वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो रही है।
पावर कारपोरेशन के प्रबंधन के मनमानी तरीके से राजधानी लखनऊ सहित कई महानगरों में पूंजीपतियों के इशारे पर वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है जबकि सभी कर्मचारी संगठनों ने पूर्व में ही कहा था कि वर्टिकल व्यवस्था से राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर सकती है, लेकिन ऊर्जा प्रबंधन ने किसी की नहीं सुनी और ��स व्यवस्था को जबरदस्ती तानाशाही पूर्वक लागू किया गया, इस व्यवस्था के लागू होते ही राजधानी लखनऊ में हजारों की संख्या में संविदा कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला गया, सैकड़ो की संख्या में टेक्नीशियन, कार्यालय सहायक सहित योग्य एवं प्रशिक्षित कार्मिकों को लखनऊ से बाहर फेंका गया, कई अभियंताओं को अकारण ही निलंबित किया गया, साथ ही बिजली कर्मियों पर मनमाने आदेश थोपे गए।
पहले जहां प्रत्येक फी���र पर एक गैंग हुआ करती थी राउंड द क्लॉक तीन गैंग हुआ करती थी लेकिन आज सभी फील्डरों को मिलाकर एक उपकेंद्र पर मात्र एक गैंग है पूरे प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकाला गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
आ��� पावर कारपोरेशन ��ें लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी सं��्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 के नोटिस देकर उनके वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपू��्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं।
आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन ��ै और उसकी मनमानी नीतियों है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को काम पर वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग औ��� मीटिंग पर मीटिंग का खेल बंद कर धरातल स्तर पर प्रभावी रूप से कार्य किया जाए और ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके।
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ऊर्जा प्रबंधन द्वारा बिजली कर्मियों पर कीगई उत्पीड़न की कार्रवाइयों के विरोध में संघर्ष का शंखनाद।
मा. मुख्यमंत्री जी से अनुरोध हैकि बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को निरस्त कराये जाने की कृपा करें,जिससे बिजली कर्मी निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराते रहे।
*बिजली कर्मियों के विरोध को देखते हुए मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, विद्युत राज्य मंत्री श्री यशोपद नायक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस नहीं पहुंचे : डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान महा वितरण के सीएमडी और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी नहीं आए : विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी म��डल के एजेंडा पर गम्भीर मतभेद के चलते कोई चर्चा नहीं: संघर्ष समिति ने कहा फ्लॉप रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट*
मुंबई में 04 एवं 05 नवंबर को हुई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के विरोध में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स द्वारा केंद्रीय विद्युत मंत्री को भेजे गए विरोध पत्र और विरोध प्रदर्शन की नोटिस का प्रभाव यह रहा कि बिजली कर्मियों के गुस्से को देखते ���ुए डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री यशोपद नायक और यहां तक कि मेजबान प्रदेश महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी नहीं आए।
निजीकरण के पीपीपी मॉडल पर गम्भीर मतभेद के चलते महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण निगम महावितरण के सी एम डी लोकेश चन्द्र आई ए एस जो आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी है, ने भी इ��� मीट से दूरी बनाई और मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में नहीं आए। महाराष्ट्र की प्रमुख सचिव ऊर्जा श्रीमती आभा शुक्ला आई ए एस भी मीट में नहीं आई। यह चर्चा रही कि निजीकरण के मुद्दे पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश चंद्र आई ए एस और महामंत्री यूपीपीसीएल के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल आई ए एस के बीच मतभेद उभर कर सामने आ गए हैं जिस��ा परिणाम यह रहा कि बहु चर्चित मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि सुधार के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण पर देशभर के विद्युत वितरण निगमों से मुहर लगवाने की मंशा से मुम्बई में आयोजित की गई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही है। मीट में मुख्य ए���ेंडा विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल लागू करना था जिस पर बात ही नहीं हुई।
संघर्ष समिति ने बताया की नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की ओर से केंद्रीय विद्युत मंत्री को एक माह पूर्व ही सूचित कर दिया गया था कि यदि निजीकरण के एजेंडा पर डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट की जा रही है तो बिजली कर्मी इसे स्वीकार नहीं करते। बिजली कर्मियों से पहले चर्चा की जाए ���र यदि केन्द्रीय विद्युत मंत्री नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी के पदाधिकारियों से मीट के पहले वार्ता नहीं करते और मीटिंग से निजीकरण का एजेंडा नहीं हटाया जाता तो बिजली कर्मी विद्युत मंत्री के समक्ष विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों के विरोध का परिणाम यह रहा कि केंद्रीय विद्युत मंत्री, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और मह���राष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सी एम डी, इनमें से कोई भी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में नहीं आया।
