@TheShikha2026 again window+r press type temp folder khulge all delete, and again W+R type msconfig , windows khulegi startup hide microsoft app ok restart problem will be solved
मोदीनामा लिखने वाली मधु किश्वर का यह लंबा बयान बेहद गंभीर है क्योंकि इसमें लगाए गए आरोप किसी विपक्षी नेता के राजनीतिक हमले नहीं हैं, बल्कि सत्ता के भीतर वर्षों से चल रही उन चर्चाओं का जिक्र है, जिन्हें वे खुद सुनती और देखती रही हैं।
वे साफ लिखती हैं कि—
2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही उनके निजी जीवन, कुछ महिलाओं को पद देने और कथित “विशेष सेवाओं” के बदले लाभ मिलने जैसी बातें सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय थीं।
संघ के नेटवर्क के भीतर तक उन महिलाओं के नाम लिए जा रहे थे, जिन्हें कथित तौर पर नजदीकी के आधार पर सांसद और मंत्री बनाया गया।
गुजरात के समय से ही ऐसे किस्से दबे सुरों में चलते रहे और दिल्ली की सत्ता में आते ही ये चर्चाएं और तेज हो गईं।
मधु किश्वर बताती हैं कि—
इन सब बातों से वे इतनी असहज हो गईं कि उन्होंने खुद नरेंद्र मोदी से दूरी बना ली।
यहां तक कि अपनी ही लिखी किताब उन्हें देने भी नहीं गईं, बल्कि एक बिना हस्ताक्षर की कॉपी एक नौकरशाह के जरिए भिजवाई।
वे सार्वजनिक कार्यक्रमों, शादी-ब्याह तक से बचने लगीं, सिर्फ इसलिए कि वहां मोदी के आने की संभावना होती थी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि—
वे दावा करती हैं कि 2014 में जब वे अमेरिका व्याख्यान देने गईं, तब वहां तक मोदी की कथित अय्याशी और निजी जीवन की कहानियां चर्चा में थीं।
कुछ मामलों से जुड़े दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे, लेकिन उन्हें दबा दिया गया — ऐसा भी आरोप उन्होंने लगाया।
गुजरात के कई लोगों, यहां तक कि मोदी के करीबी लोगों ने भी उन्हें महिलाओं के साथ कथित संबंधों की बेहद आपत्तिजनक कहानियां बताईं।
इन सबका असर इतना गहरा पड़ा कि—
वे खुद 2014 में गहरे अवसाद में चली गईं।
2015 में कोयंबटूर के एक आयुर्वेदिक केंद्र में 21 दिन तक इलाज कराना पड़ा।
और जब उन्होंने अपनी पीड़ा आरएसएस के एक वरिष्ठ व्यक्ति से साझा की, तो जवाब मिला—
“तुम इतनी हैरान क्यों हो? उसकी निजी जिंदगी तुम्हें क्यों परेशान कर रही है?”
यहां से मामला और गंभीर हो जाता है…
क्योंकि मधु किश्वर कोई सामान्य राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं हैं।
वे देश की जानी-मानी लेखिका, पत्रकार और विचारक हैं, जो लंबे समय तक भाजपा और संघ की विचारधारा के करीब रही हैं।
यहां तक कि उन्होंने नरेंद्र मोदी की जीवनी भी लिखी है। ऐसे व्यक्ति की बात को यूं ही खारिज कर देना आसान नहीं है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि—
नेताओं के “यौन भ्रष्टाचार” पर देश को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए,
क्योंकि ऐसे लोग आसानी से ब्लैकमेल हो सकते हैं और देश के खिलाफ इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
अब सवाल और भी बड़े हो जाते हैं—
👉 क्या सचमुच महिलाओं को पद देने के बदले उनका शोषण हुआ?
👉 क्या महिलाओं की जासूसी करवाई गई?
👉 क्या सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति पर इतने गंभीर आरोप होने के बावजूद देश खामोश रहेगा?
अगर ये सब झूठ है — तो साफ और खुला जवाब क्यों नहीं आता?
