आज देशभर में आरक्षण व्यवस्था, उसके लाभ, उसकी पात्रता और उसमें सुधार को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चा हो रही है। मेरा व्यक्तिगत मत है कि इस विषय को केवल “आरक्षण के पक्ष या विपक्ष” के रूप में देखने के बजाय हमें सामाजिक न्याय के साथ-साथ आर्थिक न्याय और समान अवसर के दृष्टिकोण से भी देखना चाहिए।
भारत में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए अनेक संवैधानिक एवं सरकारी व्यवस्थाएं हैं। इसी प्रकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अन्य वंचित वर्गों के लिए केंद्र और राज्यों में विभिन्न आयोग, निगम, योजनाएं एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध हैं।
ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण एवं अनारक्षित वर्ग के परिवारों के लिए भी ऐसी मजबूत और संस्थागत व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे केवल इसलिए कोई युवा, विद्यार्थी, किसान, छोटा उद्यमी या जरूरतमंद परिवार पीछे न रह जाए कि वह आरक्षण की किसी श्रेणी में नहीं आता।
गुजरात का मॉडल देश के लिए उदाहरण बन सकता है;
गुजरात में अनारक्षित वर्ग के आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास के लिए निगम/आयोग जैसी संस्थागत व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। इनके माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, स्वरोजगार तथा अन्य क्षेत्रों में सहायता देने का प्रयास किया जाता है।
मेरा मानना है कि इसी प्रकार केंद्र सरकार के स्तर पर भी एक मजबूत व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
केंद्र सरकार द्वारा “राष्ट्रीय आर्थिक रूप से कमजोर अनारक्षित वर्ग आयोग” और “राष्ट्रीय आर्थिक रूप से कमजोर अनारक्षित वर्ग विकास निगम” जैसी संस्थागत व्यवस्था बनाने पर विचार किया जाना चाहिए।
इसके लिए प्रारंभिक तौर पर लगभग ₹2,500 करोड़ का वार्षिक बजट निर्धारित किया जा सकता है, जिसे आवश्यकता और परिणामों के आधार पर आगे बढ़ाया जा सके।
इस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह होना चाहिए कि इसका लाभ जाति के आधार पर नहीं, बल्कि स्पष्ट आर्थिक एवं सामाजिक-शैक्षणिक मानकों के आधार पर दिया जाए।
आय, संपत्ति, परिवार की आर्थिक स्थिति, शिक्षा और अन्य वस्तुनिष्ठ मानकों को ध्यान में रखकर पात्रता तय की जा सकती है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि वास्तव में जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचे।
साथ ही, EWS के लिए संविधान में उपलब्ध 10% आरक्षण की व्यवस्था अपनी जगह बनी रहे, लेकिन उसके साथ-साथ शिक्षा, रोजगार की तैयारी, स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अलग से मजबूत सहायता तंत्र विकसित किया जाए।
आरक्षण व्यवस्था का मूल उद्देश्य जिन सामाजिक एवं ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करना है, उसे समझना और उसका सम्मान करना आवश्यक है। इसलिए इस विषय को किसी वर्ग के खिलाफ खड़ा करने के बजाय हमें ऐसी नीति की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए जिसमें सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय और समान अवसर—तीनों का संतुलन हो।
मेरा मानना है कि किसी गरीब विद्यार्थी की प्रतिभा केवल इसलिए नहीं रुकनी चाहिए क्योंकि वह ऐसी श्रेणी से आता है जिसे आरक्षण का लाभ नहीं मिलता।
इसलिए देश में आरक्षण व्यवस्था पर व्यापक और तथ्यात्मक चर्चा के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर अनारक्षित वर्ग के लिए ₹2,500 करोड़ के प्रारंभिक बजट वाली राष्ट्रीय संस्था बनाने पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।
हरियाणवी गायक मासूम शर्मा के इस एक गीत ने जेल रिटर्न रामपाल के पूरे साम्राज्य को हिला कर रख दिया है। 🎼
रामपाल और उसके चेलों की नींद उड़ा दी है इस गीत ने।
मासूम शर्मा ने पाखंडी की सारी पोल खोलकर रख दी है। 😊
#Tatvdarshi#Rampal#MasoomSharma
Gulshan Pahuja, languishing in Jail for more than a month, for committing THE MOST HEINOUS CRIME OF MAKING "DISRESPECTFUL THUMBNAILS" that irked Delhi High Court Judges, has started a HUNGER STRIKE inside Tihar Jail
He has been sentenced to 6 MONTHS IN PRISON for contempt of court
He was actively campaigning for Judicial Reforms, audio video recording in courts, for more than a decade
He had no personal interests.
Had no personal agenda.
He was just working for society and people who become victims of our totally broken justice system and he's paying such a huge price
His health has deteriorated a lot
Seeking your attention @indSupremeCourt@HMOIndia@VishnuNDTV@ShivAroor@RShivshankar@RubikaLiyaquat@anjanaomkashyap@barandbench@LiveLawIndia
अपील 🙏
सवर्ण समाज भाजपा के किसी भी ट्रेप में न फंसे, इस बार यदि मोदी ने UGC, SCSTACT और आरक्षण वापस नहीं लिया तो भाजपा का बोरिया बिस्तर बंधवाना है।
किसी भी सवर्ण समाज के सासंद और विधायक को अपने दरवाजे पर वोट नहीं मांगने देना है, उनसे कहिए जिस आरक्षण की पैरवी करते हो उसी विरादरी से वोट लीजिए।
चुनाव में कोई भी ब्राह्मण ठाकुर बनिया को अपना भइया चाचा मामा फूफा नहीं बनाना है, क्योंकि इन सबने हमारे समाज को अंधकार में झोंक कर खुद अकूत संपत्ति कमाकर अपने बच्चों को विदेशों में शिफ्ट कर दिया है जहां न कोई आरक्षण है न कोई जातिगत कानून? इसीलिए अब इनका बहिष्कार ही सरल उपाय है।
हिंदुत्व के नाम पर सामान्य वर्ग को ठगने वाले मोदी जी अब भाजपा के अंतिम प्रधानमंत्री होंगे इसके बाद अब भाजपा का अंतिम संस्कार करना है।