बात सिर्फ एक भर्ती की नहीं है, बात है सामान्य वर्ग के अधिकार की। अगर आज वो राजनीतिक दबाव बनाकर एक शिक्षक भर्ती की 90% से अधिक सीटों को आरक्षित घोषित करा लेते हैं तो आगे हर भर्ती में ऐसा होगा। ये सब यहीं तक सीमित नहीं रहेगा आगे पुलिस भर्ती व अन्य भर्तियों में भी ऐसा ही होगा।
अब देश को संविधान से नहीं बल्कि जातिगत दबाव से चलाने की कोशिश की जा रही है। अगर आपको संविधान पर भरोसा है तो राजनीतिक दबाव क्यों बनाया जा रहा है? क्यों सरकार को विवश किया गया कि वो सुप्रीम कोर्ट न जाए? आरक्षण के नाम पर एक बड़ी साजिश रची जा रही है जो सिर्फ सरकार के खिलाफ ही नहीं है बल्कि वो संविधान के खिलाफ भी है!