संघर्ष समिति ने बताया कि मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 की सबसे चौंकाने वाली बात कह रही कि महाराष्ट्र के महावितरण के सी एम डी श्री लोकेश चंद्र आईएएस जो इस मीट के मेजबान भी थे और आयोजक भी वे मीट ��ें नहीं आए। संघर्ष समिति ने कहा की महाराष्ट्र के विद्युत वितरण निगम के बड़े अधिकारियों ने बताया कि निजीकरण को लेकर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष श्री लोकेश चंद्र और महामंत्री श्री आशीष गोयल जो उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन है के बीच में गहरे मतभेद हो गए हैं। इसी के चलते मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरफ फ्लॉप हो गई। उसमें केंद्रीय मंत्री से लेकर महाराष्ट्र के मुख्य��ंत्री तक आए और न ही अधिकांश प्रांतों के चेयरमैन और एम डी आए।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने एक साल पहले निजीकरण का निर्णय घोषित कर बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़ा दिया है। लगातार आंदोलन चल रहा है और कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगड़ चुका है। समय की आवश्यकता यह है की पावर कारपोरेशन के प्रबंधन को निजीकरण का निर्णय निरस्त कर वास्तविक सुधार कार्यक्रम पर बि��ली कर्मियों से वार्ता करनी चाहिए। बिजली कर्मी सुधार हेतु लगातार प्रयत्नशील है और उसके अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं।
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निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख संघर्ष समिति ने नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर वार्ता हेतु समय देने की मांग की : संघर्ष समिति का पक्ष सुने बिना आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर निर्णय लिया गया तो नियामक आयोग मुख्यालय पर मौन विरोध प्रदर्शन होगा
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को आज एक पत्र भेजकर मांग की है कि वह पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिये गए आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों पर पावर कॉरपोरेशन का जवाब सुनने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को अपना पक्ष रखने के लिए समय दें।
संघर्ष समिति ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि विद्युत नियामक आयोग से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भी संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल को समय न दिया तो विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर सैकड़ों बिजली कर्मी विद्युत नियामक आयोग के मुख्यालय पर मौन प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी नियामक आयोग के अध्यक्ष की होगी।
पत्र में कहा गया है कि समाचार पत्रों के माध्यम से यह विदित हुआ है कि विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने माननीय ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम केआरएफपी डॉक्यूमेंट पर नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों के संबंध में अलग से चर्चा की है। चर्चा यह भी है कि इस बैठक में यह तय हो गया है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा आपत्तियों पर दिए जाने वाले जवाब पर विद्युत नियामक आयोग ने अपनी सहमति दे दी है जिसके बाद निजीकरण का रास्ता प्रशस्त हो जाएगा।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यदि यह सही है तो यह बहुत ही गंभीर बात है कि सरकार, प्रबंधन और विद्युत नियामक आयोग के बीच निजीकरण को लेकर मिलीभगत हो गई है। एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के दाम पूर्व निर्धारित निजी घरानों के हाथ बेचने की साजिश है यह ।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में सबसे बड़े स्टेकहोल्डर बिजली के उपभोक्ता और बिजली के कर्मचारी हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से लगभग 60000 संविदा कर्मियों और साढ़े सोलह हजार नियमित कर्मचारियों की नौकरी समाप्त होने जा रही है। हजारों की संख्या में बिजली कर्मियों की पदावनती होने जा रही है। निजीकरण के दुष्प्रभाव से बिजली कर्मचारियों में भारी चिंता और गुस्सा व्याप्त है।
बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 315वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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विजया दशमी के पहले बोनस देने के बजाय पॉवर कॉरपोरेशन की बड़े पैमाने पर अभियंताओं और कर्मचारियों को जबरन सेवा निवृत्ति देने और अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की तैयारी : निजीकरण के लिये उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां करने का आरोप
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देश के अनुसार नवरात्र में निर्बाध बिजली आपूर्ति में लगे बिजली अभ��यंताओं और कर्मियों को विजया दशमी के पूर्व बोनस देने के बजाय पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने बड़े पैमाने पर अभियंताओं और कर्मचारियों को जबरन सेवा निवृत्ति देने और अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की तैयारी शुरू कर दी है जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो गया है।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता की पूरी सूची जारी कर इनके विरुद���ध चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाहियों की अद्यतन स्थिति तत्काल मांगी गई है जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर अभियंताओं को जबरन सेवा निवृत्त करना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि 24 सितंबर को जारी किए गए पत्र में तीन दिन के अंदर 27 सितंबर तक अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की अद्यतन स्थित मांगी गई है। संघर्ष समिति ने कहा कि अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता पदों की पदोन्नतियां के लिये चयन पहले ही हो चुका है। ऐसे में सभी अधीक्षण अभियंताओं और सभी मुख्य अभियंताओं की सूची जारी कर उनके बारे में अनुशासनामक कार्यवाहियों की अद्यतन स्थिति मांगने के पीछे जबरन सेवा निवृत्ति देना ही एकमात्र उद्देश्य दिखाई देता है।
संघर्ष समिति ने कहा कि शक्ति भवन के कॉरिडोर से मिल रहे समाचारों के अनुसार निजी घरानों को सहूलियत देने के लिए अभियंताओं और कर्मचारियों की बड़ी पैमाने पर जबरन सेवा निवृत्ति कर छटनी की जानी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन प्रबन्धन विगत कई महीनों से लगातार बिजली कर्मियों का अलग-अलग तरह से उत्पीड़न कर रहा है। अभी भी हजारों बिजली कर्मचारियों को फेशियल अटेंडेंस के नाम पर 3 माह से र���का वेतन नहीं दिया गया। बड़े पैमाने पर बिजली कर्मियों को दूर दराज स्थानों पर स्थानांतरित किया गया, हजारों संविदा कर्मियों को डाउनसाइजिंग के नाम पर निकाला गया और अब जबरन सेवानिवृत्ति देने की प्रक्रिया की जा रही है।
