ओबीसी विरोधी प्रशांत सिंह को लेकर क्या ओबीसी का भला करोगे, प्रशांत सिंह के रहते ओबीसी आरक्षण लागू नहीं हो सकता,, @DrMohanYadav51 जी,प्रदेश में ओबीसी आरक्षण ख़ारिज हुआ है उसकी मूल वजह में प्रशांत सिंह है।।
कोर्ट में ऑथेंटिक डाटा रखने की जिम्मेदारी किसकी थी?
@DrMohanYadav51 OBC ka bharosa Tut gya hai ,samay rehte danka bajaiye mohan ji ,kahi aisa na ho ki obc ke sare sangathan bhajpa ke virodh me gaon gaon ja kar prachar shuru kar den
🚨 मध्यप्रदेश के OBC समाज के 27% आरक्षण पर भाजपा सरकार से पाँच सीधे सवाल!
मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 , @BJP4MP, महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और @BJP4India नेतृत्व ज��ाब दें!
9 अक्टूबर 2026 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने OBC का 27% आरक्षण बढ़ाने वाले 2019 के संशोधन को निरस्त कर दिया।
अदालत ने कहा कि आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने के लिए आवश्यक असाधारण परिस्थितियों का पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किया गया।
अब सवाल यह है कि सत्ता में रहने के दौरान भाजपा सरकार ने इस मामले में क्या किया?
1️⃣ हाईकोर्ट में OBC समाज के पक्ष में पर्याप्त आंकड़े क्यों नहीं रखे गए?
OBC की वास्तविक आबादी, सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन, सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व और रिक्त पदों के प्रमाणित आंकड़े प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की थी। यदि आंकड़े अपर्याप्त थे, तो सरकार ने उन्हें समय रहते जुटाने के लिए क्या किया?
2️⃣ Youth for Equality की WP 18105/2021 और 87:13 का विवाद!
87:13 व्यवस्था न्यायालय द्वारा बनाया गया कोई सामान्य भर्ती फार्मूला नहीं था। राज्य सरकार ने 29 सितंबर 2022 के आसपास इस संबंध में प्रशासनिक निर्देश अपनाए। इसके तहत 13% पद विवाद के समाधान तक रोके गए।
यदि सरकार का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया जारी रखना था, तो प्रभावित अभ्यर्थियों को वर्षों तक अनिश्चितता में क्यों रखा गया? अब हाईकोर्ट ने इन पदों को तीन महीने में भरने का निर्देश दिया है।
3️⃣ महाधिवक्ता प्रश��ंत सिंह की भूमिका की समीक्षा कौन करेगा?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्पष्ट करें कि राज्य का पक्ष रखने के लिए कौन-सी कानूनी रणनीति अपनाई गई, कौन-से आंकड़े पेश किए गए और किन कमियों की ओर अदालत ने संकेत किया। यदि कानूनी तैयारी या सरकारी पक्ष प्रस्तुत करने में लापरवाही हुई, तो निष्पक्ष समीक्षा कर जिम्मेदारी तय की जाए।
4️⃣ नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की पहल कहाँ है?
भाजपा सरकार बताए कि OBC आरक्षण की संवैधानिक सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार के समक्ष क्या प्रस्ताव रखा गया है। नौवीं अनुसूची में किसी कानून को शामिल करना अपने-आप न्यायिक समीक्षा से पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। फिर भी सरकार इस विकल्प सहित सभी संवैधानिक उपायों पर अपना स्पष्ट रोडमैप सार्वजनिक करे।
5️⃣ OBC समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व का हवाला देकर उसके अधिकारों पर सवाल क्यों?
मुख्यमंत्री या मंत्री का OBC समुद��य से होना अपने-आप यह साबित नहीं करता कि पूरे समुदाय का सामाजिक, शैक्षणिक और सरकारी सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व है। सरकार को व्यक्तियों की राजनीतिक मौजूदगी के बजाय प्रमाणित सामाजिक और सेवा-संबंधी आंकड़ों के आधार पर अपना पक्ष रखना चाहिए।
भाजपा सरकार से हमारी स्पष्ट मांग
• 27% आरक्षण के मामले में प्रस्तुत सभी प्रमुख आंकड़े और कानूनी रणनीति सार्वजनिक की जाए।
• महाधिवक्ता और संबंधित ��धिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा हो।
• 13% रोके गए पदों पर हाईकोर्ट के निर्देशानुसार समयबद्ध नियुक्तियाँ सुनिश्चित की जाएँ।
• OBC की आबादी, पिछड़ेपन और सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व के विश्वसनीय ��ंकड़े जुटाए जाएँ।
• नौवीं अनुसूची सहित संवैधानिक विकल्पों पर केंद्र और राज्य सरकार अपना स्पष्ट रुख बताएँ।
मुख्यमंत्री जी, OBC समाज को केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।
2019 में 27% आरक्षण का कानून बना। उसके बाद भाजपा भी सत्ता में रही। सात वर्षों तक चले विवाद के बाद आज लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल फिर खड़ा है।
अब जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने से काम नहीं चलेगा। सरकार को बताना होगा कि OBC आरक्षण का प्रभावी बचाव करने के लिए क्या किया गया और आगे क्या किया जाएगा।
OBC समाज का सवाल है—हमारे अधिकारों के लिए ठोस तैयारी कब होगी और जवाबदेही कब तय होगी?
