बिहार: तानाशाही की तस्वीर देखिए।
यदि बेगूसराय में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गोली चलाए जाने की खबर सही है, तो यह बेहद गंभीर और निंदनीय घटना है। किसी भी लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ़ अत्यधिक बल प्रयोग स्वीकार्य नहीं हो सकता।
@yadavakhilesh@RahulGandhi
जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा नहीं होता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
यह सिर्फ़ एक व्यक्ति के इस्तीफ़े की मांग नहीं, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य की लड़ाई है।
हैदराबाद की दिशा अकेले वन-वे टिकट लेकर जंतर-मंतर के आंदोलन में शामिल होने दिल्ली पहुँचीं। दिल्ली में किसी को नहीं जानती थीं, लेकिन आंदोलन ने उन्हें सैकड़ों अपने दे दिए।
यही जनआंदोलन की असली ताकत है। ✊🇮🇳
इंकलाब ज़िंदाबाद! #JantarMantar#StudentsProtest#InquilabZindabad
मुंबई:रिया अहीर नाम की एक युवती पुलिस की बस के सामने डटकर विरोध जताती रही। पुलिस, मीडिया और आसपास मौजूद लोग देखते रहे. लेकिन वह अपने साहस के साथ अडिग खड़ी रही।
उसे देखकर यही एहसास होता है कि शायद हमारे पूर्वजों ने भी अंग्रेज़ों के सामने इसी हिम्मत, जज़्बे के साथ संघर्ष किया होगा।
एक और पेपर लीक...! 🤦📚
पहले NEET, फिर महाराष्ट्र में और अब उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी का सेमेस्टर पेपर भी लीक!
क्या यही है "परीक्षा प्रणाली" का नया मॉडल?
युवा पूछ रहा है। पढ़ाई करें या अगला पेपर लीक होने का इंतज़ार?
"पेपर लीक सरकार"
नेम प्लेट की क्या ज़रूरत है साहब? सरकार तो मरने के बाद भी नाम मिटा देती है... हमने ऑपरेशन सिंदूर में देखा है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक छात्र की यह बात कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर गई।
कॉकरोच हैं, कुतर-कुतर कर खा जाएंगे,
आखिर कितने करोड़ लोगों पर मुकदमे चलाएंगे?
नाराज़ युवा अब चुप बैठने वाला नहीं,
हर गली-मोहल्ले में सवाल उठने लगे हैं।
युवाओं के भविष्य के साथ कोई और नहीं, खिलवाड़ तो तुम ही कर रहे हो। करोड़ो युवाओं भविष्य भी तुम ही बर्बाद कर रहे हो। तुमने ही NEET के 23 बच्चों की हत्या के जिम्मेदार हो। अब देश का युवा और छात्र तुम्हारे झूठे वादों पर बिल्कुल भरोसा नहीं करेगा।तुम ही दोषी हो, तुम्हे सजा युवा देगा..!
ये बिखरे हुए जूते-चप्पल सिर्फ़ सामान नहीं हैं, ये उस दिन की गवाही हैं जब छात्रों का संसद मार्च लाठीचार्ज और भगदड़ में बदल गया। ये भगदड़ के दौरान बिछड़े छात्रों के जूते-चप्पल हैं।
हर जोड़ी एक सवाल पूछ रही है आख़िर निर्दोष छात्रों की आवाज़ का जवाब डंडों से क्यों दिया गया?
लाठी दिल्ली पुलिस ने चलाई,
लेकिन जिम्मेदारी से कोई नहीं बच सकता।
जब पुलिस गृह मंत्री के अधीन है,
तो जवाब भी गृह मंत्री को देना होगा।
#अमित_शाह_इस्तीफा_दो
सरकार को ठंडे दिमाग से सोचना चाहिए कि जो छात्र अभी पिट रहे हैं। अगर हालात ऐसे ही बिगड़ते रहे और छात्रों का गुस्सा बेकाबू हो गया। अगर कहीं युवाओं ने नेताओं और मंत्रियों को पीटना शुरू कर दिया तो मंजर बहुत भयावह हो सकता है। इसलिए समय रहते लोकतांत्रिक समाधान ही सबसे बेहतर रास्ता है।
UPSC की तैयारी कर रही थी, लेकिन अब मन नहीं कर रहा। आज युवाओं के प्रदर्शन में शामिल इस लड़की का यह बयान बताता है कि जब व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ने लगे, तो सबसे बड़ा नुकसान युवाओं के सपनों का होता है। यह किसी भी सरकार और प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है।