संघर्ष समिति ने कहा की बिजली कर्मी निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत हैं किंतु वह आम जनता को किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होने दे रहे हैं बिजली कर्मी नवरात्र, दशहरा और दीपावली पर जनता को कोई तकलीफ नहीं होने देंगे, यह संघर्ष समिति का निर्णय है ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की निजीकरण हेतु की जा रही दमनकारी नीतियों के विरोध में आंदोलन तेज करने का फैसला दशहरे के बाद लिया जाएगा जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी ।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज 307 व��ं दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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निजीकरण का टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आंदोलन: आन्दोलन के लगातार 300 दिन पूरा होने पर बिजली कर्मियों ने भरी हुंकार : प्रान्त भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन : आरएफपी डॉक्यूमेंट गोपनीय रखने के समाचार से बिजली कर्मियों में उबाल
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने चेतावनी दी है कि यदि जोर जबरदस्ती करके निजीकरण का टेंडर निकाला गया तो टेंडर निकलते ही बिजली कर्मी समस्त जनपदों में सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारंभ कर देंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबन्धन की होगी ।
निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 300 द��न पूरा होने पर आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर सामूहिक जेल भरो सत्याग्रह प्रारम्भ करने का संकल्प लिया।
राजधानी लखनऊ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश और राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज शक्ति भवन मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया और कहा कि बिजली कर्मी घाटे के झूठे आंकड़े,दमन और उत्पीड़न के नाम पर किसी भी स्थिति में निजीकरण की साजिश कामयाब नहीं होने देंगे।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यह विदित हुआ है कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन और आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के बीच यह तय हुआ है कि टेंडर की पूरी प्रक्रिया गोपनीय रखी जाय। इसके अंतर्गत पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के पांच निगम बनाकर पांच अलग अलग टेंडर निकाले जाएंगे जिनमें एक लिंक दी जाएगी। लिंक तभी खुलेगी जब टेंडर डालने वाली निजी कंपनी पांच लाख रुपए का भुगतान करें साथ में यह शपथ पत्र भी देना होगा की लिंक खुलने के बाद आरएफपी डॉक्यूमेंट को कोई कंपनी सार्वजनिक नहीं करेगी।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजी घरानों के साथ नियमित मुलाकात हो रही है और डिस्कॉम एसोशिएशन निजीकरण के मामले में बिचौलिए की भूमिका का निर्वाह कर रही है। ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के बीच में आ जाने के बाद से निजीकरण के मामले में लेन देन की चर्चा भी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ��ी सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति है।ऐसे में टेंडर की पूरी प्रक्रिया और आरएफपी डॉक्यूमेंट को गोपनीय रखना बहुत गंभीर बात है और इस तरह सारी प्रक्रिया में ही भ्रष्टाचार की बू आ रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यदि ऐसा होता है तो संभवत: यह देश के इतिहास में पहली बार होगा की लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को इतने गुपचुप ढंग से बेचा जा रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि आरएफपी डॉक्यूम��ंट को छिपाना बहुत ही गंभीर मामला है।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में विगत 28 नवंबर से लगातार चल रहे आंदोलन के आज 300 दिन पूरे होने पर बिजली कर्मियों,संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर संकल्प लिया कि वे किसानों और उपभोक्ताओं को साथ लेकर निजीकरण के विरोध में अपना आन्दोलन तब तक जारी रखेंगे जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
राजधानी लखनऊ में हुई विरोध सभा को शैलेन्द्र दुबे, जितेंद्र सिंह गुर्जर, अजय कुमार, बलबीर सिंह यादव, महेन्द्र राय, पी के दीक्षित, सुहेल आबिद,श्री चन्द ,दीपक चक्रवर्ती, मोहम्मद इलियास , प्रेम नाथ राय, सरजू ��्रिवेदी ने मुख्यतया सम्बोधित किया।
राजधानी लखनऊ के अलावा वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
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डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा - विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण : मुंबई में होने वाली मीट के आयोजक , होस्ट और समर्थक संगठनों में निजी घरानों का प्रभुत्व: ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजीकरण में मुख्य भूमिका के चलते उप्र में कांफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का मामला: निजीकरण के विरोध में प्रान्�� व्यापी विरोध प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बताया कि आगामी 04 एवं 05 नवम्बर को मुम्बई में हो रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा ही विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण है। ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन और निजी घरानों का इस मीट में प्रभुत्व खुलकर दिखाइ दे रहा है।
डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के लिए जारी किए गए एजेंडा से बिल्कुल साफ हो जाता है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजी घरानों के साथ मिली भगत है और निजीकरण में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की सबसे प्रमुख भूमिका है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का आयोजक इंडियन स्मार्ट ग्रिड फोरम है जो सोसाइटी एक्ट में रजिस्टर्ड एक निजी संस्था है। इस संस्था के वेब साइट पर जाने से पता चलता ह��� कि इसका मुख्य उद्देश्य ही निजीकरण की पहल है।
