन करते हैं, जबकि वे ज्यादा शिक्षित हैं.
यही बात हिंदू धर्म को कमजोर कर देती है. हमलावरों के लिए ये पसंदीदा देश यूं ही नहीं रहा है.
मैं राममंदिर का आर्किटेक्चर देखने आ सकता हूं. पर जहां तक पुजारी लोग जाते हैं वहां तक जाने दोगे तो सोचूंगा.
वरना अपने पास रखो अपना मंदिर. मुझे अपना सम्मान प्रिय है. मेरे साथ कोई भेदभाव कर ले, ये अधिकार तो मैं ईश्वर को भी नहीं दूंगा. पुजारियों की तो औकात ही क्या है?
बेरिकेड के पीछे रखना है तो सबको रखो.
अरविंद केजरीवाल का वकील अभिषेक मनु सिंघवी है, जो चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ के साथ सेंट कोलंबा स्कूल और फिर सेंट स्टीफंस कॉलेज में पढ़ा है. दिल्ली बहुत दिलचस्प शहर है. सबको पता है कि रात में सुप्रीम कोर्ट किन वकीलों के कहने पर खुल सकता है.
ये है खान मार्केट गैंग. वैसे खान मार्केट में खान की कोई दुकान नहीं है. खान चाचा रेस्टोरेंट भी खान का नहीं, कालरा का है.
कोलिजियम सिस्टम ने नाश कर दिया है न्यायपालिका का. दिल्ली सीनियर लॉयर माफिया जैसे चाहता है, न्यायपालिका वैसे नाचती है. सीनियर लॉयर में एससी, एसटी, ओबीसी वकील लगभग नदारद हैं. एससी तो सिर्फ एक है. एसटी एक भी नहीं.
मुख्यमंत्री केजरीवाल जिस कुर्सी पर बैठते थे, ठीक उसी कुर्सी पर उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल के बैठ जाने के साथ ही भारतीय राजनीति को शुद्ध बनाने और बदल डालने का दावा करने वाले एक आंदोलन की मौत हो चुकी है.
आप श्रद्धांजलि संदेश दे सकते हैं.
इन पाखंडियों ने सबको आयुर्वेद और योग के भरोसे जीने को कहा. खुद अपना इलाज मॉडर्न मेडिसीन से कराया. ये जग्गी हो या रामदेव या बालकृष्ण सब आते एलोपैथी की ही शरण में है.
शास्त्रों में इसी लिए कहा गया है कि बडे लोग जो कहें, उसे बिल्कुल मत सुनो. जो वे करते हैं, वो करो.
इसी तरह हिंदी की बात करने वालों से सीखो, जो अपने बच्चे हमेशा इंग्लिश मीडियम में पढ़ाते हैं.
1. मैं अपना वोट ऐसे किसी आदमी को नहीं दूंगा जो एमएलए होते हुए भी अपने परिवार और आसपास के लोगों की जीवन शैली को ऊपर नहीं उठा रहा है.
2. ये शख्स 30 साल नौकरी करने के बाद सुपरवाइजर या ऊपर के पद पर प्रमोट क्यों नहीं हुआ? अपनी पार्टी की सरकार रहते हुए भी कुलदीप एमएलए अपने बाप को न्याय नहीं दिला पाया.
3. एमसीडी और दिल्ली सरकार इन कर्मचारियों को एयर ब्रुम खरीदकर क्यों नहीं देती? विज्ञापन पर तो हर दिन करोड़ों का खर्च है. अमेरिका और यूरोप में तो कोई झाड़ूू वाला नजर नहीं आता. एयर ब्रुम आए 70-80 साल हो गए हैं. एमएलए का ध्यान इन पॉलिसी मैटर पर होना चाहिए.
और
4. शरद शर्मा, आपको इसमें कोई समस्या नहीं दिख रही है? आप भी लो आध्यात्मिक सुख. अपनी कॉलोनी का पता बताऊं? लेगा आध्यात्मिक सुख?
ये पॉडकास्ट उन अबोध बच्चों के लिए जिनके लिए 2014 से पहले मीडिया का गोल्डन पीरियड था और 2014 में अचानक से आसमान से गोदी मीडिया आ गया, जिनके हिसाब से MLA की हॉर्स ट्रेडिंग 2014 में शुरू हुई, जो अपनी जूजी या नूनी से खेलते हुए समझते हैं क्रांति हो रही है, जिनके लिए जातिवाद और सांप्रदायिकता 2014 में शुरू हुई.
क्या है कि हमारी जंग आपसे पहले की है. मोदी के जाते ही आपके लिए गोल्डन पीरियड आ जाएगा. हम जिन मुद्दों के साथ हैं उनका मोदी के रहने न रहने से कम ही फर्क पड़ता है. हम तब भी रहेंगे. हम पहले भी लडाई के उसी मैदान में थे. @confusedvichar
मैं चमार जाति का गरीब व्यक्ति हूं। मेरी जमीन को भाजपा के गाजीपुर के जिला उपाध्यक्ष विपिन कुमार सिंह ने कब्जा कर लिया है। पुलिस कोई सुनवाई नहीं कर रही है। #gazipurpolice@CMOfficeUP@BJP4India
राजस्थान हाई कोर्ट के जयपुर बेंच में जहाँ एक तरफ़ मानवता पर भयंकर कलंक मनहूस मनु की मूर्ति लगी है वहाँ बाबा साहब डॉक्टर आंबेडकर की फोटो लगातार बड़े बड़े अधिकारी बौद्ध रीति रिवाज़ से शादी कर रहे है। यह सिर्फ बदलाव नहीं बल्कि बहुत बड़ी क्रांति का आग़ाज़ है। 21वी सदी हमारी है, अब बहुजन की बारी है।
तो मान लिया तुमने. तुम्हीं थे वो नीच जो छत्तीसगढ़ में ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने के खिलाफ हाई कोर्ट गया था. तुमको कांग्रेस ने पता नहीं क्यों पाला था? भूपेश बघेल का चुनाव में नुकसान भी हो गया. कांग्रेस बाहर अपना दुश्मन क्यों तलाशती है? अंदर ही नाग बैठे हैं.
पार्टी पर खर्च की लिमिट होनी चाहिए या नहीं, ये बहस का विषय है. कोई भी पार्टी इस खर्च पर लिमिट नहीं चाहती. लेकिन #DhruvRathee ने तो कह दिया कि लिमिट है. ये है जानकारी का स्तर.
सुप्रिया जी, इस वीडियो पर आप फिदा हैं. इसे 9:15 से सुनिए.
ये बकलोल कह रहा है कि एमपी और एमएलए इलेक्शन में पार्टी कितना खर्च करे, इसकी लिमिट है.
आप तो चुनाव लड़ चुकी है. आपको तो पता होगा कि लिमिट कैंडिडेट पर है. पार्टी पर नहीं. ये कांग्रेस के समय से चली आ रही व्यवस्था है. पार्टी चुनाव के बाद आयोग को सिर्फ ये जानकारी दे देती है कि उसका कितना खर्च हुआ. लिमिट नहीं है.
राठी की बात सुनकर कोई पॉलिटिकल साइंस की परीक्षा देगा, तो फेल हो जाएगा न!