आज राजस्थान के करीब 54 हजार युवा साथियों को सरकारी नियुक्ति पत्र सौंपकर बहुत संतोष का अनुभव हुआ है। मैं उन्हें बधाई देने के साथ ही राज्य के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं।
A highly prestigious honour for a great of the game 🙌
President of India, Smt Droupadi Murmuji @rashtrapatibhvn confers former #TeamIndia captain Rohit Sharma @ImRo45 with the Padma Shri award 👏
मैंने पूरी ज़िंदगी भारत को देखा है,
वहां लगातार बदलाव होते रहे हैं, कोई छह महीने रहता था, कोई एक साल, और फिर अचानक से प्रधानमंत्री मोदी वहां आ गए।
वह 12 साल से भी अधिक समय से वहां हैं, बेहद मजबूत तरीके से और वह इसे एक अद्भुत शांति के साथ करते हैं...वह बेहद मजबूत और सख्त इंसान हैं।
मैं उन्हें बहुत अच्छी तरह जानता हूं।
: डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका
न तस्य रोगो न जरा न मृत्युः प्राप्तस्य योगाग्निमयं शरीरम्
हम सब आभारी हैं यशस्वी प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के, जिन्होंने भारत की परंपरा को, विरासत को वैश्विक मान्यता दिलाकर भारत वासियों को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज झांसी में सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में सम्मिलित हुआ एवं ई-आयुष पत्रिका का विमोचन भी किया।
इस अवसर पर पश्चिम बंगाल से प्रधानमंत्री जी का वर्चुअल माध्यम से सान्निध्य भी प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम में सहभाग करने वाले सभी महानुभावों का हृदय से अभिनंदन।
महाराणा प्रताप ने धर्म, संस्कृति, स्वाभिमान और राष्ट्रहित के लिए जीवनभर संघर्ष किया – डॉ. मोहन भागवत जी
हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने पर उदयपुर में राष्ट्र चेतना का विराट संगम
महाराणा प्रताप का जीवन सत्ता प्राप्ति का नहीं, बल्कि लोक कल्याण, आदर्श शासन और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा का उदाहरण है – सरसंघचालक जी
उदयपुर, 17 जून।
हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के अवसर पर गांधी ग्राउंड में प्रताप गौरव केन्द्र 'राष्ट्रीय तीर्थ' के तत्वाधान में आयोजित ‘राष्ट्र चेतना संकल्प सभा’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत का इतिहास पराधीनता का नहीं, बल्कि विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध निरंतर चले संघर्ष, प्रतिरोध और आत्मगौरव का इतिहास है।
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महाराणा प्रताप केवल इतिहास के पात्र नहीं, बल्कि भारतीय पीढीयों के लिए एक आदर्श है, जो उन्हे आपने पूर्वजो एवं इतिहास के प्रति आत्मबोध की अनुभूति करवाते है।#HaldighatiVijay450
हल्दीघाटी युद्ध के दो दिन बाद21 जून को मुगल सेना गोगुन्दा पहुँची, तब उनको भय बना रहा कहीं राणा उन पर अचानक टूट न पड़ें। इसी डर के कारण उन्होंने पूरे गोगुन्दा गाँव के चारों तरफ अत्यंत गहरी खाई खुदवाई, ऊँची दीवारें बनवाईं जिन्हें घोड़े भी न लांघ सकें,
#HaldighatiVijay450
सुप्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. चंद्रशेखर शर्मा द्वारा बलीचा का ताम्रपत्र के गहन शोध के अनुसार, हल्दीघाटी युद्ध के ठीक बाद महाराणा प्रताप ने विजय के उपलक्ष्य में युद्ध क्षेत्र के बगल में स्थित'बलीचा' गाँव के किसानों व नागरिकों को भूमि अनुदान जारी किए थे।
#HaldighatiVijay450
@lkantbhardwaj@narendramodi@NitinNabin लोकतांत्रिक तरीके से जीत नहीं सकते इसीलिए इंदिरा गांधी की याद आ रही है इन्हें
दुनिया की सबसे बड़ी महिला तानाशाह एक ही है।
स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
अपने अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और त्याग से स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।उनका जीवन हम सभी को राष्ट्रसेवा, आत्मसम्मान और देशभक्ति की प्रेरणा देता है।
#वीर_सावरकर
जिसे हम सदियों से आस्था की आँखों से देखते आए थे, अब विज्ञान ने उसकी पुष्टि कर दी है।
प्रयागराज के संगम को हमेशा से गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन का स्थान माना गया है। एक त्रिवेणी, जिसमें दो नदियाँ दिखती थीं, और तीसरी सिर्फ़ श्रद्धा में बहती थी।
अब हैदराबाद के CSIR-नेशनल जियोफ़िज़िकल रिसर्च इंस्टिट्यूट (NGRI) के वैज्ञानिकों ने इस पौराणिक मान्यता को एक ठोस वैज्ञानिक आधार दे दिया है। हेलीकॉप्टर से किए गए एयरबोर्न सर्वे और ज़मीन पर की गई कन्फ़र्मेटरी ड्रिलिंग के बाद, डॉ. सुभाष चंद्र की टीम ने पुष्टि की है कि गंगा और यमुना के बीच, ज़मीन से 10 से 15 मीटर नीचे, एक विशाल प्राचीन नदी दबी हुई है। इसकी चौड़ाई, गहराई और आधार स्तर, तीनों गंगा और यमुना के बराबर हैं।
यानी यह कोई छोटी सहायक धारा नहीं थी। यह स्वयं एक मुख्य नदी थी।
विज्ञान इसे "पेलियो रिवर" कहता है। आस्था इसे सरस्वती कहती है। दोनों एक ही सच की ओर इशारा कर रहे हैं।
प्रयागराज अब सिर्फ़ आस्था का संगम नहीं रहा, यह विज्ञान और परंपरा का भी संगम बन गया है। जहाँ हज़ारों वर्षों की स्मृति, और आज की तकनीक, एक ही कहानी कहती हैं।
माँ सरस्वती कभी सूखी नहीं थीं। बस छिप गई थीं। और आज, फिर से सामने आ रही हैं।
@cleanganganmcg
A year ago, during #OperationSindoor, our armed forces showcased their valour and gave a firm response to those who attacked our people. Every Indian is proud of our armed forces. As a mark of respect to our forces and their success during #OperationSindoor, let us all change our display pictures on social media, including X, Facebook, Instagram and WhatsApp to the picture shared below.
भारत की सुप्रसिद्ध गायिका आशा भोसले के निधन से देश के संगीत क्षेत्र को अपार क्षति हुई है। कई दशकों तक उन्होंने अपनी साधना से फ़िल्मों के माध्यम से अजरामर गीतों द्वारा लोकरंजन के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उनकी स्मृति में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। भारत की सांस्कृतिक विरासत तथा देशभक्तों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हमेशा स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त होती रही। उनके इस अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें सम्मानपूर्वक स्मरण किया जाएगा। ॐ शांति।
- डॉ. मोहन भागवत
सरसंघचालक
दत्तात्रेय होसबाले
सरकार्यवाह
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