जब विश्वास मत चल रहा था तो हमारे 3 विधायक उनमें नीलम देवी थी, आनंद मोहन के बेटे थे और प्रह्लाद यादव थे उस समय भी हमने भविष्यवाणी की थी कि आप लोग जहां समर्थन दे रहे हैं समय बताएगा कि आपके साथ क्या होगा। आज आनंद मोहन परेशान हैं, प्रह्लाद यादव को टिकट भी नहीं मिला, अनंत सिंह को देख लीजिए क्या स्थिति बनी हुई है -तेजस्वी यादव #Bihar #JDU #AnantSingh
We have taken all necessary action to ensure that animal welfare activist Jagriti Mishra receives every possible support.
An inquiry into the Junior Engineer’s conduct has been ordered, and police have been directed to register a case against those responsible. District Magistrate has been instructed to assist her in setting up the animal shelter.
Financial assistance of ₹5 lakh from CM Relief Fund has also been assured.
Our government will not tolerate harassment of citizens or misuse of authority. Those found guilty will face strict action under the law.
बिहार में शराबबंदी के बाद सस्ते नशे का बाजार कैसे फैलता गया? अवैध शराब से महंगे नशीले पदार्थों तक, कीमतों की तुलना ने इस बदलाव की एक तस्वीर सामने रखी है.
सबसे बड़ी चिंता है कि गांजा, ओपिऑइड और दूसरी नशीली चीजों की गिरफ्त में नाबालिग भी आ रहे हैं.
शराबबंदी के 10 साल बाद बिहार की नशे की समस्या क्या चेतावनी दे रही है? देखिए द इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल.
प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने के बारे में बात करते हुए जावेद अख्तर ने शबाना आज़मी के बारे में कहानियां सुनाईं. उन्होंने बताया कि उन्हें कई बार थाने जाकर शबाना की ज़मानत करवानी पड़ी. क्योंकि वो अक्सर किसी न किसी वजह से धरने पर बैठ जाती थीं.
पूरा इंटरव्यू देखें इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल पर.
भाजपा प्रवक्ता - सौरभ दास अपने पिता का नाम क्यों नहीं लेता।
ये उस पार्टी की प्रवक्ता बोल रही है, जिनके आका अपनी बीवी का नाम दशकों तक छुपा कर रखा हो!
रांका और सौरभ को 🇮🇳 फहराने के लिए 7 दिन जेल में रहने पड़े।
बच्चियों का कपड़ा फाड़ने वाले राइट विंग के गुंडे 1 दिन में बाहर आ गए। इस "न्याय" पर क्या ही बोले!
भाजपाइयों का लक्ष्य ऊपरवाला झूठा पोस्टर लगाना नहीं था बल्कि नीचे वाले प्रभु राम के पोस्टर को छिपाना था क्योंकि अब जब भी कोई भगवान राम का चित्र देखता है तो उसे भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों द्वारा अयोध्या के रामलला के मंदिर में की गई चोरी की याद आती है, जिससे भाजपाई गिरोह के ख़िलाफ़ जनाक्रोश और भी अधिक बढ़ जाता है।
याद रहे इसी ‘भाजपाई गिरोह’ ने लखनऊ में रामचरितमानस पर भी लाठी चलवाई थी।
भाजपा को डर है कि कहीं इस बार रावण के साथ-साथ, ‘राम मंदिर चोरी’ से आहत कहीं कोई आस्थावान श्रद्धालु ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरी के त्रिदानवों का पुतला न फूंक दे।
राज्यसभा की बात करनेवाले उप्र के मुख्यमंत्री जी में अगर रत्ती भर भी लाज-शर्म-हया हो तो भाजपा द्वारा बनाए गए सिक्किम के विवादित ‘राज्यपाल’ के बारे में बोलें।
उत्तराखण्ड की बेटी के प्रति उप्र के मुख्यमंत्री जी का भी तो कोई दायित्व बनता है या नहीं। उत्तराखण्ड छोड़ आए तो क्या नैतिकता भी छोड़ आए हैं।
देखते हैं उप्र के मुख्यमंत्री जी की आवाज़ किसी बच्ची के साथ हुए पाप के ख़िलाफ़ निकलती है या भयभीत होकर उनकी घिग्घी बंध जाती है। हमारी उनसे अपील है कि यदि उनमें अंश मात्र भी धर्म है तो वो एक आरोपी को राज्यपाल बनाने के फ़ैसले का घोर विरोध करें। ये उनको सीधी चुनौती है, नहीं तो वो सदैव के लिए मौन धारण कर लें। फिर तो यही माना जाएगा कि इसमें उनकी ख़ामोश सहमति भी शामिल है।
दिल्ली का ड्रोन-दूरबीन तो सिक्किम तक नहीं देख पा रहा है देखते हैं उप्र के मुख्यमंत्री जी का बुलडोज़र वहाँ तक पहुँचाता है या नहीं।
आज पूरे देश की हर बेटी और उनके माँ-बाप भाजपा के इस फ़ैसले से बेहद आक्रोशित हैं कि भाजपा ने घोर निंदनीय निर्णय लेते हुए अपने दल के एक ऐसे व्यक्ति को सिक्किम का राज्यपाल बनाया है जिसके घिनौने कुकृत्यों की वजह से एक बच्ची के साथ अन्याय हुआ और उसकी हत्या भी कर दी गई।
भाजपा बेशर्म अपराधियों का गिरोह है।
उत्तराखण्ड की बेटी के साथ न्याय हो!
मोदी-शाह के इशारे पर ज्ञानेश कुमार ने लोकतंत्र को कुचलने का काम किया है।
ज्ञानेश कुमार ने एक कठपुतली की तरह काम किया है, उसके लिए उसे सजा जरूर मिलेगी। ये लोग बच नहीं पाएंगे।
यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या पार्टी की नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और हर नागरिक के अधिकारों की है। INDIA गठबंधन के सभी दल लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुट हैं।
: @yadavtejashwi जी
📍 दिल्ली
एक बिहारी जब किसी खास जगह पर पहुँचता है तो वो कुछ न कुछ अलग ही करता है 😀
आज तेजस्वी यादव सुप्रीम कोर्ट वाले मार्च में शामिल हुए थे और वहां तक मार्च करने के बाद जब सारे नेता अपनी गाड़ी से अपने गंतव्य तक गए तो
तेजस्वी यादव जी ने अलग ही तरीका अपनाया और फटफटिया Auto पकड़कर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाते हुए जाते दिखाई दिए।
तेजस्वी यादव चाहते तो अपनी गाड़ी से भी जा सकते थे लेकिन वो ठहरे साधारण देशी ठेठ बिहारी पकड़ लिए टैंपो और चल पड़े।😂😂