2002 मे राजनाथ सिंह CM थे और गोरखपुर मे उनके केंडिडेट के खिलाफ योगी जी ने अपना प्रत्याशी खड़ा कर दिया और उसे जिताया भी | लेकिन किसी और क्षत्रिय नेता ने पार्टी मे नम्बर बनाने के लिए चापलूसी करते हुए योगी जी की बुराई नहीँ की न ही विरोध किया, यहां तक की राजनाथ सिँह जी ने भी कुछ नहीँ कहा
2007-12 मे भी योगी जी ने बगावत करके बीजेपी के खिलाफ प्रत्याशी उतार दिए, फिर भी बाकी क्षत्रिय नेताओं ने पार्टी मे नम्बर बढ़ाने के लिए उनका विरोध नहीँ किया
2013 मे सपा सरकार थी, राजा भैया पर DSP की हत्या का आरोप लगा था, बीजेपी विपक्ष मे थी, क्षत्रिय नेता चाहते तो राजा भैया पर हमलावर हो सकते थे लेकिन सभी ने शांति बरती या राजा भैया का ही सपोर्ट किया | योगी जी ने तो मिडिया मे साफ कहा था की राजा भैया को मंत्री पद से हटाने के लिए आजम खान ने ये साजिस की है, योगी जी चाहते तो पार्टी मे नम्बर बढ़ाने के लिए राजा भैया को घेर सकते थे लेकिन नहीँ किये |
2018 मे कुलदीप सेंगर पर मिडिया ट्रायल चल रहे थे, लेकिन सभी क्षत्रिय नेता चाहे वो पक्ष के हो या विपक्ष के सबने चुप रहना बेहतर समझा, यही नहीँ कुलदीप सेंगर की बेटी की शादी पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिँह के पोते से किसने करवाई ये भी अहम बात है
2021 के बाद से बृज भूषण शरण सिंह ने पता नहीँ कितने बार सरकार की आलोचना की होंगी लेकिन क्या किसी एक क्षत्रिय नेता ने मुख्यमंत्री के सामने अपने नम्बर बढ़ाने के लिए बृज भूषण सिंह की आलोचना की?
2024 मे ठाकुर पुरण सिंह ने बीजेपी के खिलाफ हल्ला बोल कर दिया था, किसी क्षत्रिय नेता ने उनके खिलाफ स्टेटमेंट दिया? चाहते तो दिल्ली के सामने नम्बर बढ़ाने के लिए स्टेटमेंट दे सकते थे
2024 मे ही संगीत सोम ने बगावत की लेकिन दिल्ली के सामने नम्बर बढ़ाने के लिए किसी क्षत्रिय नेता ने संगीत सोम का विरोध नहीँ किया
2024 मे ही राजा भैया ने 2 सीटों पर बगावत की थी, दिल्ली की नजर मे नम्बर बढ़ाने के लिए किसी क्षत्रिय नेता ने राजा भैया कका विरोध किया?
मै ये नहीँ कहता की यूपी मे क्षत्रियो मे बहुत प्रेम हैं, नहीँ ऐसा नहीँ है, उनमे भी आपस मे टकराव हैं, लेकिन वो किसी के महत्वकांझा के बीच मे नहीँ आते है
वही बिहार मे आनंद मोहन ने क्या जदयू के खिलाफ बोल दिया, गुलाम क्षत्रिय नेता स्टेटमेंट पर स्टेटमेंट दिए जा रहे है, पता नहीँ कितना पूर्व मुख्यमंत्री को तेल लगाना चाहते है? ये गुलाम लोग क्यों नहीँ समझते इतने साल से तेल लगा रहे आज तक विधानसभा का टिकट नहीँ ले पाए, एक लोग 7 बार की विधायक बन गई लेकिन आज तक ढंग से मंत्रालय नहीँ मिला, जिन लोगो के पास खुद के लिए आवाज उठाने की हिम्मत नहीँ, अपना हक मांगने की हिम्मत नहीँ वो भी आनंद मोहन के खिलाफ स्टेटमेंट पर स्टेटमेंट दिए जा रहे की कैसे भी पूर्व मुख्यमंत्री को चापलूसी से ख़ुश कर दे |
मुझे लगता है ये बात समझने के लिए काफ़ी है क्यों यूपी का क्षत्रिय राजनीती मे बड़े पदों पर,ठेके मे अग्रणी रहता है और बिहार का क्षत्रिय समाज पीछे 😊
Post Credit - Satendra Gaharwar
माँ भारती के अमर सपूत, स्वाधीनता के कालजयी स्वर, त्याग व बलिदान की उज्ज्वल कीर्ति पताका, 'हिंदुआ सूर्य' वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की पावन जयंती पर नमन।
मातृभूमि के गौरव और स्वाभिमान की रक्षा हेतु आपका अदम्य साहस एवं सर्वस्व समर्पण, युगों-युगों तक भारतीय जनमानस को अन्याय के विरुद्ध अडिग रहने और राष्ट्रनिष्ठा की प्रेरणा देता रहेगा।
दिलीप मंडल ने कोई परीक्षा नहीं दी
दिलीप मंडल ने कभी भाजपा जॉइन नहीं किया
दिलीप मंडल ना RSS का आदमी है
लेकिन फिर भी वो भारत सरकार के एक मंत्रालय में सलाहकार पद पर है।
आख़िर मोदी जी और दिलीप मंडल में ऐसी क्या दोस्ती है ?