संघर्ष समिति कहा कि यह बहुत ही आपत्तिजनक बात है की उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल अध्यक्ष की हैसियत से पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में लगे हुए हैं वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में आशीष गोयल की निजी घरानों के साथ मिली भगत है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह सीधे-सीधे कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट (हितों के टकराव) का मामला है जो बहुत गम्भीर बात है ।
डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान टाटा पावर और सह मेजबान बीएसईएस राजधानी पावर और बीएसईए��� यमुना पावर हैं जो रिलायंस पावर की विद्युत वितरण कंपनियां है। ध्यान देने योग्य बात है कि मुख्य मेजबान टाटा पावर के सीईओ कई बार ऐलान कर चुके हैं कि टाटा पावर उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को खरीदने की लिए बेताब है।
संघर्ष समिति ने कहा कि ध्यान देने योग्य बात यह है कि इसी प्रकार की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट नवंबर 2024 में लखनऊ में हुई थी। इसी मीट में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का गठन किया गया था जिसमें महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सीएमडी लोकेश चंद्र को अध्यक्ष बनाया गया, उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल को महामंत्री बनाया गया और नोएडा पावर कंपनी के पी आर कुमार को कोषाध्यक्ष बनाया गया। लखनऊ में हुई मीट के कुछ दिन बाद ही पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की घोषणा कर दीगई थी।
संघर्ष समिति ने कहा डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के एजेंडा से बिल्कुल साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है और इसके बाद महाराष्ट्र में बिजली के निजीकरण की पूरी तैयारी है। ऐसे में संघर्ष समिति ने महाराष्ट्र के बिजली कर्मियों से अपील की है कि वे चार-पांच नवंबर को मुंबई में होने वाली डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का पुरजोर विरोध करें।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 296वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रांत भर में व्यापक विरोध प्र���र्शन किया।
आज मुख्यतया वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
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वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के साथ पांच शहरों के निजीकरण की भी तैयारी : निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी आंदोलन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आरोप लगाया है कि पांच शहरों की वर्टिकल रिस्ट्र���्चरिंग कर पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के समानांतर इन शहरों के निजीकरण की भी तैयारी चल रही है। निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि विदित हुआ है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम ���वं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों का जवाब तैयार कर लिया गया है और आरएफपी डॉक्यूमेंट के अनुमोदन के लिए पावर कॉरपोरेशन किसी भी समय विद्युत नियामक आयोग में जा सकता है जिससे निजीकरण की प्रक्रिया तीव्र गति से आगे बढ़ाई जा सके।
संघर्ष समिति ने विद्युत नियम आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार से अपील की है कि यदि पावर कारपोरेशन का निजीकरण का आरएफपी डॉक्यूमेंट अनुदान के लिए आता है तो पहले तो उसे अस्वीकृत कर दिया जाए और अगर उस पर चर्चा भी की जाती है तो उसके पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों से चर्चा की जाए क्योंकि निजीकरण से बिजली कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय होने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के समानांतर उत्तर प्रदेश के पांच अन्य शहरों के निजीकरण की तैयारी भी अंदर-अंदर की जा रह��� है। संघर्ष समिति ने कहा कि कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ शहर की बिजली व्यवस्था का ऊर्ध्वाधर पुनर्गठन (वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग) करने के पीछे मुख्य उद्देश्य इन शहरों की बिजली व्यवस्था का निजीकरण किया जाना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल जो ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में काम करने में अधिक रुचि ले रहे हैं, उन्होंने आल इंडिया ड���स्कॉम एसोशिएशन की वेबसाइट पर निजीकरण पर अपनी उपलब्धियां गिनाने के क्रम में स्वयं एक नया पॉइंट जोड़ा है जिसमें इस बात को लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ सुधार हेतु कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ की बिजली व्यवस्था की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की जा रही है। इससे बिल्कुल साफ हो जाता है कि इन शहरों के निजीकरण की साथ-साथ तैयारी चल रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में रहते हुए देश के जिन शहरों में भी बिजली व्यवस्था में सर्वाधिक सुधार किया गया उनमें से किसी भी शहर में इस प्रकार तुगलकी फरमान जारी कर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग जैसी विचित्र व्यवस्था नहीं लागू की गई। संघर्ष समिति ने उदाहरण देकर कहा बेंगलुरु, पटियाला, पुणे, हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, गुड़गांव, हिसार आदि ऐसे कई शहर है जहां बिजली व्यवस्था में गुणात्मक सुधार किया गया है और यह सब सरकारी क्षेत्र में चल रही व्यवस्था के अंतर्गत ही किए गए हैं।
बिजली के निजीकरण का विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में बड़ी सभाएं कर ज��रदार विरोध प्रदर्शन किया।
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आज दिनांक 11/09/2025 को उपखंड अधिकारी बमरौली द्बारा कार्यालय में अवर अभियंत,मीटर रीडर व लाइनमैन की समीक्षा बैठक की गई जिससे राजस्व प्राप्ति व बेहतर बिलिंग क्वालिटी हेतु निर्देशित किया गया।
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बिजली के निजीकरण में किस प्रकार से घोटाला किया जाता है इसकी छोटी सी झलक है इसको गौर से समझने का प्रयास करिए....
