अलीगढ़ में एक ही परिवार पर लगाए गए SC-ST एक्ट में 14 केस
तारीख़ पर तारीख़ से परिवार हुआ बर्बाद, पीड़ित बोले: भगवान से मांग रहे हैं मौत
क्या है पूरा मामला? जानिए @Keshavmalan93 की ग्राउंड रिपोर्ट में; पूरा वीडियो हमारे यूट्यूब चैनल पर
नाई समाज के लड़के ने SC ST ACT के डर से अपनी जान दे दी
ऐसे अतिपिछड़ी जातियां ज़मींदार पिछड़ों की तरह ब्राह्मणों पर बहुत कम टिप्पणी करते लेकिन कुछ बहकावे कर जाते
उनसे यही सवाल है - ले लोगे न्याय ?
इसलिए पहचान करो गलत और सही का
आज दो ही पर आज उत्पीड़न होता
सवर्ण अतिपिछड़ा
हिमाचल प्रदेश में आंदोलनकारियों पर वॉटर कैनन के इस्तेमाल के बाद भड़के महिपाल सिंह मकराना!
महिपाल सिंह मकराना बोले—
“जब तक मुख्यमंत्री और राज्यपाल आकर ज्ञापन नहीं लेंगे, तब तक धरने पर बैठा रहूँगा!”
हिमाचल प्रदेश के शिमला और आसपास रहने वाले सवर्ण समाज के भाइयों से भी आग्रह है कि अधिक से अधिक संख्या में शिमला सचिवालय पहुँचकर आंदोलन के सहभागी बनें। घरों में बैठकर तमाशा मत देखिए, आज समाज आपको पुकार रहा है। समाज के साथ खड़े होकर अपनी भागीदारी निभाइए!
#सवर्ण_समाज
चित्रकूट, मऊ में ब्राह्मण छात्र के साथ ऐसी प्रताड़ना अखिर क्यों?
मुरका स्थित न्यू दर्पण पब्लिक स्कूल में शिक्षक लवकुश सिंह पटेल पर आरोप एक ब्राह्मण बच्चे को इतनी बेरहमी से पी"टा हैं। क्या ये जातिगत भेदभाव नहीं?
जमीनदार पिछड़ों इतनी नफरत क्यों?
सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
“मैं विष्णु-महेश, राम कृष्ण को भगवान नहीं मानूँगा,
ना ही उनकी पूजा करूंगा……”
: राजकुमार भाटी
हिंदू धर्म और देवी-देवताओं को लेकर ये भयावह टिप्पणी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने की है।
ब्राह्मणों का वोट सपा को चाहिए, लेकिन सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी कह रहे हैं कि:- “मैं ब्राह्मणों के हाथ से कोई भी क्रिया कर्म नहीं करवाऊँगा”
अरे ब्राह्मणों को बुलाओ या ना बुलाओ, वो तुम्हारे यहाँ क्रिया कर्म करवाने के लिए भूखे नहीं मर रहे हैं…….
लेकिन ऐसे सामूहिक बहिष्कार करना सीधे-सीधे नफरत फैलाने वाला है। ब्राह्मणों के खिलाफ़ ये नफरत सपा को बहुत महँगी पड़ेगी।
मोदी जी वाला झुनझुना हमें प्राप्त हो गया है अब हम इसको बजा बजा कर आरक्षण में सुधार और एससी एसटी एक्ट की समाप्ति तथा यूजीसी रोलबैक के गाने आप लोगो को सुनातें रहेंगे ।
UGC के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठीं लक्ष्मी तंवर की तबीयत बिगड़ी!
