एक तो हार ऊपर से अपनी फ़ज़ीहत 😂😂
पत्रकार: मोदी के निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी की हार क्यों हुई?
बीजेपी की सहयोगी पार्टी के नेता: क्योंकि इस चुनाव में सिर्फ पढ़े-लिखे मतदाताओं ने वोट दिया था।
😂
भाजपा के नेता हमेशा से जवाहर लाल नेहरू जी, इंदिरा गांधी जी, राजीव गांधी जी, सोनिया गांधी जी और राहुल गांधी जी के लिए अभद्र भाषा का उपयोग करते आये है लेकिन जब मैंने ये ऑडियो आज टीवी डिबेट में चला दिए तो एंकर थोड़ी से असहज नजर आयी।
आप खुद सुनिए और तय कीजिये की गालीबाज कौन है!!
@poornima_mishra
कांग्रेस के इस अकेले प्रवक्ता का सामना करने के लिए भाजपा के 5-7 प्रवक्ता और 3-4 एंकरों को एक साथ आना पड़ेगा !
क्योंकि कांग्रेस के प्रवक्ता यश श्रीवास्तव का सामना भाजपा का 1 प्रवक्ता और 1 एंकर तो कर ही नही पा रहा है 😂🤣
@YashRRJ भाई क्या दिमाग पाया आपने, आपको सुनकर पूरा दिन बन जाता है !
इतने बड़े और संवेदनशील मामले में, इतनी देरी और तमाम ग़लतियों के बाद,
चुनाव आयोग एक संक्षिप्त हलफ़नामा देकर पूरे देश को इंतज़ार करा रहा है।
क्या ये गंभीरता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न नहीं है ??
संविधान में नागरिकों के जीवन व समय को किसी नेता की मर्ज़ी पर बर्बाद करने की छूट नहीं।
अभी तक चित्रा त्रिपाठी और BJP के लोग कांग्रेस प्रवक्ता यश को नहीं झेल पा रहे थे तब तक कांग्रेस ने एक और प्रवक्ता को फ्री हैंड दे दिया है।
प्रोफेसर रतन लाल ने ऐसा जवाब दिया की पूरी मीडिया पैनल में सन्नाटा छा गया खासकर चित्रा त्रिपाठी जी मुँह पर 😂
ये बंदा नाम नहीं, ब्रांड है!
राजनीति का नाना पाटेकर है - यास श्रीवास्तव भाई!
एक स्वर में लोगों का हिसाब-किताब कर देते हैं! तथ्यों से ऐसी धुलाई कि बोलती बंद!
शेर अकेला ही काफी है!
स्मृति ईरानी ने प्रधानमंत्री से पूछा - कब तक चुप बैठेंगे आप?
• जब महंगाई की मार से गरीब बच्चे की भूख चीख-चीखकर पुकारती है
• जब कर्ज में डूबकर किसान आत्महत्या करते हैं
• जब देश की राजधानी में बेटी का बलात्कार होता है
तब क्यों बंद रहते हैं आपके कान?
आज एक ही दिन में ये दूसरा रावण फूँका है,
अराजकता का बात करने वालों को,
बेनामी, नफ़रती, सड़ी हुई RSS का नाम सुनते ही आग लग गई।
पूरा देश विश्वास रखे, इन चंदा चोरों की कुर्सी जा रही है, देखते जाइए!!
सुधीर तुम 2014 तक पहुंचे हो तो 2012 भी चलते है..
100 करोड़ की दलाली, तिहाड की सैर तो याद होगी ही?
और बिल्कुल सत्ता परिवर्तन लोकतांत्रिक चुनाव से ही होगा,
और चुनाव के बाद एंकरों के भेष में निक्कर पहनकर घूम रहे संघियों का अंत रावण के अहंकार की तरह ही होगा।
और तब साहेब-ए-बर्बादी बचाने के लिए मौजूद नही होंगे।
कनाट प्लेस के व्यापारियों के साथ खेल हो गया!
कनाट प्लेस पर अपना व्यवसाय चलाने वाले एक व्यापारी मित्र टकरा गए। उन्होंने जो बताया वो चौंकाने वाली बात है!
बहुत से व्यापारियों के पास पुलिस अधिकारियों समेत कईयों के फोन आए कि प्रोटस्ट के ख़िलाफ़ बयान दो। बताओ कि बिज़नेस मारा जा रहा है। व्यापारी मित्र रूपी सूत्र के मुताबिक़ जो नहीं कर रहे थे ऐसा उनको बार फ़ोन किया गया। मित्र-सूत्र का कहना है कि व्यापार प्रभावित हुआ है इसमें शक नहीं लेकिन वो इसलिए हुआ है क्योंकि सरकार ने जंतर मंतर बंद कर दिया और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग कनाट प्लेस के इलाक़े में कर दी गई। और ये भी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से व्यापारियों को डर नहीं था और न है बल्कि उन ‘हुड़दंगी तत्वों’ से डर था और आगे भी होगा जिनके हुड़दंग पर भी पुलिसवालों मूकदर्शक बने नज़र आए।
मेरे इस पोस्ट के ख़िलाफ़ भी पुलिस/मोदी सरकार का इकोसिस्टम फ़ोन कर व्यापारियों से बाइट दिला दे तो आश्चर्य मत करिएगा!