किसी की मत सुनों.....
• खूब पढ़ाई करो।
• पैसे कमाओ।
• पैसे इकठ्ठा करो।
• माता पिता का नियमित स्वस्थ चेकअप करो।
• अच्छा खाओ
• परिवार को ही ईश्वर मानों
• सपरिवार व्यायाम की आदत डालो
• एकता में रहो
• त्यौहार मनाओ
• मंदिर जाओ
• तनाव में ध्यान लगाओ।
इतना ही है जीवन !!
छत्तीसगढ़ में अडानी के कोयला खदान के लिए जंगल काटा जा रहा है.
ये खबर आपको TV न्यूज में नहीं दिखाई देगी... ऐसा देश द्रोही कहेंगे.
इन मूर्खों को कौन समझाए. देश के लिए जंगल जरूरी है या अडानी?
यूथ आइकन रायगढ़ विधायक श्री ओपी चौधरी जी @OPChoudhary_Ind ने लोकतंत्र के मंदिर में कांग्रेस की सरकार में हुए PSC घोटाले पर शानदार वक्तव्य दिया- बात होगी अब न्याय की ✌️✌️🔥🔥— @BJP4CGState
रिवर फ्रंट बनाने के लिए लखनऊ के अकबर नगर में 1400 घर बिना मुआवजा दिए..गिराए जा रहे हैं..अगर आप भीतर से जीवित बचे हैं...तो इन लोगों की ये चीखें आपको सोने नहीं देंगी.. पूरा वीडियो देखने के लिए लिंक क्लिक कीजिए..👇👇👇👇👇
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#SaveAkbarNagar#Lucknow #AkabarNagar
यह संसार प्रतिक्षण परिवर्तनशील है एक क्षण पहले वस्तु जैसी थी दूसरे क्षण में वह वैसी नहीं रहती; अतः संसार को हम एक ही बार देख सकते हैं दूसरी बार नहीं। शरीर उत्पत्ति के पहले भी नहीं था और मरने के बाद भी नहीं रहेगा और वर्तमान में भी इसका क्षण प्रतिक्षण अभाव हो रहा है। तात्पर्य यह है कि शरीर भूत, भविष्य और वर्तमान इन तीनों कालों में कभी भावरूप से नहीं रहता। अतः यह असत् है। अर्जुन भी असत् शरीर को लेकर शोक कर रहे हैं कि युद्ध करने से ये सब मर जायँगे। इस पर भगवान् श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि जो असत् है उसका कोई शाश्वत अस्तित्व नहीं है और जो शाश्वत है उसका कोई विनाश या परिवर्तन नहीं हो सकता।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय:🙏😊
लड़के ! हमेशा खड़े रहे
खड़े रहना उनकी मजबूरी नहीं रही
बस उन्हें कहा गया हर बार
चलो तुम तो लड़के हो
खड़े हो जाओ
छोटी-छोटी बातों पर वे खड़े रहे
कक्षा के बाहर.. स्कूल विदाई पर
जब ली गई ग्रुप फोटो,
लड़कियाँ हमेशा आगे बैठीं,
और लड़के बगल में हाथ दिए पीछे खड़े रहे
वे तस्वीरों में आज तक खड़े हैं..
कॉलेज के बाहर खड़े होकर,
करते रहे किसी लड़की का इंतज़ार,
या किसी घर के बाहर घंटों खड़े रहे,
एक झलक, एक हाँ के लिए
अपने आपको आधा छोड़ वे आज भी
वहीं रह गए हैं...
बहन-बेटी की शादी में खड़े रहे,
मंडप के बाहर बारात का स्वागत करने के लिए
खड़े रहे रात भर हलवाई के पास,
कभी भाजी में कोई कमी ना रहे
खड़े रहे खाने की स्टाल के साथ,
कोई स्वाद कहीं खत्म न हो जाए
खड़े रहे विदाई तक
दरवाजे के सहारे और टैंट के
अंतिम पाईप के उखड़ जाने तक
बेटियाँ-बहनें जब तक वापिस लौटेंगी
वे खड़े ही मिलेंगे...
वे खड़े रहे पत्नी को सीट पर बैठाकर,
बस या ट्रेन की खिड़की थाम कर वे खड़े रहे
बहन के साथ घर के काम में,
कोई भारी सामान थामकर
वे खड़े रहे
माँ के ऑपरेशन के समय
ओ. टी.के बाहर घंटों. वे खड़े रहे
पिता की मौत पर
अंतिम लकड़ी के जल जाने तक
वे खड़े रहे ,
अस्थियाँ बहाते हुए गंगा के बर्फ से पानी में
लड़कों ! रीढ़ तो तुम्हारी पीठ में भी है,
क्या यह अकड़ती नहीं.....?
- सुनीता करोथवाल