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मुट्ठी भर लोग जिन्हें आवादी से अधिक 10% आरक्षण मिल रहा है। उन्हें खुश करने बाला बयान मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 ने दिया अत्यंत दुखद है ।
OBC वर्ग के होल्ड अभ्यर्थियों तक को नियुक्ति नहीं दिला पाई @BJP4MP सरकार ।
यह अत्यंत शर्मनाक है ।
माननीय मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51जल्द से जल्द सुप्रीम कोर्ट में स्टे ऑर्डर लेकर 27% वाला विधेयक विधासभा में लाकर संविधान की 9वीं अनुसूची में लाकर ओबीसी समाज को न्याय देवे
आपसे 54% ओबीसी समाज की यही अंतिम आशा है
भाजपा सरकार ने माननीय न्यायालय के समक्ष OBC वर्ग का पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा। कांग्रेस पार्टी OBC व��्ग के हक़ और अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक प���री मजबूती से लड़ेगी।
OBC वर्ग को उनका हक़ और अधिकार दिलाकर रहेंगे!
: पूर्व मंत्री श्री @SYadavMLA जी.
OBC छात्रों ने bjp का
क्या बिगाड़ा था
4 साल का इंतजार
अब सब खत्म
नहीं देना था तो पहले ही बाहर कर देते
13%ओबीसी होल्ड के दलदल में क्यों डाला
13% होल्डओबीसी युवाओं के आंसुओं का हिसाब कौन देगा पूछता ह ओबीसी क बेरोजगार युवा
@BJP4MP@CMMadhyaPradesh@jitupatwari@RahulGandhi
मध्यप्रदेश @BJP4MP सरकार की ‘बड़ी जीत’ किसके खिलाफ—OBC समाज के अधिकारों के?
27% OBC आरक्षण पर सरकार, मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह स्पष्ट ��वाब दें। फैसले की जिम्मेदारी कौन लेगा? OBC समाज को जवाब और न्याय चाहिए!
@narendramodi @AmitShah @RahulGandhi @INCMP
मध्य प्रदेश में OBC वर्ग को 2019 में मेरी सरकार द्वारा दिया गया 27% आरक्षण षड्यंत्रपूर्वक समाप्त करने के बाद भारतीय जनता पार्टी "चोरी और सीना ��ोरी" की राजनीति पर उतर आई है।
सच्चाई यह है कि मेरी सरकार ने जनता की भलाई के लिए आरक्षण दिया था। आरक्षण की रक्षा करना सरकार की ज़िम्मेदारी होती है। लेकिन उसके बाद बनी भाजपा सरकारों ने कोर्ट के सामने सच्चाई रखी ही नहीं।
भाजपा नेताओं के बयान में यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि तब कांग्रेस सरकार ने जल्दबाजी में आरक्षण दिया। इस तरह के भ्रामक बयान अदालत के आदेश की ग़लत व्याख्या और अवमानना की तरह हैं।
सच्चाई यह कि कांग्रेस सरकार ने 2019 में मध्य प्रदेश विधानसभा में क़ानून पास करके ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण दिया था, जो पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करके दिया गया था।
2020 से प्रदेश में भाजपा की सरकारें हैं, इन 6 साल में भाजपा ने जानबूझकर ओबीसी जनसंख्या के सही आंकड़े न्यायालय के सामने नहीं रखे।
भाजपा सरकार की ज़िम्मेदारी थी कि वह अदालत में मामले को पुरज़ोर ढंग से रखें, लेकिन भाजपा नेत��ओं के बयानों से लगता है कि 2019 में हमने जो आरक्षण दिया उसके बाद से उस ��रक्षण के संरक्षण के लिए भाजपा ने कुछ नहीं किया। अगर भाजपा नेता जो कह रहे हैं उसे सच मान लें तो स्पष्ट है कि भाजपा ने पिछले 6 साल में अदालत के सामने ओबीसी का पक्ष रखा ही नहीं है।
अगर, भाजपा में ओबीसी वर्ग के प्रति जरा भी संवेदनशीलता है तो तुरंत सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाए और साथ ही विधानसभा में नया कानून पारित कर 27% आरक्षण बहाल करे।
भा��पा ने ओबीसी के साथ विश्वासघात किया है मुख्यमंत्री तो डंके की चोट करते रह गए ।ये क्या किया आपने आपको पता है हजारों के भविष्य के साथ खेल गए ,खैर वक्त सबका आता है
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह जी, OBC के 27% आरक्षण के समर्थन में हाईकोर्ट में ठोस तथ्यात्मक आंकड़े प्रभावी ढंग से क्यों नहीं रखे गए?
मंत्री @MPRakeshSingh जी, पिछड़े वर्ग के नाम पर ढोल बजाना बंद कीजिए!
मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी और मंत्री राकेश सिंह जी, जब सरकार भाजपा की है और महाधिवक्ता आपकी सरकार के हैं, तो OBC आरक्षण की पैरवी की तैयारी किसकी जिम्मेदारी थी? सरकार आखिर क्या कर रही थी?
आधे से अधिक आबादी वाले OBC समाज के युवाओं के भविष्य का सवाल है। केवल कांग्रेस पर आरोप लगाकर भाजपा सरकार अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकती।
महाधिवक्ता की भूमिका की समीक्षा हो, जिम्मेदारी तय हो और OBC समाज को जवाब मिले।
OBC को भाषण नहीं, न्याय चाहिए; आश्वासन नहीं, जवाबदेही चाहिए!
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