मित्रता या फिर कोई समान उद्देश्य 🤷🏻♂️
भाजपा के फ्रेंड, फ़िलासफ़र एंड फादर, श्री मंडल जी यह कहना चाह रहे हैं कि भाजपा को केवल दो समूह वोट नहीं देता: मुसलमान और सवर्ण। आदिवासी दे रहे हैं, दलित दे रहे हैं, ये सवर्ण नहीं दे रहा। बस मंडल यह नहीं बताता कि बाक़ी के 70% और 80% में सवर्णों का प्रतिशत कितना है ऐसी सीटों पर। अर्धसत्य इन हराम का खाने वाले वामपंथियों का पुराना हथियार है।
ओडिशा में मेडिकल ऑफिसर वेकैंसी:
Total Seats: 5248
Reserved category seats: 4837
General category seats: 411
ये हुआ 92% आरक्षण!
मतलब GC लोग इधर हिंदू एकता की डफली बजाने में बिजी हैं, उधर उनको पढ़ाई और नौकरी से शांति से बाहर किया जा रहा है!
जिस देश के राष्ट्रपति की पहचान डेढ़ अरब लोगों की प्रथम नागरिक होने के बावजूद भी आदिवासी ही है!
जिस देश का प्रधानमंत्री 12 साल मुख्यमंत्री और 12 साल प्रधानमंत्री रहने के बाद भी खुद को अभी भी अपने आप को पिछड़ा बताता हो!
उसी देश में एक बीघा जमीन पर गुजारा करने वाला सवर्ण परिवार सक्षम योग्य और दबंग माना जाता है।
ये है हमारे देश की संविधान की खूबसूरती!😎
या तो यह आरक्षित रिक्तियों को भरने के लिए होगी या @DrMohanYadav51 ने यह तय कर लिया है कि तुष्टिकरण में वो सारी नैतिकता, विधिक सीमाओं और लज्जा को त्याग देंगे।
हित वचन तूने नहीं माना
मैत्री का मूल्य न पहचाना
तो ले, मैं भी अब जाता हूँ
बहुत-बहुत धन्यवाद @BJP4India! नमन रहेगा @narendramodi यह दिन दिखाने के लिए कि इस राष्ट्र में आतंकवादी सड़क घेर सकते हैं, दंगे कर सकते हैं, फिर वापस प्रदर्शन कर सकते हैं, पर आपकी कायर सरकार को समस्या मेरे जैसों से है।
आज मैं अपने घर में कैद हूँ। आज मेरा आना-जाना बंद है। न तो व्यक्ति अमर होता है, न सत्ता!
