अपनें प्रेंम को किसी और से प्रेंम करते देख....
खुश रहना...और उनके प्रेंम को सदा सही सलामत और आजीवनकाल तक बनें रखनें की कामना करना....
वास्तव में यही प्रेंम जीवन का सर्वोपरि है...
किसी रोज रात गुजारनी है...
तुम्हारें संग छत पर...
तारों को बेवजह गिनते हुये...
उनमें अपनें नाम का...
पहला अक्षर बनातें हुये...
किस्सें कहानियां सुनते हुये...
शाम से लेकर सुबह तक जगते हुये...
चाँद को निहारते हुये...
बातें बनातें हुये...
किसी रोज.........
आज का दिन हमेशा याद रहेगा जब सब दोस्तों ने मिलकर हमारे साधारण से दिन को खास बना दिया, पर हमने कोशिश की है इस तरह घटते जीवन के एक एक साल में छूटते सबके बचपन को लिखने की शायद सबके यही शब्द हो अपने बचपन व आज को लेकर फिर भी हम सब खुशी से मनाते है इस दिन को यही तो दुनियादारीहै☺
🙏 जय श्री राधेश्याम 🙏
जो जितने की आशा से खेलता है उसे जय और पराजय दोनों मिलते है।
मैं तो केवल लीला करता हु, लीला का अर्थ जानते है आप....
ना विजय का मोह ना पराजय का भय केवल जीवन जीने का आनंद।।
सुप्रभात मेरे गोविंद।। 🌹🌹