@ParamveerS36404 ब्राह्मण अभी भारत माता की गांड़ में घुसा हुआ है थोड़ा देर से निकलेगा पर जब निकल के सच्चाई देखेगा तो इस फर्जी भारत माता को अपने लंड पे रखेगा
जिन्ना चूतियां नहीं था जो अलग देश ले लिया।।चूतियां हमलोग थे जो उसको गाली देते रहे अब तो हमारे पास भी बचने का वही रास्ता है
@Akhand_Bharat_3@TheMishra_ फर्क नहीं पड़ता 😂 । इसलिए पूछा हूं कैसे । क्योंकि जब धर्म में अंध हो जाते है लोग तो दिखता नहीं है । सेम चीज मोदी के लिए भी थी लोगों में।
@paakhandslayer@dropsonhead En chutiyo babao ki baat bhai mai nhi sunta hu . Aaj ki situation me icm kharab nhi hai .brahmin boy shd go for it and society, parents shd welcome .
En babao me to hi es community ka beda gark kiya hua hai . Pakhand aur andhviswas me sbse jyada aaj apni hi community hai .
स्वतंत्र भारद्वाज और गालीबाज़ ब्राह्मणों को देख कर लगता है ब्राह्मणों की ऐसी पीढ़ी तैयार करने वाले ही ब्राह्मणों के सबसे बड़े शत्रु हैं। ये सिर्फ 12 साल में हुआ परिवर्तन नहीं है, दशकों में पीढ़ियों के ब्रेनवाश का परिणाम है। खास बात ये है कि अधिकतर ब्राह्मण उसी तंत्र के समर्थक हैं जिसने उन्हें बर्बाद किया है। सत्ता के करीबी कुछ ब्राह्मणों को पद मिल जाने से या किसी संघी को वाइस चांसलर बना देने से ब्राह्मण समाज का कोई भला नहीं होता, आम ब्राह्मण को क्या पकड़ाया जा रहा इससे पता चलता है कि कैसे छले गए हैं पंडित जी। शिक्षा/रोजगार से दूर करके झंडा पकड़ाने वालों ने मूर्ख बनाया है ब्राह्मणों को।
आखिर पढ़ने लिखने वाले समाज के लड़के गुंडे कैसे बनने लगे, जुलूस में उन्मादी नारे कैसे लगाने लगे, इनको किसने विश्वास दिला दिया कि लोगों का सिर फोड़ने से वो राष्ट्र और सनातन धर्म की सेवा कर रहे हैं? इनके भीतर दूसरे धर्म के लिए इतनी नफरत कैसे भर गई? अपने से बड़े के ऊपर हाथ कैसे उठा लेते हैं ये और फिर इस नैतिक पतन पर गर्व भी करते हैं!
80 के दशक तक ब्राह्मण परिवारों में अपशब्द का प्रयोग तक करने की मनाही थी, चींटी तक मारना मना था, बड़ों को सम्मान देना अनिवार्य था चाहे किसी भी जाति/धर्म के हों,अध्ययन करना दायित्व था, जिसका पढ़ने लिखने में मन नहीं लगता था उसकी भर्त्सना होती थी परिवार में। अनैतिक कार्यों से दूर रहने का निर्देश था, पाप कर्मों से ब्राह्मणत्व का ह्रास होता है ऐसा बताया जाता था। हिंसक आचरण ब्राह्मण के लिए निषेध था। चार दशकों में ऐसा क्या हुआ कि ब्राह्मण लड़के सार्वजनिक मंच पर गाली देने लगे, बड़ों का सिर फोड़ने लगे, अपनी ही जाति के व्यक्ति को बदनाम करने लगे अगर वो उनके मनमाफिक नहीं बोल रहा!
ब्राह्मणों का बौद्धिक पतन तो दिल्ली सल्तनत काल और मुगल काल में भी नहीं हुआ, अंग्रेज भी नहीं कर पाए, स्वतंत्रता के बाद तो स्वर्णकाल ही था फिर ऐसे कब बन गए ब्राह्मण? स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करके देश को स्वतंत्र कराने वाले ब्राह्मण अब स्वतंत्र भारद्वाज कैसे देने लगे समाज को?
जवाब खोजिए। जैसा बॉब डिलन का गाना है : उत्तर हवा में तैर रहा है। The answer my friend is blowing in the wind.
Aise aise m@d@r€#od@BRAHMAN_BR28 community ke naam pr id bna rkhe hai. Esko swatantra jaisa neta chahiye . Apni maa ke bil me ghus jayega ye r@ndi ka baccha abhi samne se koi aa jaye to . Bina mtlb ka community ke liye hate taiyar kr rhe hai .
एक बार फिर नीलचटो धरना दिया है
इस बार एक और ब्राह्मणवादी नेता का उदय होगा 😂😂
बस आप सपोर्ट में लिखते जाइए अब उसका बाप भी जैल जाएगा 🤣
सबूत साबित करने वाले चीज को माना जाता
बकैती को नहीं
Rani padmavati story will not leave any impression on today’s society.Many such fictional stories have been created by a community to seek validation and maintain its position as a ruling class.
I genuinely wish the worst to you dumbfucks. Even Rani Lakshmi Bai never let the British touch her remains, as 745 Naga Sadhus took up arms just to protect the dignity of her dead body.
@TheMishra_ उसके पीछे कारण ये था कि इसका राजनीतिक फायदा एक संगठन और पार्टी द्वारा लिया जाना।
बाकी काशी मथुरा से कुछ हो सकता है क्या?? या इन मुद्दों में अब जोर नहीं बचा है ?