एक बड़े घोटाले के तहत सन 2010 में आगरा शहर की बिजली व्यवस्था टोरेंट पावर कंपनी को हैंडोवर की गई थी, उसके पश्चात जब 2015 में सी ए जी की जांच हुई और जांच के पश्चात CAG ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि "आगरा फ्रेंचाइजी की बिडिंग हेतु बनाए गए आर एफ पी में दर्शाए गए आंकड़े और परामर्शदाता द्वारा आंकलित आरक्षित दरें भ्रामक थी और गलत अवधारणाओं पर आधारित थी तो बिडिंग की संपूर्ण प्रक्रिया को ही निरस्त किया जाना चाहिए था और सही किए गए आंकड़ों के ��धार पर एक नई निविदा को आमंत्रित करने की शुरुआत करनी चाहिए थी"।
कैग की रिपोर्ट में घोटाले के कई बिंदु उजागर किए गए हैं जिन्हें दबा दिया गया है।
सी ए जी द्वारा उठाया गया एक और सबसे प्रमुख बिंदु यह है कि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने टी एंड डी हानियां 28.22% और संग्रहण क्षमता 82.34 प्रतिशत के आर एफ पी में दिए गए मूल आंकड़ों के स्थान पर टी एंड डी हानियां 44.85% और संग्रहण क्षमता 74.77% को अभिसूचित क���या जिसका न तो कोई आधार था न कोई तर्कसंगतता। टी एंड डी हानियां 28.2% के स्थान पर 44.85% बता देने से टोरेंट पावर को बहुत सस्ती दरों पर पॉवर कॉरपोरेशन बिजली दे रहा है और आज तक अरबों रुपए प्रतिवर्ष का घाटा हो रहा है।
सी ए जी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बीड मूल्यांकन प्रक्रिया में भारी अनियमितता होने के कारण अनुबंध के 18 वर्षों में पावर कारपोरेशन को 4601 करोड़ रुपए की हानि होगी। संघर्ष समिति ने कहा कि टोर��ंट पावर कंपनी को लागत से कम मूल्य पर बिजली देने में पावर कारपोरेशन को 14 वर्षों में 3432 करोड रुपए की हानि हो चुकी है। इससे स्पष्ट होता है कि कैग ने अपनी रिपोर्ट में गलत अनुबंध के करण घाटे का सही मूल्यांकन ��िया था।
वर्तमान में पावर कॉरपोरेशन ₹5.55 प्रति यूनिट बिजली खरीद कर टोरेंट पावर को मात्र ₹4.36 प्रति यूनिट के हिसाब से दे रहा है जिससे पावर कारपोरेशन के राजस्व को अरबों का घाटा हो रहा है और टोरेंट पावर कंपनी का मुनाफा बढ़ रहा है।
सी ए जी ने आगरा की बिजली व्यवस्था टोरेंट पावर को देने की बिडिंग की संपूर्ण प्रक्रिया को ही दस साल पहले गलत करार देते हुए इसे निरस्त किए जाने की अनुशंसा की थी किंतु कैग की ��िपोर्ट को दबा दिया गया जिसका दुष्परिणाम यह है कि गलत करार से पावर कारपोरेशन को प्रतिवर्ष अरबों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि आगरा फ्रेंचाइजी की बिडिंग में किए गए घोटाले और कैग की अनुशंसा दबा देने के मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और घोटाला करने वालों पर कड़ी कार्यवाही की जाय।
उपरोक्त घोटाले को देखते हुए पूर्वांचल और दक्षि��ांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त करने की कृपा करें।
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स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाले के चलते एक लाख 15 हजार करोड़ रुपए का एरियर खतरे में पड़ने की आशंका : निजीकरण हेतु प्रीपेड मीटर लगाकर डाउन साइजिंग करने की साजिश : निजीकरण के विरोध में प्रान्त भर में विरोध प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आशंका जताई है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाले के चलते विद्युत वितरण निगमों का 115000 करोड़ रुपए का एरियर खटाई में पड़ सकता है। संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया है कि ��िजीकरण हेतु स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के नाम पर बड़े पैमाने पर डाउन साइजिंग की जा रही है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि सीतापुर, गोण्डा आदि स्थानों पर पकड़ा गया स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाला निजी कंपनियों और दोषी उपभोक्ताओं की मिलीभगत के साथ किसी बड़ी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह ध्यान द��ने की बात है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पीछे सबसे बड़ा तर्क घाटे का दिया जा रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि वैसे तो पावर कार्पोरेशन प्रबंधन घाटे के झूठे और मनगढ़ंत आंकड़े दे रहा है। किन्तु स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियों की पुराने मीटर की रीडिंग शून्य करने या नष्ट करने के समाचार बहुत खतरनाक संदेश दे रहे हैं जिसे समय रहते न रोका गया तो बिजली राजस्व का बकाया वसूलना नामुमकिन हो जाएगा और वस्तुतः घाटा और बढ़ जाएगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि वर्तमान में विद्युत वितरण निगमों का उपभोक्ताओं पर लगभग 115000 करोड रुपए का बिजली राजस्व का बकाया है। पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन के आंकड़ों के अनुसार लगभग 110000 करोड रुपए का घाटा है। संघर्ष समिति प्रारंभ से ही यह बात कह रही है कि 115000 करोड रुपए का ��ाजस्व वसूल लिया जाए तो कोई घाटा नहीं रहेगा, उल्टे पावर कॉरपोरेशन 5000 करोड रुपए के मुनाफे में आ जाएगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार लगभग 34 लाख स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं और इनमें से लगभग 06 लाख स्मार्ट मीटर अभी तक वापस नहीं किए गए हैं। कितने लाख मीटर में पुरानी रीडिंग शून्य की गई है या नष्ट की गई है यह एक बड़ी जांच का विषय है।
संघर्ष समिति ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर निजीक��ण की प्राथमिक शर्त है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने के बाद निजीकरण होने पर निजी कंपनियों को राजस्व वसूली में किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा और उन्हें स्वतः राजस्व मिलता रहेगा।
