वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह ने SatyaHindi चैनल पर इंटरव्यू के लिए अभिजीत दीपके को इंटरव्यू संपर्क किया.
अभिजीत दीपके ने शीतल पी सिंह को कोई रेस्पॉन्स नही दिया.
शीतल पी सिंह ने अभिजीत दीपके के पोस्ट पर कमेंट कर जवाब मांगा, यहां भी कोई रेस्पॉन्स नही आया.
दरअसल आम आदमी पार्टी ने SatyaHindi का बॉयकॉट कर रखा है, कारण इस चैनल पर Ganna Andolan की जमकर आलोचना होती है और उसे आरएसएस द्वारा खड़ा किया गया बताया जाता है.
शीतल पी सिंह ने अभिजीत दीपके पर गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल पूछा, जो व्यक्ति 22 मई तक भारत आने के लिए डर रहा था, क्यों कि पुलिस आंदोलन को परमिशन नही देती है और आंदोलनकारियों को डिटेन करती है. 28 मई के बाद अचानक ऐसा क्या हुआ उसने भारत आने का निर्णय किया ?
खान सर जैसा पूरा आदमी पूरे देश में दूसरा कोई नही मिलेगा. खान सर ने जो किया है उसके लिए उन्हें उम्रकैद की सजा मिलनी चाहिए ?
खान सर कौन कौन से अपराध किए हैं यह रही पूरी लिस्ट.
खान सर 200 रुपए फीस में छात्रों को पढ़ाकर दरोगा, असफर और इंजीनियर बनाया.
खान सर गरीबों के इलाज के लिए अस्पताल बनाया जहां MRI 10,000 में नही, 1000 रुपए में किया जा रहा है. CT स्कैन 8000 में नही, केवल 900 रुपए किया जा रहा है.
ब्लड टेस्ट CBC 7 रुपए, ECG 25 रुपए, X-रे 35 और किडनी डायलीसिस 350 रुपए में किया जा रहा है.
महंगी शिक्षा लॉबी और महंगी स्वास्थ्य लॉबी को नुकसान पहुंचाने के आरोप में खान सर को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए.
UP के युवा शिक्षक के लिए BIHAR में Khan Sir बनना आसान नही है.
Khan Sir के लिए पढ़ाई को दिहाती स्टाइल में आसान भाषा में समझाना शुरू किया, ग्रामीण इलाकों के गरीब छात्रों को पढ़ाई आसान लगने लगी.
Khan Sir ने Bihar और UP के छात्रों के मन से इंग्लिश का डर और Inferiority Complex से निकाला.
Khan Sir ने कोचिंग शिक्षा इतना सस्ता किया कि समाज के निचले पायदान पर पड़े छात्रों को भी शिक्षा का Access मिलने लगा. यहीं से Khan Sir शिक्षा माफिया के आंखों की किरकिरी बन गए.
Khan Sir को 107 करोड़ रुपए ऑफर किया गया. उन्होंने इंकार कर अपने कोचिंग ब्रैंड को बेचने से मना कर दिया.
Khan Sir के कारण अन्य कोचिंग संस्थानों को भी फीस घटानी पड़ी. Khan Sir के बिना Bihar की कल्पना कर के देखिए. अगर Khan Sir ने गलती की है तो उन्हें सजा न्यायपालिका देगी, ना कि सोशल मीडिया की पंचायत या गोदी मीडिया.
1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू कर OBC 27% आरक्षण दिया.
वीपी सिंह के कार्यकाल में डॉ बाबा साहेब अंबेडकर को भारतरत्न दिया गया.
वीपी सिंह की सरकार पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों की थी. यहां तक उन्होंने बहुजन समाज के लिए अपना प्रधानमंत्री पद दांव पर लगा दिया.
27% OBC आरक्षण लागू करने के कारण BJP ने उनकी सरकार गिरा दी. बाद में OBC SC ST जातियों ने VP SINGH को अपना नेता नही माना,
अब VP SINGH ठाकुर लगने लगे थे. OBC SC ST ने अपनी अपनी जातियों के नेताओं के नेतृत्व को स्वीकार किया. आज KHAN SIR के साथ वही वो रहा है. आज खान सर का धर्म खोजा जा रहा है. अपनी जाति के सर में मसीह खोजा जा रहा है.
सूर्यकुमार यादव को T-20 टीम की कप्तानी से हटा दिया गया, और टीम से बाहर निकालने की तैयारी भी है.
