हम जैसे लड़के
ठीक हूँ कह कर भीगते रहे बारिशों में
ताकि कोई देख ना ले
कि आँखों से कुछ गिरा है
हमें मोहब्बत भी इस तरह मिली
जैसे पुराने कपड़ों में से
कोई भूल कर छोड़ गया ख़त मिल जाए
हमने शोर मचाना नहीं सीखा
हम तो उन लोगों में से हैं
जो टूट कर भी
सबसे पहले तुम ठीक हो ना पूछते हैं
हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते
जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकन
ऐसी तस्वीर के टुकड़े नहीं जोड़ा करते
लग के साहिल से जो बहता है उसे ब��ने दो
ऐसे दरिया का कभी रुख़ नहीं मोड़ा करते
❣️❣️
गुलज़ार
तुम्हारी स्मृतियाँ मेरी पलकों में वैसे ही उतरती है
जैसे किसी बच्चे की हथेली पर ठहर गई हो कोई रंगीन पंखों वाली तितली
मैं तुम्हारी स्मृतियाँ वैसे ही बचाए रखना चाहती हूँ अपने भीतर
जैसे बचाए रखते हैं ओस की बूंदों को
नागफ़नी के पौधे जीवन के तपते रेगिस्तान में...!!
बादलों ने इश्क़ किया पहाड़ों से
पहाड़ों ने फ़िज़ा में संगीत बिखेर दिया
पेड़ों ने जो सुनी धुन मोहब्बत की
…हर एक पत्ता जो खिला था शाख़ पे
झूम उठा फिर नृत्य उसकी रोम रोम में
❤️❤️
Video Cr: Poulomi