स्पष्ट है कि निजीकरण हेतु स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं और इस नाम पर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने निजीकरण के पहले बड़े पैमाने पर डाउनसाइजिंग करना प्रारंभ कर दिया है।
वर्ष 2017 के मापदंडों के अनुसार ग्रामीण क्ष���त्र में प्रति सबस्टेशन 20 कर्मचारी और शहरी क्षेत्र में 36 कर्मचारियों का नियम था। बड़े पैमाने पर संविदा कर्मचारियों की डाउन साइजिंग करने के लिए मापदंड में प्रतिगामी परिवर्तन किया गया। उपभोक्ताओं की संख्या 2017 की तुलना में कई गुना बढ़ चुकी है। इसके बावजूद अब शहरी क्षेत्र में प्रति सबस्टेशन 18:30 कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्र में प्रति सबस्टेशन 12.5 कर्मचारी का मापदण्ड बनाकर बड़ी स��ख्या में संविदा कर्मी निकाले जा रहे हैं। यह सब निजी घरानों की मदद के लिए किया जा रहा है।
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निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी : ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की संविधानेतर गतिविधियों पर संघर्ष समिति ने ��ठाया सवाल*
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बारे में ऑल इंडिया डिस्काम एसोशिएशन की संविधानेतर गतिविधियों पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश में सवाल खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजीकरण को लेकर की जा रही कार्यवाहियों पर तत्काल रोक लगाई जाय। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 268 वें दिन प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि पता चला है कि नवंबर 2024 में लखनऊ में हुई विद्युत वितरण कंपनियां की बैठक में निजी घरानों के साथ मिली भगत में गठित आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में न केवल रुचि ले रही है अपितु इस एसोशिएशन की आड़ में निजी घरानों का हित साधने की कोशिश भी की जा रही है जो अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण और निन्दनीय है।
संघर्ष समिति ने कहा कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन में विद्युत वितरण निगम के मौजूदा चेयरमैन और प्रबंध निदेशकों के साथ निजी घरानों के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफीसर हैं । एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल के पद पर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष ��र भारत सरकार के पूर्व विद्युत सचिव आलोक कुमार स���वानिवृत्त आई ए एस है। एसोशिएशन के जनरल सेक्रेटरी उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के मौजूदा अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि डॉ आशीष गोयल का पॉवर कारपोरेशन का चेयरमैन रहते हुए इस प्रकार निजी घरानों के साथ एसोसिएशन बनाना सरकारी गोपनीयता का हनन है और हितों के टकराव का मामला भी है। संघर्ष समिति ने कहा कि पारदर्शिता का तकाजा है कि ऐसी परिस्थितियों में डॉक्टर आशीष गोयल को या त�� अपने को आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से अलग कर लेना चाहिए अन्यथा स्वयं उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष का पद छोड़ देना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह भी पता चला है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन देश के सभी विद्युत वितरण निगमों से करोड़ों रुपए का चंदा ले रही है। एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष पद पर एक बड़े निजी घराने के सीईओ को रखा गया है। यह चर्चा है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने आल इ���डिया डिस्कॉम एसोशिएशन को कई करोड़ का चंदा दिया है। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि करोड़ों रुपए का चंदा लिया जा रहा है तो सरकार को यह जांच करना चाहिए कि यह संगठन किसने बनाया है, किस उद्देश्य से बनाया है, देश के विद्युत वितरण निगम किस मद में इसे चंदा दे रहे हैं और इसका ऑडिट कैग से कराया जाना चाहिए। सरकार की अनुमति के बिना इस प्रकार संगठन बनाकर करोड़ों करोड़ों रुपए का चंदा लिया जाना पूरी तरह अनैतिक औ��� अनुचित ��ै।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह भी जानकारी मिल रही है कि उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष और भारत सरकार के पूर्व विद्युत सचिव सेवा निवृत आई ए एस श्री आलोक कुमार उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के उच्च अधिकारियों की अनौपचारिक बैठक ले रहे हैं और उन्हें निजीकरण की प्रक्रिया तेज करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह बहुत गम्भीर बात है जिसकी जांच होनी चाहिए और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण न कर पाने से हताश और निजीकरण करने के लिए उतावले पॉवर कारपोरेशन के पूर्व और वर्तमान अधिकारी निजी घरानों के साथ मिलकर संविधानेतर कार्य कर रहे हैं ।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 268 वें दिन बिजली कर्मियों ने निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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निजीकरण का टेण्डर होने पर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और सामूहिक जेल भरो आंदोलन का संघर्ष समिति ने जारी किया एलर्ट : निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट पर कोई निर्णय लेने के पहले संघर्ष समिति से बात की जाए- विद्युत नियामक आयोग को पत्र भेजकर संघर्ष समिति ने की मांग।