दो चार OBC खिलाड़ियों की मैच खेलने तक पहुंच हो गयी है.
BCCI में अभी भी उनका ही दबदबा है. निर्णायक भूमिका में वही हैं. वही तय करेंगे कौन खेलेगा और कौन बाहर जाएगा.
राजनीति की भाषा से समझाया जाए तो दो चार OBC SC ST सीएम पद तक पहुंच भले गए हैं. लेकिन न्यायपालिका, मीडिया, ब्यूरोक्रेसी और शिक्षा संस्थानों पर उन्ही का आधिपत्य है.
अब बोलो मुझे, तुम यार हर बात पर जाति क्यों लाते हैं.
हाथ में स्मार्टफोन क्या आ गया, दिन में 2GB डाटा क्या इस्तेमाल करने लगे, सोचते हो जातिवाद खत्म हो गया. ऐसा सोचने वाले झंडू बाम हैं.
ओशो का कहना है पुरूष सदियों से महिलाओं के शरीर पर नियंत्रण करता आया है. ओशो के अनुसार पुरुष के भीतर Inferiority Complex से पीड़ित है.
उसे लगता है महिलाओं को आजादी देने से उसका दबदबा कम हो जाएगा. अगर महिला ने किसी और से प्रेम किया तो वो इसे अपना अपमान मानता है.
एक महिला ने स्वतंत्र होकर किसी पुरुष से संबंध क्या बना लिया, पूरा समाज उस महिला का दुश्मन बन गया है.
महिला का पक्ष है, उसकी शादी 33 साल के आदमी के साथ तब की गई जब वो 17 साल की थी. महिला अपनी शादी से बाहर आना चाहती है, जो महिला तन मन से किसी और कि हो चुकी है उसे रोककर क्या फायदा. पाती को हार मानकर उसे आजाद कर देना चाहिए.
जब विपक्ष में थे तो गौ माता को कानूनी दर्जा दिलाने की बात कर रहे थे अब कह रहे गाय को राष्ट्र माता का दर्जा देने की कोई जरूरत नहीं है
गाय पर राजनीति करना कोई योगी आदित्यनाथ से सीखे
भाई साहब को केजरीवाल और आप पार्टी जनता के मुद्दे नहीं उठाने दे रही थी। इसलिए भाई साहब भाजपा में चले गये थे। लेकिन तब से भाई जी जाग ही नहीं रहे, CBSE हो गया, NEET हो गया, लेखपाल पेपर लीक हो गया। Gen जी सड़कों पर है। पर प्रिय मित्र राघव जाग ही नहीं रहे। उनकी तबियत की दुआ करता हूँ।
Khan Sir ने कहा दिल्ली के चाणक्यपुरी में एक प्राइवेट स्कूल को 8 एकड़ जमीन केवल एक रुपए में दी गयी.
Khan Sir ने बताया इस स्कूल की फीस इतनी महंगी है कि आम आदमी के बच्चे नही पढ़ पाते.
Khan Sir ने कहा, इसी स्कूल में एक बड़े पत्रकार के बच्चे पढ़ते हैं.
इस स्कूल ने दिल्ली के सबसे पॉश इलाके में 8 एकड़ भूमि एक रुपए में हासिल कर 60% सीट A ग्रेड सरकारी अफसरों के बच्चे के लिए आरक्षित कर दिया.
मामला दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहा है. बात शिक्षा माफिया पर नही हो रही है. कम दरों पर शिक्षा उपलब्ध कराने वाले शिक्षकों को टारगेट कर देश कर शिक्षा माफिया को संरक्षण दिया जा रहा है.
2017 में तमिलनाडु की छात्रा S.Anitha को 12th स्टैंडर्ड के स्टेट बोर्ड में 98% आया था.
बहुजन समाज की S.Anitha डॉक्टर बनना चाहती थी. NEET क्लियर करना जरूरी था. NEET की तैयारी के कोचिंग सेंटर लाखों रुपए फीस वसूल रहे थे.
गरीब परिवार की Anitha के पास इतना पैसा नही था. Anitha NEET क्वालीफाई नही कर पाई, NEET का पेपर अंधा कुआं लग रहा था. कारण NEET का पेपर सेंट्रल बोर्ड के स्टूडेंट्स के हिसाब से डिजाइन किया होता है.
Anitha के परिवार के पास अगर लाखों रुपए होते तो वो भी कोचिंग सेंटर में एडमिशन लेकर NEET की तैयारी करती. 2017 में ऑनलाइन क्लास इतने नही थे.
