अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया
जिस को गले लगा लिया वो दूर हो गया..!
दादी से कहना उस की कहानी सुनाइए
जो बादशाह इश्क़ में मज़दूर हो गया..!
सुब्ह-ए-विसाल पूछ रही है अजब सवाल
वो पास आ गया कि बहुत दूर हो गया..!
बशीर बद्र
@margret_017@NeelamWrites
उसने कहा था इश्क़ एक ढोंग है ,
और मैंने कहा तुझे इश्क़ हो खुदा करे
फिर कोई तुझे उससे जुदा करें
तू उसी का नाम जपा करे
तू उसे तस्बिहों पे पढा करे
तू गली-गली फिरा करे
फिर मैं कहूं इश्क़ एक ढोंग है
और तूं नहीं-नहीं कहा करे
RIP
मौत तो आनी है तो फिर मौत का क्यों डर रखूँ,
जिन्दगी आ, तेरे क़दमों पर मैं अपना सर रखूँ....
कौन जाने कब बुलावा आए और जाना पड़े,
सोचता हूँ हर घड़ी तैयार अब बिस्तर रखूँ....
डॉ. कुंअर बेचैन
1942 - 2021
आ गई सर पर क़ज़ा लो सारा सामाँ रह गया
ऐ फ़लक क्या क्या हमारे दिल में अरमाँ रह गया
बाग़बाँ है चार दिन की बाग़-ए-आलम में बहार
फूल सब मुरझा गए ख़ाली बयाबाँ रह गया..!!⚘💕
#भारतेंदुहरिश्र्चन्द्र#अनामि
AS 🌾
मशीनों की दुनियाँ में किताब की क़ीमत बची नही
सवाल महंगा कर दिया जवाब की क़ीमत बची नही
जो क़दीमी है उसे मिटाया जा रहा है बोहत शौख़ से
जुगनुओं की आस में आफ़ताब की क़ीमत बची नही
नए दौर का मिजाज़ है झूठे फूलों से कोई उज्र नही
फ़रेबी मआशरे में शानू गुलाब की क़ीमत बची नही
��ब तक मैं करूं ज़ख़्म शुमार एक के बाद एक
मरते ही चले जाते हैं यार एक के बाद एक
माली से कहो बाग़ को आंधी से बचा ले
हो जाएं न सब फूल शिकार एक के बाद एक
~रहमान फ़ारिस
वफ़ा की अम्न की पहचान बनके आए है
के हम फलक से ही इंसान बनके आए है
बुलन्द रब ने हमको किया सारी कौमो से
हम इस जमी पे मुसलमान बनके आए है
हमारे खून में गद���दारी हो नही सकती
के हम वफाओ का उनवान बनके आए है
खुदा ने उनको बनाया है रहमत ए आलम
वो कायनात पे अहसान बनके आए है
फलक छूना है तो कुछ हिम्मत ए परवाज पैदा कर
फकत शाकओं पर ढैरा डालने से कुछ नही होगा
अकीदत का ताहल्लुक दिल से होता है मेरे भाई
किसी दरिया में सिक्का डालने से कुछ नही होगा
साहिल साहब