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. ने विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन को पत्र भेजकर मांग की है कि पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा तैयार किये गए निजीकरण के आर.��फ.पी. डाक्यूमेंट को विद्युत नियामक आयोग कोई मंजूरी न दे और इस मामले में संघर्ष समिति को अपना पक्ष रखने हेतु विद्युत नियामक आयोग वार्ता हेतु समय दें। संघर्ष समिति ने निजीकरण की गतिविधियां तेज होते देख बिजली कर्मचारियों को सचेत करते हुए एलर्ट जारी किया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेण्डर होने के बाद अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और साम��हिक जेल भरो आंदोलन की तैयारी रखी जाय।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण होने के बाद बिजली कर्मचारियों का भविष्य अंध��ारमय हो जाएगा अतः निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट पर कोई भी अभिमत देने के पहले विद्युत नियामक आयोग को संघर्ष समिति से वार्ता करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने इस बावत नियामक आयोग के चेयरमैन को पत्र भेजकर वार्ता का समय मांगा है। संघर्ष समिति का कहना है कि निजीकरण के बाद लगभग 50 हजार संविदा कर्मियों की छटनी हो जायेगी और लगभग 16 हजार 500 नियमित कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ जायेगी। कॉमन केडर के अभियं���ाओं और जूनियर इंजीनियरों पर नौकरी जाने और पदावनति का खतरा उत्पन्न होगा। ऐसी स्थिति में निजीकरण से सबसे अधिक दुष्प्रभाव बिजली कर्मियों पर पड़ने जा रहा है अतः बिना बिजली कर्मियों का पक्ष सुने नियामक आयोग को कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए अपितु सीधे सीघे पॉवर कार्पोरेशन द्वारा भेजे गये आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट को निरस्त कर देना चाहिए।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों की आज लखनऊ में हुई बैठक में पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा जोर जबरदस्ती से निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाये जाने के घटनाक्रमों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गयी। संघर्ष समिति ने प्रदेश के सभी बिजली कर्मियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं को एलर्ट जारी करते हुए आह्वान किया है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेण्डर किया जाता है तो बिजली कर्मी अ��िश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और सामूहिक जेल भरो आंदोलन के लिये तैयार रहें।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्व निदेशक वित्त श्री निधि नारंग ��्वारा अवैध ढंग से नियुक्त किये गए ट्रांजैक्शन कंसल्टेन्ट ग्रांट थार्टन के साथ मिलीभगत कर आ.एफ.पी. डाक्यूमेंट कुछ निजी घरानों की मदद करने के लिए बनाया गया था। उ.प्र. शासन ने संभवतः इन्ही बातों को देखते हुए श्री निधि नारंग को सेवा विस्तार देने से मना कर दिया और अब नए निदेशक वित्त श्री संजय मेहरोत्रा बन गये हैं। अतः श्री निधि नारंग द्वारा तैयार किये गए निजीकरण के दस्तावेज को वैसे ही निरस्त कर द���ना चाहिए।
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आन्दोलन के 250 दिन पूरे होने पर बिजली कर्मियों ने प्रान्त भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन कर व्यक्त किया आक्रोश : निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों के वापस होने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प
निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 250 दिन पूरे होने पर आज बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों , जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। बिजली कर्मियों ने संकल्प लिया कि जब तक निजीकरण का निर्णय निरस्त नहीं किया जाता और समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जाती संघर्ष जारी रहेगा।
राजधानी लखनऊ में मध्यांचल मुख्यालय पर भारी बारिश के बीच बिजली कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि शीर्ष प्रबन्धन की निजी घरानों के साथ मिलीभगत ��ै और आठ माह से निजीकरण न कर पाने के कारण हताश प्रबंधन बिजली कर्मियों का लगातार उत्पीड़न कर रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्पीड़न का उद्देश्य बिजली कर्मियों का मनोबल तोड़ना है किंतु बिजली कर्मी किसी कीमत पर निजीकरण स्वीकार नहीं करेंगे।
उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त कराने हेतु संघर्ष समिति की मांग है कि मार्च 2023 की हड़ताल के बाद ऊर्जा मंत्री द्वारा समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के वापस लिये जाने के निर्देश के अनुपालन में समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाय।
निजीकरण के नाम पर 55 साल की उम्र और डाउन साइजिंग के नाम पर हटाये गये सभी संविदा कर्मी बहाल किये जाय।
उत्पीड़न की दृष्टि से बिजली कर्मियों के किये गये सभी ट्रांसफर निरस्त किये जाय।
फेसियल अटेंडेंस के नाम पर जून और जुलाई माह का रोका गया वेतन तत्काल बिजली कर्मियों को दिया जाय।
उत्पीड़न ���े नाम पर स्टेट विजिलेंस की जांच कराकर शीर्ष पदाधिकारियों के विरुद्ध की गई फर्जी एफ आई आर वापस ली जाए।
रियायती बिजली की सुविधा समाप्त करने की दृष्टि से धमकी देकर जोर जबरदस्ती से स्मार्ट मीटर लगाने की कार्यवाही तत्काल बन्द की जाय।
आज वाराणसी, आगरा, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, हरदुआगंज, जवाहरपुर, परीक्षा, पनकी, ओबरा, पिपरी और अनपरा में मुख्यतया बड़ी विरोध सभा और प्रदर्शन किया गया।