जयपुर में UGC नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर लक्ष्मी तंवर की अगुवाई में 18 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया था। आज 21 अक्टूबर को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई है।
धरना स्थल का पता:
राष्ट्रीय करणी सेना भवन, चित्रकूट, वैशाली नगर, जयपुर, राजस्थान।
UGC नियमों की वापसी की मांग को लेकर अनशन कर रहीं लक्ष्मी तंवर के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।
#UGCRollback
अंग्रेज़ों ने सर्वाधिक फाँसी ब्राह्मणों को दी क्योंकि वही सर्वाधिक अंग्रेज़ों का विरोध करते थे ।
आज की सरकार भी सर्वाधिक ब्राह्मणों का एनकाउंटर कर रही है इनको भी ब्राह्मण ही समाप्त करेगा लिख कर रख लीजिए ।
मोदी जी और योगी जी का अहंकार भी धनानंद से भी ज़्यादा है इसकी समाप्ति भी ब्राह्मण ही करेगा ।
- जाति गिनने वालों
- मंदिर में दलित-आदिवासी समाज को नहीं जाने देने का झूठा नैरेटिव सेट करने वालों
- समाज में जातीय नफ़रत फैलाने वालों
देख लो ये दृश्य। कोल आदिवासी समाज द्वारा विराजित माँ दुर्गा के विसर्जन यात्रा में सर्व समाज झूम रहा है।
मंदिर के पास माँ दुर्गा की यात्रा लाई गई है। आदिवासी समाज के लोग अपनी परंपरा का पालन कर रहे हैं।
ये एक वीडियो सभी झूठे प्रोपोगेंडा को ध्वस्त करता है। जय माँ दुर्गा।
एक ब्राह्मण बुजुर्ग की हत्या हो गया
चाकू मा"रकर हत्या की गयी है
अगल बगल किसी को जानकारी तक नहीं
बिहार में यही सम्राट कुशवाहा का सुसान है ?
आप सोशल मीडिया खोलकर देखिए
सम्राट कुशवाहा के जाति के कुछ लोग ब्राह्मण नफरत परोसने में लगे हैं
पत्रकार - तिवारी जी, क्या बेंच रहे है ?
रामनरेश तिवारी - नान खटाई बेंच रहे है ,,
पत्रकार - ब्राह्मण होकर नॉनखटाई बेंच रहे है ?
राम नरेश तिवारी - क्या करें ? कुछ करना तो पड़ेगा ही, लड़का बच्चा कैसे पालेंगे ?
पत्रकार - लोग कहते है ब्राह्मणों के पास बहुत पैसा होता है ?
रामनरेश तिवारी - नहीं हम लोग बहुत ग़रीब है, कोई जमींन नहीं है, चार लड़किया है, बस कैसे भी करके कमा खा रहा हूँ,
पत्रकार - प्रतिदिन कितनी कमाई होती है ?
तिवारी जी - डेली डेढ़ दो सौ कमा लेते है, खर्चा पानी चल रहा है…
ग्राउंड रियलिटी यही है, इनके लिए पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम आदित्यनाथ के लिए कोई विशेष योजना नहीं है, सिर्फ UGC जैसा काला क़ानून है,
महार समाज पूरे देश में 0.5% होंगे, महाराष्ट्र में अन् यदलित समाज के लोग लगातार महार समाज से अलग आरक्षण देने यानी आरक्षण के वर्गीकरण की माँग उठा रहे हैं।
ये आदमी उसी फ़्रस्ट्रेशन में ब्राह्मणों-भूमिहारों का खुलेआम चमड़ा निकालने की बात कर रहा है। इसके भौंकने से कुछ नहीं होना, लेकिन इस पर कार्रवाई ना होने से पुलिसिया इक़बाल ख़त्म होगा।
महार समाज में भी अच्छे लोग हैं, जो इसकी इस सड़कर छाप भाषा से सहमत नहीं होंगे। ऐसे ही लोगों के कारण पूरे महार समाज का नुक़सान हो रहा है।
आरक्षण के वर्गीकरण का मामला इनका अन्य पिछड़े दलित समाज से हैं, लेकिन ब्राह्मण-भूमिहार की चमड़ा निकलना सीधे-सीधे हिंसा को बढ़ाने वाला है।