आप लोग कायरों का एक समूह मात्र हैं। आप समाज को बाँटने वाले, डरपोक हो जो ट्रोल बंदरों की एक सेना बिठा कर हमें कलंकित करना चाहते हो।
दिल्ली में आए मित्रों का आह्वान करता हूँ कि रामलीला मैदान की ‘मोदी छावनी’ तक पहुँचिए। मोदी ने छावनी बनवाई है तो आप उसी मोदी तक अपने नारों को पहुँचाइए।
ये आपके बच्चों को जन्मजात अपराधी बना चुके हैं और आपको आतंकवादी की तरह देखते हैं। आप सवर्ण हैं तो इसका प्रतिकार कीजिए।
#March8DelhiChalo
नहीं होगा। आठ मार्च को जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन है। ईरान का विषय या अन्य राजनीति, यूजीसी के विषय को समाप्त नहीं कर सकते। इस पर जब तक उचित निर्णय नहीं आ जाता, हम लिखते, बोलते और इकट्ठा होते रहेंगे।
नया सीएम चाहे आप भूमिहार को बना दो, राजपूत या ब्राह्मण को, (जो कि होगा नहीं) उसका यूजीसी से कोई लेना-देना नहीं है। इतना हल्का विषय नहीं है यह न ही इतनी हल्की हमारी माँगें हैं।
हमारी माँग राजनैतिक नहीं, सामाजिक है। इसका राजनीतिक समाधान सांकेतिक बकलोलियों के माध्यम से करना भाजपा के लिए आत्मघाती होगा।
कई लिख रहे हैं कि अजीत भारती विरोध में लिमिट क्रॉस कर रहा है।
भाई मेरे, मोदी ने जो लिमिट क्रॉस की, जिससे 30-40 करोड़ सवर्णों की रेड मारी जा रही है, उससे ज्यादा डैमेज मैंने कर दिया?
जिस सरकार को हमने हिन्दू एकता के लिए चुना था, वह एक्टिवली समाज को विभाजित करने का उपक्रम कर रहा है और लिमिट मैं क्रॉस कर रहा हूँ?
सारा सत्य बाहर आने के बाद भी पूरी सरकार, पूरी पार्टी, पूरा संघ चुप है, या अंबेडकर-अंबेडकर रट रहा है, और लिमिट मैं क्रॉस कर रहा हूँ?
सोच-समझ कर सामान्य वर्ग को एक्सक्लूड किया जा रहा है और वह सबको दिख रहा है। मैं इस विभीषिका पर लगातार यदि नहीं बोलूँगा (चाहे परिणाम जो भी हो), तो मैं अपनी पत्रकारिता के साथ धोखेबाजी कर रहा हूँ। इसलिए, पतितों को उनके दायित्व का स्मरण कराने के लिए, मैं लिमिट क्रॉस करूँगा ही!
मैं एक पत्रकार हूँ। मैंने एक विषय उठाया है। मैं इसके परिणाम तक लिखता-बोलता रहूँगा। दो ही परिणाम हैं: सरकार समुचित समाधान दे, या समाधान की संभावना समाप्त कर दे।
मैंने फिरोज खान का बीएचयू वाला विषय उठाया था, अंत तक लिखा-बोला। मैंने दिल्ली दंगों का विषय उठाया था, जब तक सरकार ने हाथ में नहीं लिया, हर विक्टिम तक पहुँचा। मैंने बंगाल राजनैतिक हत्या का मामला उठाया था, बीस से अधिक पीड़ित परिवार से मिला, न्याय दिलाने में सफलता नहीं मिली, उसे स्वीकारा।
सोशल मीडिया पर ऐसे ही कई विषय पर मैं ‘जो घर जारो आपनो’ वाले मोड में लिखता बोलता रहा हूँ। प्रदूषण हो, इथेनॉल हो, मोहन यादव का आरक्षण वाला विषय हो, जहाँ भी गलत थी सरकार मैंने बोला है, लम्बे समय तक बोला है।
इन तीनों विषयों में सरकार पतित हो गई, तब मैंने बोलना बंद कर दिया। जहाँ मुझे आशा रहती है, मैं लिमिट क्रॉस करता ही हूँ। लिमिट कौन तय करेगा? लिमिट तो केवल विषय तय करेगा।
कुछ मंत्री कह रहे थे कि UGC के नए नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा, लेकिन हालात तो नियम लागू होने से पहले ही साफ दिखने लगे हैं।
जिन्हें मिलकर नक़ल माफिया और पेपर लीक के खिलाफ लड़ना था, वे आज जात-पात में बँट गए हैं। असली लड़ाई सिस्टम से होनी चाहिए थी, पर हम आपस में उलझ गए। एक फैसले ने ऐसी दरार पैदा कर दी है, जिसे भरने में शायद दशकों लग जाएँ।