कोक्रोच जनता पार्टी का उदय कोई हासपरिहास का विषय नहीं है बल्कि इसके पीछे भी डीपस्टेट को वो ही एजेंडा दिखाई दे रहा है जो जेन-जी के नाम पर बंगलादेश और नेपाल में नज़र आया था।दुख की बात ये है कि ऐसे देशद्रोही विचार के पीछे हमारे अपने देश के फ्लाप नेता का नाम जुड़ जाता है।आख़िर क्यों?
जनता द्वारा सजा मिलने के बाद ममता अब भयभीत है और उस इंडी गठबंधन का समर्थन मांग रही है जिसे शुरू से इन्होंने कुछ नहीं समझा था । अब क़ानूनी सज़ा की आशंका से इन्हें उनका ही साथ चाहिए । एक तो नवाबों के नगर से दोडे दोडे आ भी गये।
कहावत है कि ….र……र - मौसेरे भाई ।
15 वर्षों के निरंकुशशासन से मुक्ति तो मिल गई परंतु देश के किसी कोनेमें ऐसी अराजकता, कुशासन,जन-उत्पीड़न,हिंसा, अन्याय, अत्याचार और देश विरोधी गतिविधियाँ फिरनहीं पनप सके,ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करना केंद्र तथा राज्य सरकार का प्रमुख दायित्व बन गया है बंगाल में राहतबड़ी प्राथमिकता है
��ंदेशखाली,RGकर आदि अनगिनत घटनाओं के बावजूद चुनावी नतीजों के सत्य को नकारना निसंदेह राक्षसीप्रवृत्ति का द्योतक है।सर्पूण्खा ने भी असलियत छिपा कर सभी राक्षसी प्रवृत्ति के लोगों को एकजुट कर रावण के सम्पूर्ण कुल के विनाश को न्यौता दिया था,उसी भांति आज भी विपक्ष एक होता नज़र आ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले पवन खेड़ा को लताड़ा जाना और अब ज़मानत देना , कैसे न्याय संगत ठहराया जा सकता है ।एक ग़ैर राजनीतिक महिला पर फ़र्ज़ी आरोप लगाकर बच कर निकल जाना , क़ानून का मजाक बना कर रख दिया है । माननीय राष्ट्रपति जी को दखल देकर एक निर्दोष महिला की गरिमा बचानी चाहिए ।
TCS और Lenscart जैसी कंपनियों में असंवैधानिक गतिविधियाँ धड़ल्ले से चल रही है और एक धर्म विशेष के कर्मचारी विशेषकर युवतियों और महिलाओं को शिकार बनाया जा रहा है । उच्च प्रशासन की चुप्पी निंदनीय है । कंपनी के शीर्ष पदाधिकारियों से अविलंब उचित कार्यवाही सुनिश्चित करने की अपील है।
राहुल गांधी पर दोहरी नागरिकता का प्रश्न यदा कदा आता रहा है लेकिन ना तो राहुल गांधी और ना ही केंद्रीय सरकार इस ���र कुछ बोल रहे हैं ।ये गोपनीयता क्यों? सार्वजनिक जीवन में इस अपराधिक मामला का रहस्य सुलझाना आवश्यक हैशीर्ष न्यायालय को स्वयं संज्ञान लेकर इस मामले का पटाक्षेप करना चाहिए।
कांग्रेस के बड़बोले प��रवक्ता अब मुँह छुपाते भाग रहे हैं।अनर्गल बयान और झूठे-फ़र्ज़ी आरोपों के चलते सुर्ख़ियाँ बटोरने तथा हाईकमान की नज़रों में राज्यसभा हेतु नंबर बढ़ाने के चक्कर में ये भूल बैठे कि अबकीबार मधुमक्खी के छत्ते में हाथ ही नहीं दिया अपितु सशरीर छत्ते में ही घुस गये।
अब ईरान की हटधर्मिता साफ़ नज़र आती है, कम से कम घोषित युद्ध विराम काल में होर्मुज को खोल देना चाहिये ताकि फँसे हुए जहाज़ गंतव्य तक जा सके और दु���िया भर के करोड़ों लोगों को ऊर्जा संकट से राहत मिल सके ।इस प्राकृतिक रास्ते को औज़ार के रूप में इस्तेमाल करना मानवता के प्रति अपराध है ।
जैसी आशंका थी वही हुआ।बेमानी वार्ता का यही हश्र होना था क्योंकि कोई भी पक्ष ईमानदार नहीं था और पाकिस्तान जैसे ग़ैर ज़िम्मेदार मुल्क में कोई भी शांति समझौता संभव ही नहीं था । दोनों पक्षों को भारत के बारे में सोचने की ज़रूरत है जिसकी बात में दम है और नेतृत्व में क्षमता ।