महाराष्ट्र पुलिस क्या राज्य में अराजकता की स्थिति बढ़ाना चाहती है? ये शर्मनाक है।
संघर्षों की भट्टी में तपा एक जन्मजात योद्धा: 🚩महिपाल सिंह मकराना-
कुछ लोग हालात देखकर मैदान में उतरते हैं, लेकिन कुछ ऐसे होते हैं जो पैदा ही संघर्ष और स्वाभिमान की रक्षा के लिए होते हैं। महिपाल सिंह मकराना किसी सत्ता, पद या सुविधा के मोहताज नेता नहीं हैं—वह एक जन्मजात योद्धा हैं, जिनकी रगों में केवल समाज के मान, सम्मान और हक के लिए लड़ना ही एकमात्र ध्येय बनकर दौड़ता है।
इतिहास और समाज साक्षी है कि जब-जब कौम और स्वाभिमान पर आंच आई, यह योद्धा कभी पीछे नहीं हटा:
जब पद्मावत के जरिए मां पद्मिनी के त्याग और इतिहास से छेड़छाड़ की कोशिश हुई, तो व्यवस्था और बॉलीवुड के बड़े-बड़े दिग्गजों के सामने सीना तानकर खड़ा होने का नाम मकराना था।
जब सांवराद की धरती पर इंसाफ की मांग को लेकर लाखों का जनसैलाब उमड़ा, तो उस ऐतिहासिक संघर्ष के मोर्चे पर समाज की ढाल बनकर वही खड़े थे।
जब भाई सुखदेव की हत्या से पूरा समाज आहत था, तब सड़कों पर उतरकर हुकूमत को झुकने और त्वरित कार्रवाई के लिए मजबूर करने में वह सबसे आगे डटे रहे।
चाहे SC/ST एक्ट की विसंगतियों के खिलाफ हुंकार हो, EWS आरक्षण के अधिकारों की रक्षा हो, या 'सम्राट पृथ्वीराज' के गौरव की पुनर्स्थापना—हर मंच पर समाज की आवाज़ को बुलंद किया।
जब स्वाभिमान को ललकारा गया, तो गुजरात की धरती पर जाकर बिना किसी राजनीतिक भय के सत्ता के सामने सीधी चुनौती पेश की।
आज जब शिक्षण संस्थानों में सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य पर काले नियमों का साया मंडरा रहा है, तब भी तपती धूप में सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्राएं कर युवाओं को जगाने का काम वही कर रहे हैं।
ये तो केवल वे आंदोलन हैं जो मीडिया के कैमरों, टीवी बहसों और अखबारों की सुर्खियों में दर्ज हो पाए। सच तो यह है कि ऐसे न जाने कितने अनाम संघर्ष, थाने-कचहरियों के चक्कर, लाठियों के वार, झूठे मुकदमे और रात-बिरात पीड़ितों की मदद के लिए लड़ी गई लड़ाइयां हैं, जिनका कभी कोई अखबार में जिक्र तक नहीं हुआ। उन्होंने कभी चर्चा या वाहवाही के लिए संघर्ष नहीं किया, बल्कि इसलिए किया क्योंकि उनका रोम-रोम स्वाभिमान के लिए समर्पित है।
योद्धा कभी थकान या नतीजों की परवाह नहीं करते। डटे रहिए भाई साहब, जब तक आपके जैसा निस्वार्थ और अडिग नेतृत्व समाज के आगे खड़ा है, तब तक कोई भी ताकत हमारे अधिकारों और सम्मान को दबा नहीं सकती!
@mahipalmakrana_ #10_जनवरी #EWS_सरलीकरण #UGC_काला_कानून_वापस_लो #SCSTACT #General_act #UGCRollBack #UGC_Rollback
#UGC_काला_कानून_वापस_लो #StopMisuseOfSCSTAct #ReservationReform
इस सदी के सबसे बड़े कुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। काशी, अयोध्या और मथुरा में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यह सनातन संस्कृति की व्यापकता और सामाजिक एकता का प्रतीक है। दुर्भाग्यवश, आज हम जाति के आधार पर लोगों की पहचान करने लगे हैं, जबकि मेरी परवरिश में जातिगत भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं रहा।
Full Video Link = https://t.co/XkptcOkfM5…