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पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा श्री निधि नारंग के सेवा विस्तार हेतु भेजे गए पत्र से बिजली कर्मचारियों में भारी गुस्सा व्याप्त : निजीकरण के नाम पर हो रही लूट को रोकने की मुख्य सचिव से अपील : निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ��े प्रदेश के नए मुख्य सचिव श्री शशि प्रकाश गोयल से अपील की है कि वह पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा निदेशक वित्त निधि नारंग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी न दें और उत्तर प्रदेश में निजीकरण के नाम पर हो रही है भारी लूट को रोकने की कृपा करें।
संघर्ष समिति ने निधि नारंग को सेवा विस्तार देने का पत्र भेजने के मामले में डॉक्टर आशीष गोयल पर गंभीर आरोप लगाया है। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसा लगता है कि पॉवर कारपोरेशन का अध्यक्ष रहते हुए डॉक्टर आशीष गोयल ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में काम कर रहे हैं और निजी घरानों का हित देख रहे हैं। संघर्ष समिति ने सवाल किया कि आखिर डॉक्टर आशीष गोयल एक व्यक्ति विशेष को बार-बार सेवा विस्तार देने के लिए क्यों लालायित हैं । कहीं यह सब निजी घरानों से मिली भगत का परिणाम तो नहीं है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि यह पता चला है कि पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल ने शासन को एक पत्र भेज कर पावर कॉरपोरेशन के निदेशक वित्त श्री निधि नारंग का कार्यकाल छह माह और बढ़ाए जाने का प्रस्ताव किया है।
उल्लेखनीय है कि 30 जुलाई को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा श्री निधि नारंग के कार्यकाल को बढ़ाए जाने के पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल के 14 जुलाई के प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया गया है।
संघर्ष समिति ने बताया कि यह पता चला है कि ��्री निधि नारंग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के प्रस्ताव में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल ने लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया अभी अधूरी है और श्री निधि नारंग निजीकरण हेतु बनाई गई टेंडर मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष है। अतः उनका कार्यकाल 06 महीने के लिए और बढ़ा दिया जाए जिससे निजीकरण की प्रक्रिया सुगमता से पूरी हो सके।
संघर्ष समिति ने नव नियुक्त मुख्य सचिव श्री शशि प्रकाश गोयल को प्रेषित पत्र में कहा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया में निदेशक वित्त श्री निधि नारंग की भूमिका प्रारंभ से ही बहुत विवादास्पद रही है।
संघर्ष समिति ने पत्र में लिखा है कि श्री निधि नारंग की निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसलटेंट नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया में हितों के टकराव का प्राविधान हटवाने में बड़ी भूमिका रही है। निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को झूठा शपथ पत्र देने के मामले में भी श्री निधि नारंग ने ही क्लीन चिट दी है।
संघर्ष समिति ने लिखा है कि निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन की निदेशक वित्त श्री निधि नारंग से बहुत व्यक्तिगत निकटता है। यह आम चर्चा रही है कि ग्रांट थॉर्टन ���े लोग अधिकांश समय श्री निधि नारंग के कमरे में ही बैठकर काम करते थे और श्री निधि नारंग उन्हें गोपनीय पत्रावली भी दिखते थे।
संघर्ष समिति ने कहा कि श्री निधि नारंग को तीसरी बार सेवा विस्तार देने का पत्र भेज कर पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल घोटाले के केंद्र बिंदु में आ गए ��ैं। निधि नारंग को निजीकरण के नाम पर पहले ही दो बार आशीष गोयल की अनुशंसा पर सेवा विस्तार दिया जा चुका है। अब एक बार फिर निजीकरण के नाम पर श्री निधि नारंग को छह माह का सेवा विस्तार देना सर्वथा अनुपयुक्त होगा। विशेषतया तब जब श्री निधि नारंग की कॉर्पोरेट घरानों के साथ निकटता जग जाहिर है और ट्रांजैक्शन कंसलटेंट, कॉर्पोरेट घराने, निधि नारंग और डॉ आशीष गोयल की निजीकरण की प्रक्रिया में मिली भगत है।
संघर्ष समिति ने मुख्य सचिव से मांग की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए श्री निधि नारंग को किसी भी कीमत पर सेवा विस्तार न दिया जाय।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 246 वें दिन बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में फर्जी आंकड़ों के आधार पर माननीय मुख्यमंत्री जी को गुमराह कर किए जा रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में आज राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश भर में हुए जबरदस्त विरोध प्रदर्शन। बिजली कर्मचार��यों ने प्रदेश के गांव-गांव घर-घर तक बिजली पहुंचाने का काम किया है अब बिजली के निजीकरण के बाद यह सारे गांव लालटेन युग में पहुंचने वाले हैं।
कुछ ब्यूरोक्रेट्स, राजनेता, बड़े पूंजीपतियों के साथ मिलकर बिजली के निजीकरण के नाम पर बड़ा घोटाला करने की फिराक में है।
माननीय मुख्यमंत्री से अनुरोध है कि निजीकरण के नाम पर हो रहे घोटाले को रोके तथा गरीबों के हित में, किसानो के हित में, छोटे व्यापारियों के हित में, कर्मचारियों के हित में, छात्रों के हित में, बेरोजगार के हित में, सरकारी विभागों में पिछड़ों एवं दलितों का आरक्षण बचाने के लिए व्यापक जनहित में बिज���ी के निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त करने की कृपा करें।
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