और अगर सच का एक भी हिस्सा है — तो यह देश के विश्वास के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात है।
नरेंद्र मोदी जी, देश आपसे सीधा जवाब मांग रहा है।
56 इंच का सीना सिर्फ भाषणों में नहीं,
सच का सामना करने में भी दिखना चाहिए।
याद रखिए —
लोकतंत्र में सवाल पूछना देशद्रोह नहीं होता,
लेकिन सवालों से भागना जरूर लोकतंत्र के साथ अन्याय होता है।
ताकि सनद रहे
जब आप शिक्षा व्यवस्था में फ़र्ज़ीवाड़ा करते हैं, साथ देते हैं, या उसके फ़र्ज़ीवाड़े में मूकदर्शक बने रहते हैं तो आप देश के भविष्य को फ़र्ज़ी बुनियाद की तरफ़ धकेल रहे होते हैं। वर्तमान में तो बस अंतरराष्ट्रीय फ़ज़ीहत हो रही है, जब गलगोटिया जैसे कथित शिक्षा संस्थानों से निकली नई पीढ़ी के हाथों में देश होगा तो ये गर्त में नज़र आएगा। इसलिए सरकार के लिए ये चेत जाने का वक़्त है। ऐसे संस्थानों के लिए कठोर कार्रवाई के साथ साथ मानक तय करने और उसे सख़्ती से लागू करने का भी वक़्त है। वरना
2047 में विकसित भारत का सपना सपना ही रह जाएगा।
तथास्तु
UGC के EQUITY committee के विरोध करने वालो को यह जानना चाहिए कि इसमें कौन कौन लोग सदस्य थे।
UGC के "Equity Commitee" में कुल 31 सदस्य थे जिनमे 17 सवर्ण थे।
ब्राह्मण = 8
क्षत्रिय = 2
वैश्य = 1
भूमिहार = 1
कायस्थ = 2
सामान्य (अन्य ) = 3
UGC के चेयरमैन : पंडित विनीत जोशी
स्टेंडिंग कमेटी के चेयरमैन : दिग्विजय सिंह
बाकी जो राम को लाये है वही UGC लाये है हम राम के साथ UGC के समर्थन में है।
#UGC के समर्थन में
🌿 है या नहीं ग़ज़ब…? 😁
आधार कार्ड - पैन कार्ड से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - राशन कार्ड से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - बैंक अकाउंट से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - स्कूल की परीक्षा से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - गैस सिलेंडर से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - मोबाइल नंबर से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - नौकरी की हाजिरी से जोड़ा गया,
आधार कार्ड - सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनिवार्य किया गया।
लेकिन आधार कार्ड मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) से नहीं जोड़ा गया…
क्यों????
क्योंकि…. राजनेता… 👑
आधार से लिंक करने पर एक ही व्यक्ति के डबल / ट्रिपल वोट बंद हो जाएंगे…
एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग नामों से किए गए वोट रद्द हो जाएंगे…
फर्जी नामों से मिलने वाले वोट खत्म हो जाएंगे।
जिस तरह राशन कार्ड से फर्जी नाम हट गए,
उसी तरह मतदाता सूची से भी फर्जी नाम हट जाएंगे।
सरकार पैन कार्ड को आधार से न जोड़ने पर ₹10,000 का जुर्माना लगा रही है,
मतलब आपको हर जगह आधार कार्ड चाहिए —
लाडली बहना योजना हो या कोई अन्य सरकारी योजना,
लेकिन सिर्फ मतदान के लिए आधार कार्ड नहीं चाहिए?
लॉकडाउन के समय जब हमने सभी ने वैक्सीन लगवाई थी,
तब सरकार ने आधार कार्ड को वैक्सीन से भी जोड़ा था।
वह काम तो बहुत तेज़ी से हुआ था।
तो फिर चुनाव आयोग की गति कहाँ रुक जाती है…?
यही है क्या “स्वच्छ भारत”?
यही है क्या “पारदर्शी सरकार”? 😡
जागो मतदाता! ✊✌️🤝
⸻
1/ Meet Manish Kumar, An Indian national responsible for scamming thousands of innocent people out of his bedroom in Ghaziabad, India.
When I hacked into his laptop and switched on the live webcam feed, he instantly panicked and blocked the camera view with his hand!
भाई लोग सुन रहे हो.!🐲🔥
आपका बच्चा पढ़कर भी आईएएस नही बन पायेगा और उनके बच्चे बिना परीक्षा दिए सीधे IAS/IRS अधिकारी बनेगे.!
भरोसा नही हो रहा तो चलो लिस्ट देखो फिर.!
कमेंट बोक्स में पूरी लिस्ट है .!👇
Now you understand the whole agenda behind One Nation One Election
It’s much easier to manipulate voter lists, less chances of getting caught red handed.