People like Anand Ranganathan are intellectual prostitutes. They prostitute their intellect and knowledge in service of the ideology of those in power, seeking benefits for themselves and their communities.
Even during Akbar's time, there existed such people who treid to tell people that Akbar was one of the Vishnu's several avatars.
They wrote allah-upnishad to promote Akbar's philosophy and ideology.
Till arrested students in every state are released we will continue!
The governments of Bihar and Assam released orders of release after the pressure of the students' movement.
The West Bengal government will either release the students or we will take to the streets!
ये सर ने सरकार को टैक्स व्यवस्था पर रगड़ दिया ।
जब नागरिक पहले से ही बुनियादी ढांचे के नाम पर IT, GST, Road Tax, Petrol tax और Toll Tax चुकाते हैं। फिर भी, गड्ढों, दुर्घटनाओं और NHAI के बढ़ते कर्ज पर एक तीखा सवाल उठता है.
RSS द्वारा देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर क़ब्ज़े की कहानी : भाग 2
आजकल शिक्षा जगत पर RSS के बढ़ते प्रभाव और विश्वविद्यालयों के भगवाकरण को लेकर देशभर में गंभीर चर्चा चल रही है। ऐसे समय में मैं आपके लिए कुछ ऐसे सबूत साझा करने की यह श्रृंखला लेकर आया हूँ, जिन्हें हमने पिछले कई वर्षों से लगातार आपके सामने रखा था, ताकि समय रहते आपको आगाह किया जा सके। आज वही सवाल राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुके हैं।
यह वीडियो भी कुछ महीने पुराना है, जिसे मैंने अपने सोशल मीडिया संग्रहालय से आपके लिए निकाला है। इस वीडियो को स्वतंत्र पत्रकार @harshdelhise ने बनाया था। आज इसे दोबारा साझा करने का उद्देश्य केवल इतना है कि लोग देखें—जो बातें तब कही जा रही थीं, वे आज किस तरह वास्तविकता के रूप में हमारे सामने खड़ी हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में "युवा कुंभ" जैसे आयोजनों के नाम पर RSS से जुड़े कार्यक्रम खुलेआम आयोजित किए जा रहे थे। कई जगह कॉलेज प्रशासन अलग-अलग नामों से अनुमति देकर इन कार्यक्रमों का हिस्सा बनता दिखाई दिया। ऐसे आयोजनों को लेकर छात्र संगठनों और शिक्षकों के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय की संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल उठाए और विरोध भी दर्ज कराया।
विश्वविद्यालय विचार, बहस, शोध और आलोचनात्मक चिंतन के केंद्र होने चाहिए। लेकिन जब सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों का उपयोग किसी एक वैचारिक एजेंडे के प्रचार के लिए होने लगे, तो यह केवल एक कार्यक्रम का सवाल नहीं रह जाता, बल्कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक चरित्र का प्रश्न बन जाता है।
छात्र विरोध में उतर चुके हैं, जनता सवाल पूछ रही है और कैंपस का माहौल बिगाड़ने की यह कोशिश अब सबके सामने है। सरकारी संस्थानों को किसी भी वैचारिक या राजनीतिक प्रभाव का माध्यम बनाने की प्रवृत्ति पर गंभीर बहस और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।
यह श्रृंखला आगे भी जारी रहेगी। दस्तावेज़ों, वीडियो और तथ्यों के साथ हम उन घटनाओं को सामने लाते रहेंगे, जिन्हें उस समय नज़रअंदाज़ किया गया, लेकिन जिनके परिणाम आज पूरे देश के सामने दिखाई दे रहे हैं।
अभिजीत दीपके: BJP की तरफ़ से उन्हें पार्टी में शामिल होने का ऑफर धमकियों के साथ मिला,
उनके मुताबिक कहा गया कि BJP जॉइन कर लो तो उनके और उनके परिवार की ज़िंदगी बेहतर हो जाएगी।
इस पर अभिजीत ने कहा, मैं मोदी और अमित शाह के पोते-पोतियों की उम्र का हूँ अगर बच्चों को धमकाना पड़े तो ऐसी ताकत का क्या मतलब।
Desh badal raha hai 🔥
A group of school girls in #Rajasthan came out to the streets in protest, demanding something that should never have been a demand in the first place....
teachers in their school.
Dear Delhi GenZ
If any student (who peacefully participated at Jantar Mantar protest ) is facing threats from Right Wing goons in Delhi, don’t be scared, invite them home and let us know.
We will take care !!