@Amitta_Agarwal यदि कच्चे चने खरीद कर उसको भुनवाते हैं, तो ही ये स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद रहेगा, वरना इसको फुलाने के लिए, चमकदार बनाने के लिए रसायनों का प्रयोग किया जाता है, जो आपको ऊर्जा प्रदान करेगा, मगर अंदर ही अंदर ऐसे रोग को जन्म देगा, जिसका कारण आपको पता भी नहीं चलेगा।
जिस सरसों तेल को हम लोग खाने के लिए सबसे शुद्ध मानते हैं , उसे अमेरिका ने खाने के लिए बैन कर रखा हैं !
अमेरिका में सरसों तेल मिल तो जाता हैं लेकिन उस पर साफ साफ लिखा रहता हैं कि For External Use Only.
अमेरिका ने ऐसे कई दवाइयां और अन्य प्रोडक्ट अपने यहां बैन कर रखा हैं जिसे भारत में धड़ल्ले से बेचा जाता हैं !
आपको क्या लगता हैं ऐसा क्यों होता हैं?
@premkumarcbn01 सरसों का तेल खाने में प्रयोग किया जाने वाले अच्छे तेलों में आता है, यदि आप इसको शुद्ध रूप में प्रयोग करते हैं तो। आजकल कई कंपनियां सरसों के तेल बेच रही हैं, लेकिन वो पूरी तरह से शुद्ध नहीं होता है, ऐसे कंपनी के तेलों को हम बाहर ही इस्तेमाल करें तो बेहतर रहेगा।
@ravyadav5692 यह सब्जी हमारे क्षेत्र में भी बहुत होती है, हमारे यहां भी सुरन के नाम से जाना जाता है। इसमें फाइबर बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है, जो हमारी आंतों के लिए बेहद फायदेमंद होता है।
@shree_2_2 बिल्कुल हल्दी इत्यादि मसालों में आजकल बहुत ज्यादा आर्टिफीशियल रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो स्वास्थ्य को फायदे की जगह गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। कोशिश करें बाजार से खड़ी हल्दी लें, उसकी खुद पिसाई करके ही इस्तेमाल करें।
ABHINAY SIR :
"Khan Sir has made Thousands of Crores by selling his fake 'Gareebi'"
"It's a huge lie that he takes less Fee and teaches in just ₹200 Fee. Not a single course is of Rs 200"
अपने आहार में जामुन जैसे प्राकृतिक फलों को शामिल करें और पोषण के साथ स्वाद का भी आनंद लें। 🍇
सेहतमंद विकल्प चुनें, स्वस्थ जीवन जिएं। 💚🌿
Jamun | Healthy Living | Natural Nutrition
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🧘♂️ क्या आप जानते हैं?
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को ही क्यों मनाया जाता है?
21 जून वर्ष का सबसे लंबा दिन (Summer Solstice) माना जाता है। भारतीय योग परंपरा में इसका विशेष आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व है। मान्यता है कि इसी काल में आदि योगी भगवान शिव ने मानवता को योग का ज्ञान प्रदान करना प्रारंभ किया था, जिससे योग परंपरा का विस्तार हुआ।
यह दिन ऊर्जा, संतुलन, स्वास्थ्य और चेतना के उत्कर्ष का प्रतीक माना जाता है। इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में भारत के प्रस्ताव को स्वीकार कर 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया, जिसे 2015 से विश्वभर में मनाया जा रहा है।
योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के सामंजस्य का विज्ञान है।
🧘♀️ 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पूरे परिवार के साथ योग करें और योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाएं।
नियमित योग स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन का आधार है।
योग करें • स्वस्थ रहें • प्रसन्न रहें
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— आयुष्य पथ न्यूज़ 📰🧘♂️
भोजन के साथ ज्यादा मात्रा में पानी पीना
भोजन जल्द बाजी में, बिना अच्छे से चबा के करना
तनाव, चिंता, अवसाद, डर, भय, क्रोध इत्यादि की भावना में भोजन करना ( ऐसे स्थिति में भोजन जहर बन जाता है।
भोजन के बाद कोल्ड ड्रिंक, फ्रिज का पानी, अन्य ठंडे खाद्य पदार्थों इत्यादि का सेवन करना।
90 प्रतिशत रोग केवल पेट के से शुरू होते हैं।
पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए, अन्यथा बीमारियों की कमी कभी नहीं रहेगी।
पेट के रोग उत्पन्न होने के कारण 👇
सुबह सूर्यास्त के बाद उठना
भूख से अधिक भोजन करना
भोजन के बाद तुरंत लेट जाना
देर रात्रि में भोजन करना
नीचे पढ़ें 👇
आजकल जिसको देखो वही कुछ ना कुछ बता रहा है, ये खा लो, वो खा लो, इसमें इतना प्रोटीन है, इतना विटामिन है, इत्यादि।
सोशल मीडिया पर ऐसे स्वघोषित डायटिशनियों एवं चिकित्सकों से बचें , जिनको भोजन का सही ज्ञान नहीं होता है, जिनको फ़ॉलो कर के हम स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते रहते हैं।
भोजन करने के महत्वपूर्ण नियम, जिनका पालन करने से कभी भोजन के पाचन से संबंधित कोई समस्या नहीं होगी, साथ ही किए गए भोजन से शरीर को भोजन का पूरा लाभ मिलेगा।
👇👇 थ्रेड पढ़ें
❇️कोशिश करें भोजन में 6 रसों को ( मीठा, खट्टा, नमकीन, तिक्त, कड़वा एवं कसैला) शामिल करें।
मीठा हमेशा भोजन के शुरू में लेना चाहिए।
इनसे कभी वात पित्त या कफ असंतुलित नहीं होंगे।
भोजन करने के महत्वपूर्ण नियम, जिनका पालन करने से कभी भोजन के पाचन से संबंधित कोई समस्या नहीं होगी, साथ ही किए गए भोजन से शरीर को भोजन का पूरा लाभ मिलेगा।
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भोजन के वक्त शारीरिक शांति ( बिना बोले, बिना हंसे, बिना टीवी देखे इत्यादि) के साथ साथ मानसिक स्थिति ( बिना क्रोध, ईर्ष्या, जलन भाव, डर इत्यादि) का ठीक होना भी अत्यंत आवश्यक होता है।
बिना इसके किए गए भोजन से सम्पूर्ण लाभ नहीं प्राप्त होगा, बीमारियां आने लगेंगी।