एक आतंकी मुल्क में शांति वार्ता बेमानी होगी । वैसे भी बिना इज़रायल के वार्ता का कोई औचित्य ही नही है । ये इज़रायल और अमेरिका का ईरान के विरुध्द साझा अभियान था त��� अब इज़रायल की भूमिका क्यों नही? अस्तित्व तो ईरान और अन्य खाड़ी के देशों का दाव पर है ।
जस्टिस वर्मा के संदिग्ध परिस्थितियों के बीच और सुप्रीम कोर्ट के महाभियोग की सिफारिश के भी कई महीनों बाद ,संसदीय कार्यवाही शुरू होने के कगार पर पद त्याग कर बच निकलने की कोशिश को महामहिम राष्ट्रपति जी को अस्वीकार कर देना चाहिये जिससे न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर कड़ा संदेश जा सके।
मालदा की घटना देश के प्रजातांत्रिक मूल्यों पर एक काला धब्बा है और राज्य सरकार के लिए डूब कर मर जाने जैसा।सुप्रीम कोर्ट का दख़ल अभी अधूरा है,निष्पक्ष चुनाव इन परिस्थितियों में संदिग्ध है अतः राज्य सरकार को तुरंत बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगा फ़िलहाल चुनाव स्थगित कर देना चाहिये।
देश में गैसऔर पे���्रोलियम पदार्थों के पर्याप्त भंडारण के बावजूद मीडियाद्वारा कृत्रिम कमी की लगातार रिपोर्टों से ऐसा लगरहा है जैसे ये प्रायोजित कार्यक्रम है।एजेंसियों के सामने लाइन लगाकर चयनित लोगों से इंटरव्यू लेना सटीक नाटक लगरहा है।कई जगहों पर तो एक तबका बढ़ चढ़कर रो रहे हैं ।
ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति के कार्यक्रम कोअवरुद्ध करके औरअमर्यादित टिप्पणी करके सारी हदें पार कर दी है।उनकी बेजा हरकतों पर केंद्र सरकार की चुप्पी ने उन्हें बेलगाम बना दिया है।वे तानाशाह बनती जा रही है।���े सब पराकाष्ठा के पार हो चुका है जो इनके राजनीतिक भविष्य को अवश्य धूमिल करेगा ।
सुप्रीम कोर्ट की पालना हेतु चुनाव आयोग बंगाल में टुकड़ों में संशोधित मतदाता सूची जारी करेगा जो संविधान सम्मत नहीं होगा । बेहतर यही होगा कि SIR का सम्पूर्ण कार्य होने के बाद ही सूची जारी की जानी चाहिए । इसमें यदि चुनाव स्थगित करना पड़े तो भी उचित ही होगा।
खोमेनी कोई राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष नहीं था जो भारत सरकार संवेदना व्यक्त करे। इस समय खाड़ी में फँसे भारतीयों क�� सुरक्षा की चिंता होनी चाहिए जिनका जीवन ईरान ने बेवजह खतरे में डाल दिया है । कांग्रेस को पता ही नहीं है कि उसे क्या करना चाहिए । ऐसा भी क्या मोदी विरोध ?
चुनाव आयोग की ऐसी क्या मजबूरी है जो मिथ्या आरोप के बावजूद राहुल गांधी को कोर्ट में चुनौती नहीं दे रहा ? ऐसा ना करके आयोग अपने पक्ष को कमजोर कर रहा है । बार-बार के कथित “बमों” का पटाक्षेप आवश्यक है या ये माना जाए कि दाल में कुछ काला है??
यदि राहुल गांधी के पास चुन���व आयोग अथवा भाजपा के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं तो उन्हें शपथ पत्र के साथ सुप्रीम कोर्ट जाना ही चाहिए अन्यथा आरोप लगा कर बार-बार भाग जाना प्रबुद्ध जनता के सामने एक चुनावी पैंतरा ही कहलाएगा जिसके झाँसे में जनता अब नहीं आनेवाली ।
@TheIncNews क़तई नहीं । यदि आपके पास चुनाव आयोग के ख़िलाफ पुख्ता सबूत हैं तो आपको शपथ पत्र के साथ न्यायालय जाना चाहिए अन्यथा आरोप लगाकर भाग जाना एक पेंतरा ही कहलाएगा जो प्रबुद्ध जनता के सामने बार-बार नहीं चलेगा ।