साल 2000 के बाद ऑनलाइन क्लास की बाढ़ आ गयी. अब तो NEET की तैयारी के लिए कई ऑनलाइन क्लास 5000 में कोर्स उपलब्ध करा रहे हैं.
Anitha ने NEET के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी. वो केस और जिंदगी दोनों हार गई. Anjana Om Kashyap को हाथ जोड़कर शिक्षकों से माफी मांगनी चाहिए. ऑनलाइन शिक्षक उन छात्रों तक शिक्षा पहुंचा रहे हैं जो बेहद गरीब हैं.
अभी-अभी खान सर ने अंजना ओम कश्यप को तगड़ा जवाब दिया है
अंजना ओम कश्यप और ऑनलाइन कोचिंग पढ़ाने वाले टीचरों के बीच काफी तगड़ा विवाद हो गया है
अंजना ओम कश्यप का तो ऐसा हिसाब हो गया है एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी।
पहले अपने रिकॉर्ड पर भी नज़र डाल लीजिए। आप लोग खुद 157वें स्थान पर हैं, इसलिए दूसरों को ज्ञान देने से पहले अपने गिरेबान में झाँकना ज़रूरी है।
और जहाँ तक कोचिंग माफिया का सवाल है, अगर सरकार की नीतियाँ विफल न होतीं, तो क्या ये माफिया इतना मजबूत हो पाता?
लेकिन सरकार की गोद में बैठे मीडिया संस्थान ये असहज सवाल सत्ता से नहीं पूछेंगे। वजह क्या है, यह देश की जनता अच्छी तरह समझती है।
इस दरिंदे जितेंद्र पाठक ने जो किया, वो रोंगटे खड़े कर देने वाला है। डेढ़ साल के मासूम बच्चे को पटक-पटक कर मार डाला लेकिन सवर्ण मीडिया इस पर चुप है। जरा सोचिए, अगर यही हैवानियत किसी मुस्लिम ने की होती तो मीडिया वाले कैसा तांडव करते? ये हर बार अपनी जाति के अपराधी को बचाने में लगे रहते हैं। शर्मनाक
परसों मऊ में योगी आदित्यनाथ ने कहा अब कोई माफिया बंदूक लहराकर हिंदुओं को डरा नहीं सकता
कल इनके स्वजातीय हिस्ट्रीशीटर मानवेंद्र सिंह ने प्रयागराज में दिनदहाड़े फायरिंग करके पूरे इलाके में दहशत फैला दी
यही है यूपी की कानून व्यवस्था की हकीकत
कोलंबस अपनी पहली समुद्री यात्रा में जब कैरिबियन द्वीपों पर पहुंचा तो उसे लगा वो भारत पहुंच चुका है.
कैरिबियाई आदिवासियों को उसने भारतीय समझ लिया. दर्जन भर आदिवासियों को अगवा लिया.
यूरोप वापस लौट कर उसने कहा, "महाराज महाराज हम भारत को खोज लिया हूँ" अभी अभी हम भारत से लौटा हूँ,
बीच में हम जापान भी देखा हूँ.
राजा ने कहा, अच्छा तो तुम भारत से लौटा है तो सोना चांदी दिखाओ, मसाला दिखाओ और दो चार मड़ियाल आदमी दिखाओ.
कोलंबस बोला, "महाराज हम ज्यादा नही घूम सका, आपके खिदमत में दो चार भारतीयों को पकड़ कर लाया हूँ. कोलंबस ने पकड़कर लाए कैरिबियाई आदिवासियों को पेश कर दिया.
दरबार में सभी ने कैरिबियन आदिवासियों को भारतीय समझ लिया. राजा ने खुश होकर 17 जहाज और 1200 नाविकों और सैनिकों को कोलंबस के साथ भेज दिया ताकि भारत से मसाला और सोना चांदी ला सके.
कोलंबस दुबारा कैरिबियाई द्वीप क्यूबा, पोर्टो रीको और बहमास में भटकता रहा. कुछ नही मिलने पर उसने आदिवासियों का हाथ काटना शुरू किया.
बाद में Amerigo Vespucci ने अमेरिका को खोजा और राजा को वापस जाकर कहा, कोलंबस मूर्ख है, उसने भारत या एशिया नही एक नया महाद्वीप खोजा है. इसी कारण Amerigo के नाम पर America का नाम पड़ा.